दैवी गुणोंसहित कर्म करने पर साधना होती है ।
दैवी गुणोंसहित कर्म करने पर साधना होती है । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
दैवी गुणोंसहित कर्म करने पर साधना होती है । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
‘सामने आनेवाला प्रत्येक मनुष्य को उस पल के लिए भगवान ने ही हमारे सामने भेजा है’, ऐसा विचार कर उसके लिए जितना कर पाएं, करना चाहिए । इससे जीवन सरल सुंदर बनता है । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
सेवा करते समय व्यक्ति की अपेक्षा तत्त्व की ओर ध्यान देना, ही वैराग्य है । व्यक्तिनिष्ठता का त्याग कर तत्त्वनिष्ठता का पालन करना, अर्थात् वैराग्य अपने में अंकित करना । प्रत्येक बात में ईश्वर को देखना, ही वास्तव में वैराग्य है ! श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
तुम कितने भी दैवी हो, किंतु माया के कारण तुम पर आवरण आकर तुम को तुम्हारे मूल वंश का विस्मरण होता है । अतः निरंतर सत्संग में रहना महत्त्वपूर्ण है । अधिकांश छोटे बालक दैवी बालक होते हैं; किंतु सत्संग के अभाव के कारण उनका जीवन सफल नहीं हो सकता । जब शेर का बछडा … Read more