चिरंतन आनंद केवल साधना से ही मिलता है ।

‘ईश्वर और साधना पर विश्‍वास न हो, तब भी चिरंतन आनंद प्रत्येक को चाहिए । वह आनंद केवल साधना से ही मिलता है । एक बार यह ध्यान में आने पर, साधना का कोई विकल्प न होने के कारण मानव साधना हेतु प्रवृत्त होता है ।’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

यज्ञ के स्थूल और सूक्ष्म धुएं से होनेवाला परिणाम 

‘जिस प्रकार शरीर के कीटाणु शरीर में ली गई औषधियों से मरते हैं । उसी प्रकार वातावरण में विद्यमान नकारात्मक रज-तम यज्ञ के स्थूल और सूक्ष्म धुएं से नष्ट होते हैं ।’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

हिन्दू राष्ट्र में अपराधी नहीं होंगे

‘हिन्दू राष्ट्र में (ईश्‍वरीय राज्य में) समाचार पत्रिकाएं, दूरचित्रवाहिनियां, संकेतस्थल इत्यादि का उपयोग केवल धर्मशिक्षा और साधना हेतु किया जाएगा । इस कारण अपराधी नहीं होंगे और सभी ईश्वर के अनुसंधान में रहने के कारण आनंदी होंगे ।’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

खरी शांति का अनुभव कब होता है ?

‘निर्गुण ईश्‍वरीय तत्त्व से एकरूप होने पर ही खरी शांति का अनुभव होता है । तब भी शासनकर्ता जनता को साधना न सिखाकर ऊपरी मानसिक स्तर के उपाय करते हैं, उदा. जनता की अडचनें दूर करने के लिए ऊपरी प्रयत्न करना, मानसिक चिकित्सालय स्थापित करना इत्यादि ।’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

अज्ञानी

‘जो हिन्दू धर्म की आलोचना करते हैं, इस संसार में उनके समान अज्ञानी कोई नहीं है !’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

हिन्दुओं को केवल धर्म ही एकत्र ला सकता है ।

‘भारत के हिन्दुओं में हिन्दू धर्म के अतिरिक्त सभी बातें जैसे भाषा, त्यौहार, उत्सव, कपडे इत्यादि विविध राज्यों में अलग अलग हैं । इसलिए हिन्दुओं को केवल धर्म ही एकत्र ला सकता है । कम से कम अब तो हिन्दुओं को धर्म का महत्त्व समझकर, सभी को एकजुट करने का प्रयास करना अत्यावश्यक है ।’ … Read more

सूक्ष्मातिसूक्ष्म विश्व साधना से समझ में आता है ।

‘कीटाणु आँखों से दिखाई नहीं देते; परंतु सूक्ष्मदर्शी यंत्र से दिखाई देते हैं । उसी प्रकार जो सूक्ष्मदर्शी यंत्र से दिखाई नहीं देता, ऐसे सूक्ष्मातिसूक्ष्म विश्व साधना से समझ में आता है ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

सनातन प्रभात और अन्य नियतकालिकों में भेद

अन्य नियतकालिकों में बच्चों के जन्मदिन के उपलक्ष्य में छायाचित्र छापने हेतु विज्ञापन के पैसे देते हैं, जबकि ‘सनातन प्रभात’ में गुणवान बच्चों के छायाचित्रों के साथ उनकी आध्यात्मिक गुणविशेषताएं भी छापते हैं ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

हिन्दू राष्ट्र में सब कानून…

हिन्दू राष्ट्र में सब कानून धर्म पर आधारित होंगे । अतः उनमें संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी । इनके पालन से समाज अपराध-मुक्त होकर साधनारत होगा ! -(परात्पर गुरु) डॉ.आठवले

प्रत्येक पीढी के कर्तव्य !

‘प्रत्येक पीढी अगली पीढ़ी को समाज, राष्ट्र और धर्म के संदर्भ में अपेक्षा से देखती है । इसके स्थान पर प्रत्येक पीढी को ‘हम क्या कर सकते हैं ?’, ऐसे विचार कर ऐसा कार्य करना चाहिए कि अगली पीढ़ी को उसके संदर्भ में कुछ भी करने की आवश्यकता ही न हो और इस कारण वे … Read more