हिन्दू संस्कृति और पश्चिमी संस्कृति में फर्क
‘पश्चिमी संस्कृति शरीर, मन व बुद्धि को सुख देने हेतु प्रयत्नशील रहती है; जबकि हिन्दू संस्कृति ईश्वरप्राप्ति का मार्ग दिखाती है ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
‘पश्चिमी संस्कृति शरीर, मन व बुद्धि को सुख देने हेतु प्रयत्नशील रहती है; जबकि हिन्दू संस्कृति ईश्वरप्राप्ति का मार्ग दिखाती है ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
‘हिन्दू धर्म की सीख है कि ‘ईश्वर सर्वत्र हैं, सभी में हैैं’ । इसीलिए हिन्दुओं को अन्य पंथियों का द्वेष करना नहीं सिखाया जाता ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
विजयादशमी से हिन्दू समाज और देशहित की रक्षा के लिए सीमोल्लंघन करें ! ‘वर्ष २०२१ ते २०२३ का काल जागतिक विश्वयुद्ध का होगा । इस काल में भारतीय सेना को भी सीमोल्लंघन करना पडेगा । भारतीय सीमा पर युद्ध प्रारंभ होने के पश्चात शत्रु राष्ट्रों के समर्थक बने देशांतर्गत शत्रु अराजकता उत्पन्न करने के लिए … Read more
‘अब तक हम कौशल विकास हिन्दू राष्ट्र – स्थापना के लिए हिन्दुओं को संगठित करने की दृष्टि से कर रहे थे । अब काल के अनुसार आपातकालीन परिस्थिति का प्रतिकार करने की दृष्टि से विशेषतः हिन्दुओं की रक्षा की दृष्टि से कौशल विकास करना होगा । वर्तमानकाल, आपातकाल अर्थात संकटकाल है और छह माह में … Read more
‘भारत में ‘भारतरत्न’ सर्वाेच्च पद है । संसार में ‘नोबेल प्राईज’ सर्वाेच्च पद है, और सनातन में उद्घोषित किया जानेवाला ‘जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति’ और ‘संत’ पद ईश्वर के विश्व में सर्वाधिक महत्त्व का है !’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
‘गरीबी होना अथवा न होना, इसके पीछे ‘प्रारब्ध’ ऐसा कुछ कारण है’, यह न जाननेवाले साम्यवाद की डींगे हांकते है और जो गरीब हैं अथवा नहीं है, उनमें समानता लाने का प्रयत्न करते हैं !’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
‘पश्चिमी शिक्षण किसी भी समस्या के मूल कारण तक, उदा. प्रारब्ध, अनिष्ट शक्ति, कालमहात्म्य तक नहीं जाता । क्षयरोग होने पर क्षयरोग के कीटाणु मारने की औषधि न देकर केवल खांसी की औषधि देने जैसा उनका उपाय है !’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
‘जहां विज्ञान पृथ्वीतत्त्व के अंतर्गत विषयों से संबंधित है, वहीं अध्यात्म ‘पृथ्वी, आप, तेज, वायु तथा आकाश’ इन पंचमहाभूतों और निर्गुण तत्त्व से संबंधित है । इस कारण ही विज्ञान पृथ्वी के बाहर स्थित अन्य पृथ्वी का ही अध्यन करता है; जबकि अध्यात्म पंचमहाभूतों के परे निर्गुण तत्त्वों का अध्यन भी करता है और अनुभूति … Read more
‘बुद्धिप्रमाणवादियों का यह कहना कि बुद्धि के परे ईश्वर नहीं होते हैं’, यह नर्सरी के बच्चों का डॉक्टर, अधिवक्ता इत्यादि नहीं होते हैं’, ऐसे बोलने जैसा है !’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
मानव को मानवता न सिखानेवाला, उसके विपरीत विध्वंसक अस्त्र, शस्त्र देनेवाला विज्ञान का मूल्य शून्य है ! – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले