‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर सनातन संस्था की साधिकाओं का सम्मान

‘विश्व महिला दिवस’ के उपलक्ष्य में ‘गायत्री परिवार’ की ओर से उल्लेखनीय धर्मकार्य करने के लिए यहां की सनातन संस्था की साधिका श्रीमती मंगला दरवे एवं श्रीमती दीपाली सिंगाभट्टी को सम्मानित किया गया ।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक द्वारा सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी का सम्मान

सनातन संस्था के धर्मप्रचारक संत सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने परिवार सहित वाराणसी के काशी विश्वनाथजी के दर्शन किए । इस समय श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक आचार्य टेक नारायण उपाध्यायजी ने सदगुरु जाधव जी और उनके परिवार का सम्मान किया ।

‘श्रीगुरु गौरव दीक्षा शताब्दी महोत्सव’ में सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले जी सम्मानित !

दत्त परंपरा के महान संत और शक्तिपात योग के प्रवर्तक प.पू. गुलवणी महाराज के दीक्षा शताब्दी महोत्सव के अवसर पर, सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बालाजी आठवले जी को सम्मानित किया गया । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले जी की ओर से सनातन संस्था की सद्गुरु स्वाती खाडये ने या सम्मान स्वीकार किया ।

महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सनातन के ग्रंथों एवं सात्त्विक उत्पादों का अधिक से अधिक वितरण करें !

१५.२.२०२६ को महाशिवरात्रि है । इस उपलक्ष्य में हमें सनातन के ग्रंथ, लघुग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों को अधिक से अधिक जिज्ञासुओं तक पहुंचाने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ है । इस अवसर का लाभ उठाकर साधक निम्नांकित ग्रंथ एवं प्रसारसामग्री के अधिकाधिक वितरण हेतु प्रयास करें ।

अपने क्षेत्र में सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी आयोजित कर अध्यात्मप्रसार के कार्य में सहभागी हों !

‘अध्यात्मशास्त्र आचरण में लाकर मानवजाति का कल्याण हो’, इस उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अध्यात्म, साधना, देवताओं की उपासना, संस्कृति का पालन, राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति और हिन्दू राष्ट्र जैसे विविध विषयों पर ३६९ ग्रंथों का संकलन किया है ।

पानसरे हत्या प्रकरण में फंसाए गए निर्दोष समीर गायकवाड का निधन यह व्यवस्था द्वारा ली गई ‘बलि’ ही है ! – सनातन संस्था

समीर का निधन, यह व्यवस्था द्वारा ली गई ‘बलि’ ही है ! – सनातन संस्था

800 संगठनों का संकल्प – सनातन संस्कृति की रक्षा का !

आज हिंदुओं की सत्ता केवल भारत के कुछ राज्यों तक सीमित है। अतः केवल त्योहारों में रमने के बजाय, शेष प्रदेशों को पुनः हिंदू संस्कृति के रंग में लाना प्रत्येक का कर्तव्य है। तभी भारत केवल हिंदू राष्ट्र नहीं, बल्कि “प्रजासत्ताक हिंदू राष्ट्र” बनेगा।

दिल्ली में ‘शंखनाद महोत्सव’ में प्राचीन भारत की युद्धकला का अद्भुत पुनर्जागरण !

महोत्सव में छत्रपति शिवाजी महाराज की शस्त्रकला का प्रभावशाली प्रदर्शन, मणिपुर की पारंपरिक थांग-ता (तलवार और भाला) युद्धकला का सजीव प्रस्तुतिकरण तथा हिंदू जनजागृति समिति द्वारा महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के प्रतिकार की व्यावहारिक झलकियां प्रस्तुत की गईं।

दिल्ली में शिवकालीन शस्त्र और ‘वंदे मातरम्’ प्रदर्शनी का उद्घाटन दिल्ली के संस्कृति मंत्री के हाथों

शिवकालीन शस्त्रों के संग्राहक श्री राकेश धावड़े ने मांग की कि भारत में इन शस्त्रों का स्थायी संग्रहालय स्थापित किया जाए। इस पर संस्कृति मंत्री श्री मिश्रा ने आश्वासन दिया कि “दिल्ली के मध्य में भारतीय शस्त्र परंपरा और पारंपरिक शस्त्रों का एक भव्य संग्रहालय स्थापित किया जाएगा।”

देश की राजधानी में ‘सनातन राष्ट्र’ का भव्य शंखनाद !

आज ओटीटी और सोशल मीडिया के माध्यम से अश्लीलता का प्रसार हो रहा है। जैसे हिंदवी स्वराज्य की स्थापना हुई, वैसे ही हिंदू राष्ट्र के निर्माण हेतु भारत की शिक्षा प्रणाली में अनुशासन और कठोरता की आवश्यकता है। हर भारतीय को ‘विकृति सामग्री मुक्त भारत’ का संकल्प लेना चाहिए, ऐसा आवाहन श्री. उदय माहूरकर जी ने किया।