साष्टांग नमस्कार ऐसे करें !

भारतीय संस्कृति के अनुसार आचरण कर अपना जीवन आदर्श बनाएं !

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शरीर से, मन से तथा वाणी से अपने उपास्यदेवता की शरण जाकर किए गए नमस्कार को साष्टांग नमस्कार कहते हैं !

* प्रथम दोनों हाथ छाती से जोडकर कटि से (कमर से) झुकें और तदुपरांत पेट के बल लेटकर दोनों हाथ भूमि पर टिकाएं । प्रथम दायां और फिर बायां पैर पीछे तानकर सीधी रेखा में लेट जाएं ।

* दोनों कुहनियां मोडकर सिर, छाती, हथेलियां, घुटने और पैरों की उंगलियां भूमि पर टिक जाएं, इस प्रकार से आडे लेटें और आंखें मूंद लें । मन से नमस्कार करें । मुख से नमस्कार का उच्चार करें ।

* खडे होकर दोनों हाथ अनाहतचक्र पर (छाती पर) जोडकर शरणागत भाव से नमस्कार करें ।

 

जीवन की समस्याआें से धैर्यपूर्वक निबटने के लिए
नामजप का महत्त्व समझ लें और आनंदमय जीवन बिताएं !

RS37919_namjapविद्यार्थियो, जीवन की समस्याओं या दुःखभरे प्रसंगों में हम डगमगा जाते हैं । उनका धैर्यपूर्वक सामना करने हेतु बल कहां से प्राप्त होगा ? जीवन में उत्पन्न परिस्थिति को स्वीकारकर नित्य आनंदमय जीवन कैसे जी पाएंगे ? उत्तर है नामजप से !

हमारा जन्म जिस कुल में हुआ है, उस कुल के देवता का (कुलदेवता का) नामजप (उदाः श्री अंबादेव्यै नमः ।) प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा निरंतर करें । १५ मिनटों के नामजप से प्रारंभ कर, धीरे-धीरे उसकी कालावधि बढाएं । व्यसन लगना, उच्च शिक्षा प्राप्त करने पर भी नौकरी न लगना, विवाह न होना, दरिद्रता जैसे कष्ट अतृप्त पूर्वजों की लिंगदेहों (पितृदोष) के कारण हो सकते हैं । ऐसे कष्टों से अपनी रक्षा के लिए श्री गुरुदेव दत्त । का नामजप कष्ट की तीव्रता के अनुसार प्रतिदिन २ से ६ घंटे करें ।

 

धर्मपालन के छोटे-बडे कृत्य नि:संकोच करें !

Bhojanapurvi_prarthanaअन्य पंथियों में धर्माभिमान कूट-कूट कर भरा होता है । इसलिए वे अपने-अपने पंथानुसार धर्मपालन करने में संकोच नहीं करते, उदा. ईसाई पंथीय अभिमान से अपने गले में क्रॉस पहनते हैं और मुसलमान यात्रा में भी नमाज पढते हैं । विद्यार्थियोे, आप भी धर्मपालन करते समय लज्जाएं नहीं !

* देवता के चित्रयुक्त लॉकेट अभिमान से गले में पहनें !
* विद्यालय / महाविद्यालय जाते समय माथे पर लडकियां
* कुमकुम / पुरुष तिलक लगाएं !
* प्रतिदिन देवतापूजन और संध्या के समय स्तोत्रपाठ करें !
* कहीं भी हों, भोजन से पूर्व भगवान से हाथ जोडकर प्रार्थना करें !

 

प्रार्थना में मानसिक व्याधि न्यून करने की शक्ति !

मानसिक व्याधि (बीमारी) अथवा तनाव आदि पर उपचार करवानेवाला रोगी यदि ईश्‍वर पर विश्‍वास रख प्रार्थना करे, तो वह शीघ्र स्वस्थ हो सकता है । प्रार्थना में अद्भुत शक्ति होती है, ऐसा मत अमेरिका के मैकलीन चिकित्सालय के मनोरुग्ण विभाग के प्रमुख डॉ. डेविड ने व्यक्त किया है । डॉ. डेविड द्वारा किए शोध के अनुसार प्रार्थना केवल मनोबल बढाने का ही नहीं, अपितु मनोव्याधि दूर करने का कार्य भी कर सकती है । १५९ मनोरोगी तथा उन पर किए उपचारों के अध्ययन के उपरांत डॉ. डेविड इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं ।

संदर्भ : दैनिक सनातन प्रभात, ७.५.२०१३

 

जो समय पर सोए और जागे, उसे स्वास्थ्य एवं दीर्घायु प्राप्त होवे !

