होली का रंग निकालने के लिए १० घरेलु उपाय

होली के दिन अधिक मात्रा में गुलाल खेलने के पश्‍चात त्वचा पर लगा रंग निकालना कठिन होता है । रंग निकालने के उपरांत त्वचा खुरदरी और सूखी होती है, इसके साथ ही शरीर के खुले भाग में जलन हो सकती है । ऐसे समय पर त्वचा को हानि न पहुंचे, इसके लिए कुछ सुलभ उपायों की जानकारी हमें अवश्य उपयोगी होगी ।

१. बेसन अथवा गेहूं के आटे में नीबू का थोडा रस मिलाकर, मिश्रण तैयार करें । फिर इस मिश्रण को शरीर पर धीरे-धीरे लगाकर रंग छुडाएं । बेसन अथवा गेहूं के आटे में नारियल तेल अथवा दही डालकर भी त्वचा स्वच्छ कर सकते हैं ।

२. दूध में थोडा कच्चा पपीता पीसें । उसमें मुलतानी मिट्टी और बादाम का तेल डालें । यह मिश्रण चेहरे को लगाकर आधे घंटे के उपरांत धो डालें ।

३. केश में से रंग निकालने के लिए केश अच्छे से झटक दें । इससे केश से सूखा रंग निकल जाएगा । तदुपरांत सादे पानी से केश धो डालें ।

४. बेसन, दही अथवा आवले के चूर्ण से भी सिर धो सकते हैं । आवले का चूर्ण एक रात पानी में भिगोकर रखें । तदुपरांत उसे लगाकर केश भली-भांति धोएं । तदुपरांत एक मग पानी में एक बडा चम्मच सिरका (विनेगर) डालकर केश धो लें ।

५. बेसन में नीबू और दूध मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाएं । फिर २० मिनट उसे वैसे ही रहने दें । तदुपरांत पानी से मुंह और हाथ धोएं ।

६. मसूर दाल को रात भर भिगोकर, सवेरे उसे महीन पीसकर दूध में मिलाएं । यह मिश्रण थोडी देर त्वचा पर लगाकर रखें । तदुपरांत गुनगुने पानी से धो डालें ।

७. ककडी का रस निकाल कर, उसमें थोडा गुलाबजल और एक चम्मच सिरका (विनेगर) मिलाएं । यह मिश्रण चेहरे पर लगाएं । कुछ देर के उपरांत पानी से चेहरा धोएं ।

८. पके हुए केले में नीबू का रस मिलाकर लेप बनाएं । फिर इस लेप को कुछ समय तक त्वचा पर मलें । उसे सूखने के उपरांत अंजुली में पानी लेकर त्वचा पर मारें ।

९. मूली का रस निकालकर उसमें दूध और बेसन अथवा मैदा मिलाकर लेप तैयार करें और उसे चेहरे पर लगाएं ।

१०. गेहूं के आटे और बादाम के तेल को अच्छे से मिलाकर मिश्रण बनाएं और फिर यह मिश्रण त्वचा पर लगाकर, रंग साफ करें ।

(संदर्भ : ‘अध्यात्म अमृत’, मार्च २०१७)
टिप्पणी  उपरोक्त उपाय आधुनिक वैद्य (डॉक्टर) / वैद्याचार्य के परामर्श से करें ।
होली के अनैसर्गिक रंगों से त्वचा की होनेवाली हानि टालने के लिए रंगपंचमी के दिन प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग का आधारभूत शास्त्र, यह लेख अवश्य पढें ।

facebook.com/sanatan.org