
‘सनातन संस्था तथा संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के नाम से “व्यवसाय का अधिक अच्छे प्रकार से नियोजन करने के लिए तथा आंतरिक समन्वय सुधारने के लिए हम कार्य-संबंधी संवाद हेतु व्हॉट्सएप का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं”, इस प्रकार के फर्जी ई-मेल कुछ लोगों को प्राप्त हुए हैं ।
सनातन संस्था ने इस प्रकार का कोई भी उपक्रम अथवा व्यवसाय आरंभ नहीं किया है । साथ ही सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी केवल साधकों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन तथा ग्रंथ-संकलन की सेवा कर रहे हैं तथा संस्था के नित्य उपक्रमों का दायित्व संस्था के न्यासियों पर है ।
संस्था की ओर से भेजे जानेवाले अधिकृत ई-मेल के अंत में @sanatan.org लिखा होता है, इस ओर कृपया ध्यान दें ।
यदि आपको संस्था की ओर से अथवा संस्था के संतों या साधकों के नाम से इस प्रकार के ई-मेल प्राप्त हों, तो उनका उत्तर न दें । उन्हें केवल जानकारी हेतु [email protected] इस ई-मेल पते पर अग्रेषित करें ।’
– श्री वीरेंद्र मराठे, प्रबंधकीय न्यासी, सनातन संस्था
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