दिनभर के श्रम के उपरांत विश्राम करने से शरीर और मन को ऊर्जा होती है । विश्राम की इस प्राकृतिक अवस्था को ही नींद कहते हैं । शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहने हेतु रात्रि में शीघ्र (समय पर) सोना आवश्यक है । मध्यरात्रि के पूर्व की नींद मध्यरात्रि की नींद की अपेक्षा अधिक लाभप्रद होती है । आयुर्वेद के अनुसार अधिक (देर तक) जगने से शरीरांतर्गत वात और पित्तदोष बढते हैं । नेत्रस्वास्थ्य भी बिगड सकता है ।

अधिक विवेचन हेतु पढें : सनातन का ग्रंथ शांत निद्रा के लिए क्या करें ?

 

देवता एवं राष्ट्रपुरुषों के चित्रयुक्त उत्पादों का बहिष्कार करें !

कुछ उत्पादों के वेष्टनों पर (कवर पर) देवी-देवताओं के चित्र छपे होते हैं । इन उत्पादों का उपयोग करने के पश्‍चात वेष्टन अधिकतर कूडेदान में फेंक दिए जाते हैं अथवा पैरोंतले कुचले जाते हैं ! इसीप्रकार कुछ नाटकों और दूरदर्शन के कार्यक्रमों में हिन्दुआें के आराध्य देवी-देवताओं का उपहास किया जाता है । हिन्दुआें में धर्मशिक्षा का अभाव होने से ही आज हिन्दुआें की स्थिति इतनी दयनीय है ।

अपनी आस्था के केंद्रों का अनादर रोकना, धर्मपालन ही है । भारतीय संस्कृति सात्त्विक है; इसलिए अपनी इस महान संस्कृति का अभिमान संजोएं !

 

विद्यार्थियो, आपके आदर्श कौन ?

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जून २००७ में हिन्दुस्तान के क्रिकेट संघ ने २०-२० विश्‍वचषक जीतने पर मुंबई में भव्य (आलीशान) गाडी में संघ की शोभायात्रा निकाली थी ।

नवंबर २००८ में मुंबई पर हुए आतंकवादी आक्रमणको परास्त करनेपर राष्ट्रीय सुरक्षा दलके कमांडों को बेस्टकी साधारण गाडी से नियोजित स्थान पर लाया गया ।

राष्ट्र के संकटकाल में क्रिकेट खिलाडियों का नहीं, देश की रक्षा करनेवाले सैनिकों का आदर्श रखें !

 

फास्ट फूड के संकट को समय से पहले ही समझ लीजिए !

फास्ट फूड के अतिसेवन से बढनेवाले कोलेस्टेरॉल के कारण युवकों में ब्रेन स्ट्रोक की (पक्षाघात की) आशंका बढ रही है, ऐसी जानकारी राष्ट्रीय सर्वेक्षण से प्राप्त हुई है ।

फास्ट फूड के सेवन से स्वास्थ्य पर अनिष्ट परिणाम होते हैं, साथ ही फास्ट फूड की आदत से व्यक्ति भोगवादी बनता है । इसके विपरीत भारतीय संस्कृतिनुसार आहार के सेवन से स्वास्थ्य पर सुपरिणाम होते हैं, साथ ही व्यक्ति को संतुष्ट जीवन जीने में सहायता मिलती है ।

स्वस्थ पाचनतंत्र हेतु यह करें ! : उतने ही अन्न का सेवन करें, जिससे आधा पेट भर जाए; एक चौथाई जल के लिए तथा शेष वायु के लिए रहे ! भोजन के उपरांत कुछ समय के लिए वज्रासन में बैठें ।

संदर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ ‘आहार के नियम और आधुनिक आहार से हानि’