बहुगुणी आंवला !

 

१. आंवला – औषधियों का राजा

‘आंवला पृथ्वी पर अमृत है ! आंवला शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्ट दूर करने के लिए उपयुक्त है; इसलिए आयुर्वेद में इसे ‘औषधियों का राजा’ कहते हैं । ‘आमला एकादशी’ पर श्रीविष्णु को आंवला अर्पण करते हैं । ठंड के दिनों में आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करते हैं । तुलसी विवाह में आंवला अवश्य उपयोग में लाया जाता है । आंवले में विष्णुतत्त्व अधिक मात्रा में होता है । ऐसे आंवले का आध्यात्मिक स्तर पर अत्यधिक लाभ होता है ।

आयुर्वेद के तत्त्व के अनुसार ‘पित्त, बद्धकोष्ठता, केश गिरना, समय से पहले बाल सफेद होना, त्वचारोग, जीवनसत्व ‘सी’ की कमतरता’ पर रामबाण उपाय, अर्थात आंवलेे का सेवन करना ।

 

२. आंवले से बनाए जानेवाले पदार्थ

श्रीमती शीतल जोशी
अ. आंवला चूर्ण आ. सूखा आंवला
इ. आंवला सुपारी ई. मुरब्बा
उ. शरबत ऊ. आंवला कैंडी
ए. चाश्‍नी में डुबाया आंवला ऐ. आचार
ओ. आंवला तेल औ. च्यवनप्राश

 

३. इनमें से कुछ पदार्थ बनाने की पद्धति

३ अ. आंवला चूर्ण

दो प्रकार से तैयार कर सकते हैं ।

१. प्रथम आंवला स्वच्छ धोकर उबाल लें । ठंडा होने पर उसके बीज निकालकर उसके टुकडे कडी धूप में सुखाएं । टुकडे पूरी तरह से सूखने के लिए लगभग ७-८ दिन लगते हैं । तदुपरांत उन सूखे हुए टुकडों का चूर्ण बनाएं ।

२. कच्चे आंवले के बीज निकाल लें । फिर छोटे-छोटे टुकडों में काटकर, उन्हें ७-८ दिन कडी धूप में सुखाएं । तदुपरांत पूर्ण सूखे हुए टुकडों का चूर्ण बना लें ।

इस प्रकार से बनाया हुआ आंवला चूर्ण सवेरे और रात को सोने से पहले २ चम्मच, गुनगुने पानी के साथ लेने से ‘उच्च रक्तचाप, पित्त, अपचन, कोष्ठबद्धता, केश के सभी विकार, त्वचारोग’ में अत्यंत लाभकारी होता है ।

३ आ. आंवला कैंडी

ये दो प्रकार से बनाई जा सकती है ।

१. आंवले स्वच्छ धोकर उबाल लें । तदुपरांत उसके बीज निकालकर छोटे-छोटे टुकडे करें । फिर समान मात्रा में शक्कर मिलाकर उस मिश्रण को कांच की बरनी में भरकर रखें । बरनी का मुंह सूती कपडे से बांधकर, उस बरनी को ३-४ दिन धूप में रखें । तदुपरांत बरनी में से आंवले के टुकडे निकालकर कडी धूप में सुखाएं । बरनी में नीचे शेष रह गए आंवले के पाक को शरबत की भांति प्रयोग कर सकते हैं । ये सूखे हुए टुकडे, अर्थात आंवला कैंडी अनेक दिन टिकती है ।

२. आंवले स्वच्छ धो लें । तदुपरांत उन्हें ५ से ७ दिन ‘डीप फ्रिज’में रखें । तदुपरांत उन्हें बाहर निकालकर उसके बीज निकाल लें । फिर उन टुकडों में समान अनुपात में शक्कर मिलाएं । यह मिश्रण कांच की बरनी में भरकर, बरनी का मुंह सूती कपडे से बांधकर उसे ३ – ४ दिन धूप में रखें । तदुपरांत बरनी से टुकडे निकालकर धूप में सुखाएं । पूर्ण सुखाए हुए टुकडे अर्थात ‘आंवला कैंडी’ बरनी में भरें । वह अनेक दिन टिकती है । टुकडे निकालने के उपरांत बची हुई चाश्‍नी शरबत के रूप में उपयोग कर सकते हैं ।

३ इ. आंवला सुपारी

१. आंवला स्वच्छ धोकर उबाल लें । ठंडा होने पर उसके बीज निकालकर, उसका गुदा मसल लें । फिर उसमें सैंधव नमक, अजवाइन, जीरा पाउडर और कद्दूकस की हुई अदरक मिलाएं । इस मिश्रण का चने समान बडियां बनाकर कडक धूप में सुखाएं अथवा ‘प्लास्टिक’ कागज पर इस मिश्रण की पतली परत बिछाकर उसे धूप में सुखाएं । तदुपरांत वे बडियां अर्थात ‘आंवला सुपारी’ डिब्बे में बंद कर रखें ।

२. कच्चे आंवले धोकर उन्हें कद्दूकस कर लें । फिर उसमें नमक मिलाकर वह मिश्रण कडी धूप में सुखाएं । सुखाई हुई सुपारी डिब्बे में भरकर रखें । वह बहुत दिन टिकती है ।

३ ई. मुरब्बा

१. आंवले स्वच्छ धोकर कद्दूकस कर लें । फिर इनमें सवा गुना के अनुपात में शक्कर मिलाएं । वह मिश्रण मोटे पेंदे के पतीले में मंद आंच पर पकाएं । उसमें थोडी इलायची डालें । यह मुरब्बा कांच की बरनी में भरकर रखें ।

२. आंवले स्वच्छ धोकर और उबालकर कद्दूकस कर लें । जितना कद्दूकस किया हुआ आंवला, उसके सवा गुना शक्कर उसमें मिला लें । फिर यह मिश्रण मोटे पेंदे के पतीले में मंद आंच पर पकाएं । उसमें थोडी इलायची डालें । यह मुरब्बा कांच की बरनी में भरकर रखें ।

३ उ. सूखा आंवला

१. आंवला स्वच्छ धोकर उसे उबालकर, उसके बीज निकाल लें । फिर उसके टुकडे कर उसे कडी धूप में सुखाकर, कांच की बरनी में रखें ।

२. आंवले स्वच्छ धोकर उसके बीज निकाल दें । फिर छोटे-छोटे टुकडे कर लें । इन टुकडों को कडी धूप में सुखाएं । यह सूखा आंवला कांच की बरनी में भरकर रखें ।

३. आंवला के रस का धातु की वस्तुआें पर दुष्परिणाम होता है । इसलिए आंवले से तैयार किए पदार्थ सदैव कांच के बर्तन में रखें ।

४. आंवले तोडते समय ली जानेवाली सावधानी : ‘आंवले के पेड पर मधुमक्खी के छत्ते होते हैं ।’ इसलिए उसे संभलकर निकालें ।

५. पेड से आंवले निकालने पर १-२ दिनों में ही आंवले के पदार्थ बनाएं ।’

– श्रीमती शीतल जोशी, सनातन आश्रम, मीरज, महाराष्ट्र.

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