जितना हास्यास्पद एक अशिक्षित का यह कहना है कि ‘सूक्ष्म जंतु नहीं होते’; उतना…..

‘जितना हास्यास्पद एक अशिक्षित का यह कहना है कि ‘सूक्ष्म जंतु नहीं होते’; उतना ही हास्यास्पद बुद्धिप्रमाणवादियों का यह कहना है कि ‘ईश्वर नहीं होता !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के समर्थकों, मानव को मानव देहधारी प्राणी मत बनाओ !

‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर उसके समर्थक आसमान सिर पर उठा लेते हैं । वे भूल जाते हैं कि प्राणी और मानव इनमें महत्त्वपूर्ण भेद यही है कि प्राणी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अनुसार अर्थात स्वेच्छा से आचरण करते हैं; इसके विपरीत मानव व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भूलकर, क्रमशः परिवार, समाज राष्ट्र एवं धर्म के हित का … Read more

दिशाहीन बुद्धिप्रमाणवादी एवं आधुनिकतावादी !

‘जिस प्रकार दृष्टिहीन की ‘मेरे पीछे चलो’ यह बात माननेवाले उसी के पीछे गड्ढे में गिरते हैं, उसी प्रकार बुद्धिप्रमाणवादियों एवं आधुनिकतावादियों के साथ है । वे दिशाहीनता के कारण स्वयं गड्ढे में गिरते हैं और उनके साथ-साथ उनके पीछे चलनेवाले भी गिरते हैं ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

कृतघ्नता की उच्चतम सीमा !

‘हम मां का दूध पीते हैं, उसी प्रकार गाय का दूध पीते हैं; इसलिए गाय को गौ माता कहते हैं । ऐसे में गाय की ही हत्या करना, मां की हत्या करने के समान ही है । यह कृतघ्नता की उच्चतम सीमा है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

प्रशासन एवं नेताओं के लिए लज्जाजनक !

‘चूक होने पर सामान्य व्यक्ति भी क्षमा मांगता है; परंतु असंख्य चूकें करनेवाले पुलिस, प्रशासन के व्यक्ति तथा नेता क्या कभी एक बार भी क्षमा मांगते हैं ?’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

व्यवहार एवं अध्यात्म में भेद !

‘व्यवहार में पैसे मिलते हैं, तो व्यक्ति अपने पास रखता है; परंतु अध्यात्म में ईश्वर का प्रेम मिलता है, तो उसे संत सभी में बांटते हैं !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

*कृतघ्न युवक-युवतियां !

‘जिन माता पिता ने जन्म दिया और छोटे से बडा किया, उनके बुढापे में अनेक कृतघ्न युवक- युवतियां उनका ध्यान नहीं रखते । माता-पिता का ध्यान न रखनेवाले क्या कभी भगवान के प्रिय होंगे ?’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी यह ध्यान में रखें !

‘काम न करना, भ्रष्टाचार करना इत्यादि के अभ्यस्त हो चुके अधिकांश पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी इन्हें कोई भी निजी प्रतिष्ठान एक भी दिन नौकरी के लिए नहीं रखेगा !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉक्टर आठवले

छोटे बच्चों जैसे बुद्धिप्रमाणवादी !

‘बुद्धिप्रमाणवादियों को कभी विश्वबुद्धि से ज्ञान मिलता है क्या ? ‘विश्वबुद्धि’ जैसा भी कुछ है और उस विश्वबुद्धि से ज्ञान मिलता है, यह भी उन्हें ज्ञात है क्या ? यह ज्ञात न होने के कारण ही छोटे बच्चे जैसे बडबडाते हैं; वैसे ही वे भी बडबडाते हैं !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

वास्तव में प्रदूषण का निवारण करना है तो पहले मन का प्रदूषण दूर करें !

‘प्रदूषण के विषय में सर्वत्र दिखावा कर जो उपाय किए जाते हैं, वे रोग के मूल पर उपाय करने की अपेक्षा, ऊपरी उपाय करने के समान हैं । प्रदूषण के लिए कारणभूत रज-तम प्रधान मन एवं बुद्धि को साधना से सात्त्विक किए बिना, अर्थात मूलगामी उपाय किए बिना, किए गए ऊपरी उपाय हास्यास्पद हैं । … Read more