नाखून किस दिन काटने चाहिए, इस विषय में ज्योतिषशास्त्र का दृष्टिकोण
आजकल के स्पर्धा और भाग-दौड-भरे जीवन में सात्त्विकता बचाने के लिए छोटी-से-छोटी क्रिया शास्त्रानुसार करने से लाभ निश्चित होता है ।
आजकल के स्पर्धा और भाग-दौड-भरे जीवन में सात्त्विकता बचाने के लिए छोटी-से-छोटी क्रिया शास्त्रानुसार करने से लाभ निश्चित होता है ।
शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो; इसलिए ज्योतिषशास्त्रानुसार व्याधि से ग्रस्त व्यक्ति को धन्वंतरी देवता को प्रार्थना करके औषधि लेनी चाहिए ।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में आज इतना विकास हुआ है कि आज हम भारतीय अंतरिक्ष में चंद्रयान भी भेज सकें । ऐसा होते हुए भी कौन से क्षेत्र में अतिवृष्टि होगी, यह विज्ञान अथवा प्रौद्योगिकी निश्चितरूप से बता नहीं सके । मौसम विभाग के अनुमान तो इतने चूक जाते हैं कि सार्वजनिक रूप से मौसम विभाग का उपहास किया जाता है ।
पुराने और नई जन्मतिथि के अनुसार संपूर्ण भविष्य में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं आता । तिथि के बदलने से केवल तिथि का फल बदलता है ।
सामान्यरूप से आजकल जन्मकुंडली के आधारपर ज्योतिषी जो बताते हैं, उसमें का केवल ३० से ३५ प्रतिशत भविष्यवाणी अचूक होती है ।
‘ज्योतिष’ शब्द ज्योति + ईश से बना है । ‘ज्योति’ का अर्थ ‘तेज’ तथा ‘ईश’ का अर्थ ‘ईश्वर’ अर्थात ‘ईश्वर के तेज से युक्त शास्त्र ज्योतिषशास्त्र है ।
हर्षल, नेपच्युन तथा प्लुटो इन ग्रहों का शोध चाहे आधुनिक युग में किया गया हो; परंतु उससे पहले भी उनका अस्तित्व था और ग्रंथों में उनका उल्लेख भी मिलता है ।