विदेशियों को संस्कृत भाषा का महत्त्व समझ में आता है, किंतु भारतीयों द्वारा इस भाषा की उपेक्षा !

भारतवासियों पर अंग्रेजी भाषा का बढता प्रभाव और उसका परिणाम चिंता का विषय है । प्रस्तुत लेख से यह ध्यान में आता है कि विदेशी नागरिकों को संस्कृत भाषा का महत्त्व समझ में आया; किंतु स्वभाषा के अमूल्य एवं अलौकिक ज्ञान से भारतीय कितने अनभिज्ञ हैं ।

दान और अर्पण का महत्त्व एवं उसमें भेद

‘पात्रे दानम् ।’ यह सुभाषित सर्वविदित है । दान का अर्थ है ‘किसी की आय और उसमें से होनेवाला व्यय घटाकर, शेष धनराशि से सामाजिक अथवा धार्मिक कार्य में योगदान ।’

मानव-निर्मित कीटनाशक मानव का मित्र अथवा शत्रु ?

‘विषैले रासायनिक कीटनाशकों ने कृषि को नष्ट करनेवाले कीटों के साथ-साथ मच्छरों की संख्या कम करने में सहायता की, परंतु इन विषैले रसायनों के कारण अनेक उपयुक्त और हानिरहित प्राणियों और कीटों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है ।

पत्ते तोडे जाने पर वृक्ष वेदना में जोर से चिल्लाते हैं ! – शोधकर्ताओं के निष्कर्ष

शोध से पता चला है कि जब पेड-पौधों से पत्तियां तोडी जाती हैं, तो उन्हें वेदना होती है और वे चिल्लाते हैं । तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह शोध किया है ।

यदि आप एन्‍टीबायोटिक औषध ले रहे हैं, तो एक बार विचार अवश्‍य करें !

एंटीबायोटिक अथवा प्रतिजैविक का अर्थ है, बैक्‍टीरिया (जीवाणु) मारनेवाली अथवा उसे कमजोर करनेवाली औषध ।

वर्ष २०२१ में भी कोरोना रहेगा ! – मनोवैज्ञानिक, निकोलस ओजुला, की भविष्यवाणी

२०१८ में कोरोना की भविष्यवाणी करने वाले ३५ वर्षीय मनोवैज्ञानिक, निकोलस ओजुला, ने भविष्यवाणी की है कि कोरोना का प्रभाव २०२१ में जारी रहेगा ।

भूमि खरीद और ठेकेदार से घर का निर्माण करवाते समय संभावित धोखाधडी टालने हेतु कानूनी बातों की आपूर्ति करें !

अनेक बार हम खाली भूमि खरीदते हैं अथवा खाली भूमि पर निर्माणकार्य करते हैं । सर्वप्रथम आपातकाल की दृष्टि से निर्माणकार्य के लिए भूमि का चुनाव करते समय उसके सभी मापदंडों की पडताल करें ।

आपातकाल की दृष्टि् से तैयारी करने के लिए नई अथवा पुरानी बैलगाडी, घोडागाडी अथवा उनके अंग (पुरजे) दान करें अथवा अल्प मूल्य में देनेवालों के विषय में जानकारी भेजें !

आपातकाल में डीजल-पेट्रोल उपलब्‍ध नहीं हो पाएंगा । तब, दैनिक आवश्‍यकताआें की पूर्ति के लिए प्राचीन काल की भांति बिना डीजल-पेट्रोल से चलनेवाले वाहनों (उदा. बैलगाडी, घोडागाडी) का उपयोग करना पडेगा । ये सब साधन प्राप्‍त करना, उन्‍हें चलाना, उनकी देखभाल और सुधार करना तथा उनसे जुडे पशुआें का पालन-पोषण करने का कौशल तुरंत सीख लेना आवश्‍यक है ।

सनातन धर्म अनेक रूपों में ईश्‍वर को पूजता है, ऐसा क्‍यों ?

हिन्‍दू धर्म में परमेश्‍वर, ईश्‍वर, अवतार तथा देवता ऐसी संकल्‍पना है । ‘ईश्‍वर’ शब्‍द सामान्‍यतः जगन्‍नियंता, सृष्‍टि-स्‍थिति-प्रलय के कर्ता, सर्वव्‍यापक, सर्वांतर्यामी और देवाधिदेव आदि अर्थों से उपयोग किया जाता है । प्रत्‍यक्ष में ईश्‍वर एक ही हैं, तथा वह निर्गुण, निराकार हैं ।