कर्नाटक राज्य के शृंगेरी (जिला चिक्कमगळुरू) और कोल्लुरू (जिला उडुपी) के मंदिर

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१. शृंगेरी शारदा मंदिर, चिक्कमगळुरू, कर्नाटक

शारदा मंदिर के बाहर श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

१ अ. शृंगेरी शारदा मंदिर का इतिहास

कर्नाटक राज्य के चिक्कमगळुरू जिले में तुंगा नदी के तट पर शृंगेरी नाम का गांव है । यहां के पर्वत पर पहले शृंगऋषि रहते थे; इसलिए इस स्थान का नाम ‘शृंग गिरि’ पडा । आगे शृंगगिरी का रूपांतर ‘शृंगेरी’ हो गया । २ सहस्र ६०० वर्षों पूर्व आद्य शंकराचार्य इस स्थान पर आए थे । एक बार उन्होंने तुंगा नदी के तट पर एक आश्‍चर्यकारक घटना देखी । एक नाग अपने फन के नीचे गर्भवती मादा मेंढक की सूर्य से रक्षा कर रहा था । यह दृश्य देख आद्य शंकराचार्य को लगा कि जहां बैरभाव ही नष्ट हो गया हो, उस भूमि की कुछ विशेषता अवश्य है । आगे उन्होंने तुंगा नदी के तट पर ‘शारदादेवी’की (सरस्वती के एक रूप की) मूर्ति की स्थापना की और उन्होंने स्थापित किए ४ मठों में से पहला मठ यहां स्थापित किया । तब से उस मठ को ‘शृंगेरी शारदापीठ’ नाम पड गया ।

१ आ. शृंगेरी मठ के दर्शन और तदुपरांत हुई विशेष घटनाएं !

१ आ १. श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने शृंगेरी मठ के वर्तमान के शंकराचार्य और उनके उत्तराधिकारी का हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए आशीर्वाद लेना

इस अवसर पर श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने शृंगेरी शारदापीठ के ३६ वें शंकराचार्य जगद्गुरु श्री श्री भारतीतीर्थ महास्वामीजी और उनके उत्तराधिकारी ३७ वें शंकराचार्य जगद्गुरु श्री श्री विदुशेखर भारती स्वामीजी से मिलकर हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए उनके आशीर्वाद लिए ।

शंकराचार्य जगद्गुरु श्री श्री विदुशेखर भारती स्वामीजी की पूर्वजीवन की दादी और श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

 

विद्याशंकर मंदिर के बाहर श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

१ इ. शारदादेवी के मंदिर के परिसर में ‘विद्याशंकर मंदिर’के विशेष खंभा

शारदादेवी के मंदिर के परिसर में प्राचीन ‘विद्याशंकर मंदिर’ है । इस मंदिर के अंदर १२ राशियों के १२ खंभे हैं । इन खंभों की विशेषता यह है कि सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है, उस राशि के खंभे पर सूर्य का प्रकाश पडता है ।

२. श्री मूकांबिकादेवी मंदिर, कोल्लुरू (जिला उडुपी), कर्नाटक.

२ अ. श्री मूकांबिकादेवी के मंदिर का इतिहास

कर्नाटक राज्य के उडुपी जिले में ‘सौपर्णिका’ नदी के तट पर ‘कोल्लुरू’ नामक गांव है । इस गांव के पीछे ‘कोडचाद्री’ नामक पर्वत है । सत्ययुग में देवी ने कोडचाद्री पर्वत पर मूकासुर का वध करने के उपरांत देवी का नाम ‘मूकांबिका’ पड गया । इस पर्वत पर आद्य शंकराचार्यजी को मूकांबिकादेवी ने दर्शन दिए थे । आगे आद्य शंकराचार्य ने कोडचाद्री पर्वत की तलहटी पर स्थित कोल्लुरू गांव में एक स्वयंभू शिवलिंग के रूप में मूकांबिका देवी की स्थापना की । इस शिवलिंग के ठीक मध्यभाग पर एक सुवर्ण रेखा है । – श्री. विनायक शानभाग, मुल्की, कर्नाटक.

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