

फोंडा (गोवा) – १३ जुलाई २०२६ को हिन्दू धर्मरक्षा हेतु अविरत कार्य करनेवाले रामानंदाचार्य दक्षिण पीठ, नाणीजधाम (रत्नागिरी) के जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी का रामनाथी, गोवा स्थित सनातन आश्रम में मंगलमय आगमन हुआ । साधक श्री. योगश जलतारेजी ने उनके आश्रम दिखाया ।

Jagadguru Shrimad Ramanandacharya Swami Narendracharyaji Maharaj of Ramanandacharya Dakshin Peeth, Nanijdham (Ratnagiri), visited the Sanatan Ashram at Ramnathi, Goa, where Shri Yogesh Jaltare, briefed Him on Sanatan Sanstha’s work for the Nation, #Dharma and spiritual research.… pic.twitter.com/YkmeGIWu1e
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) July 13, 2026
थोर संत महात्माओं की भेंट

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की प्राणशक्ति अतिअल्प होते हुए भी उन्होंने जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी से भेंट की तथा कार्य के लिए उनसे आशीर्वाद लिए ।
Jagadguru Shri Ramanandacharya Swami Narendracharya ji met Sachchidananda Parabrahman (Dr) Athavale, and they felicitated each other.
Speaking about Sachchidananda Parabrahman (Dr) Athavale, Jagadguru Shri Ramanandacharya ji propounded the philosophy of Vishishtadvaita.
” As… pic.twitter.com/Wdvoy3nrM2
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) July 13, 2026
भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ सम्मान समारोह ।

जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य परंपरा के अनुसार पहले मंगलाचरण का पाठ संपन्न हुआ तथा उसके उपरांत उन्होंने साधकों का मार्गदर्शन किया । मार्गदर्शन के आरंभ में सनातन की साधक दंपति श्री. अभिषेक पै एवं श्रीमती सिद्धी पै ने गुरुपादुकाओं का पूजन किया, साथ ही जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी का औक्षण किया (रोली चावल लगाकर आरती करना) । इस अवसर पर सनातन के पुरोहित श्री. सिद्धेश करंदीकर ने मंत्रपाठ किया । इसके पश्चात सनातन के संत पू. पृथ्वीराज हजारेजी ने जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी को पुष्पमाला पहनाकर तथा भेंटवस्तुएं अर्पण कर उनका भावपूर्ण सम्मान किया । इस अवसर पर उनके साथ पधारे सभी भक्तों को भी सम्मानित किया गया । इस अवसर पर भारताचार्य पू. (प्रा.) सु.ग. शेवडेजी एवं सनातन की संत पू. (श्रीमती) ज्योती ढवळीकरजी की वंदनीय उपस्थिति थी ।
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की कुंजी है ! – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी द्वारा रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में किया मार्गदर्शन
‘कलियुग के चुनौतीपूर्ण काल में केवल भक्ति होना पर्याप्त नहीं है, अपितु समाज के प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं में विद्यमान सात्त्विकता को जागृत कर संगठित होना ही समय की मांग है । केवल मनुष्य जीवन में ही स्वयं का भाग्य बदलने का सामर्थ्य होता है, अतः उचित गुरु के मार्गदर्शन में कार्य करने से विश्वशांति का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है’ ।
जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने कहा कि,
१. हिन्दू धर्मियों को सभी भेद भूलकर एकत्रित होना आवश्यक है । हमारा तथा प.पू. डॉ. आठवलेजी का (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी) का लक्ष्य (कार्य) एक ही है तथा वह है हिन्दू धर्म की रक्षा एवं उत्थान ।
२. कलियुग में रज एवं तम इन गुणों का प्रभाव अपनेआप बढता है, उसके लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती । ये गुण मनुष्यजीवन को पतन की ओर ले जाते हैं । इन गुणों का प्रभाव नष्ट कर सात्त्विकता बढाने के लिए समाज को ‘साधना’ करना अनिवार्य है ।
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी अवतारी पुरुष हैं ! – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी) का कार्य असाधारण है । भगवान ने उन्हें पृथ्वी पर एक विशेष उद्देश्य से भेजा है । वे अवतारी पुरुष हैं । सनातन संस्था विश्वशांति के लिए कार्य कर रही है । सनातन के साधक अत्यंत भाग्यशाली हैं कि उन्हें परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी जैसे सद्गुरु प्राप्त हुए हैं । इस आश्रम में साधक सद्गुरु के मार्गदर्शन में अपना आत्ममूल्यांकन कर रहे हैं । गुरु के बिना आत्मसाक्षात्कार संभव नहीं है, किंतु सनातन आश्रम में गुरु के मार्गदर्शन में आत्मसाक्षात्कार के लिए साधना चल रही है । गुरु-कृपा के संरक्षण में रज-तम का नाश कर सात्त्विकता बढाने के लिए साधक निरंतर प्रयत्नशील हैं । ऐसा मार्गदर्शन रामानंदाचार्य दक्षिण पीठ, नाणीजधाम (रत्नागिरी) के जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने आश्रम के साधकों को दिया ।
During His visit to Sanatan Sanstha’s Ashram Jagadguru Shrimad Ramanandacharya Swami Narendracharyaji said
Sachchidananda Parabrahman (Dr) Athavale’s, work is extraordinary, that God has sent him to Earth, and that he is an Avatari Purush. He praised Sanatan Sanstha’s work for… pic.twitter.com/kyrhnFzSfm— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) July 14, 2026
सनातन संस्था के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार ।
१. प.पू. डॉ. आठवलेजी अंतर्बाह्य सत्पुरुष हैं तथा उनके मार्गदर्शन में सनातन के साधक संपूर्ण विश्व में विश्वशांति का असामान्य कार्य कर रहे हैं । यह कार्य अन्य किसी भी संप्रदाय को इतनी सहजता से संभव नहीं हुआ है, क्योंकि यहां गुरुतत्त्व को प्रधान माना जाता है तथा अनुशासित पद्धति से साधना की जाती है ।
२. आप सभी साधक पुण्यात्माएं हैं, इसिलिए इस जन्म में आपको प.पू. डॉ. आठवलेजी के रूप में रत्न प्राप्त हुआ है ।
३. प.पू. डॉ. आठवलेजी की ओर से प्रक्षेपित होनेवाले मात्र स्पंदनों के कारण ही साधकों की आध्यात्मिक प्रगति हो रही है ।
४. आश्रम में विद्यमान स्पंदन आत्मचैतन्य की ओर ले जानेवाले हैं तथा यहां के साधकों में भी यह चैतन्य (सात्त्विकता) दिखाई दे रहा है ।
५. साधक प.पू. डॉ. आठवलेजी का आज्ञापालन करें, जिससे उनके जीवन का कल्याण होगा ।
‘सनातन प्रभात’ शुद्ध है और सत्य है !
जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने श्री. योगेश जलतारे से ‘सनातन प्रभात’ मीडिया समूह के कार्य के बारे में विस्तारपूर्वक और जिज्ञासापूर्वक जानकारी प्राप्त की । उन्होंने कहा, “साधक सेवा-भाव से समाचार संकलित करने का कार्य कर रहे हैं, इसलिए ‘सनातन प्रभात’ शुद्ध है और इसी कारण वह सत्य भी है ।” ऐसा कहते हुए उन्होंने साधकों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया ।
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