सीताफल के औषधीय उपयोग

सीताफल सर्वपरिचित फल है । वॉट्सएपपर ‘प्रतिदिन सीताफल के २ पत्ते खाईए !’ जैसे संदेश पढकर मुझे बहुत बुरा लगता है । आयुर्वेद में विद्यमान औषधीय वनस्पतियों की जानकारी और आयुर्वेद का ज्ञान होनेवालों को बतानी चाहिए । किसी को भी कुछ नहीं बोलना चाहिए, ऐसा मुझे लगता है । इसलिए मैने सीताफल के जिन औषधीय उपयोगों का अनुभव किया है, वह यहां दे रहा हूं ।

 

दूध और फल एकत्रित कर अथवा लगातार नहीं खाना चाहिए

आजकल लोगों को किसी भी फल को चीनी के साथ एकत्रित कर पीने के लिए दिया जाता है । ऐसे तरल पदार्थ भले ही क्षणिक बल देते हों; परंतु ऐसा करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही संकटकारी है । दूध और फल एकत्रित कर पीने से आज नहीं तो कल पेट और त्वचा के विकार होने ही वाले हैं । सीताफल खाकर उसके पश्‍चात तुरंत दूध पीने से निश्‍चितरूप से कफ का कष्ट होता है !

 

१. पत्ते

१ अ. दाग (घाव)

एक बार एक व्यक्ति ने उसके गाय के एक बछडे को हुए घावपर उपाय पूछा । तब मैने उसे सीताफल के पत्तों को कूटकर उसमें पानी न डालकर २-४ दिनोंतक घावपर लगाने के लिए कहा । ३ दिन पश्‍चात वह व्यक्ति उस बछडे को साथ लेकर मेरे पास आया और मेरा आभार व्यक्त करते हुए कहने लगा, ‘‘आपके द्वारा बताई गई औषधि से बछडे का घाव संपूर्णरूप से भर गया है ।’’

१आ. मूर्च्छित होकर गिर जाना

मानसिक तनाव का परिणाम मस्तिष्कपर होता है । तनाव सहन न होकर कुछ लोग मूर्च्छित होकर नीचे गिर जाते हैं । ऐसे समय में सीताफल के पत्तों को मसलकर नाक के पास पकडकर रखें । उससे मनुष्य तुरंत सतर्क हो जाता है । जिस समय प्याज नहीं मिलती, उस समय यह उपाय करें ।

१ इ. दाद

ग्रामीण क्षेत्र से कोई व्यक्ति मेरे पास दाद की चिकित्सा के लिए आता है, तब मैं उसे मेरे पास का औषधीय चूर्ण सीताफल के पत्तों से रस में मिलाकर लगाने के लिए कहता हूं । उससे ३-४ दिन में ही व्यक्ति ठीक होता है ।

१ ई. गुदा का बाहर आना

लगभग ७० की आयुवाला एक व्यक्ति मेरे पास उक्त कारण से आया था । मैने उसे मेरे पास की कुछ औषधियां दीं और पथ्य समझाया, साथ ही मैने उसे निम्नांकित उपाय बताया – एक कप पानी में सीताफल के २-३ पत्ते डालकर पानी के आधे सूख जानेतक उसका काढा बनाएं । काढा बनाते समय उसपर ढक्कन न डालें । आधा कप काढा शेष रहने के पश्‍चात उसे ठंडा होने दें और उसके पश्‍चात उसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में २ बार काढा पीएं । इसके साथ ही मैने उस व्यक्ति को गुदापर शतघौत घृत लगाने के लिए भी कहा । (शतघौत घृत आयुर्वेदीय औषधी के दुकान में मिलता है ।) औषधी समाप्त होने से पहले ही वह व्यक्ति मेरे पास आया और उसने उसकी पीडा में सुधार होने की बात कही ।

 

२. पत्ते और बीज

केशों में होनेवाली जुएं और लिखाएं

सीताफल के बीज और पत्तों का उपयोग जुएं और लिखों (जुओं के अंडे) को मारने के लिए होता है । सीताफल के पत्तों को मिक्सर में कूटकर उससे केश धोएं । बीजों का चूर्ण चने की दाल के आटे के साथ एकत्रित कर उससे केश धोने से जुएं और लिखाएं मर जाते हैं । ये दोनों उपाय करते समय यह औषधि आंखों को न लगे; इसपर ध्यान दे, अन्यथा उससे बहुत कष्ट होता है ।

 

३. फल

३ अ. बुखार

शरीर में पित्त का विस्फोट होकर बुखार आता हो, तो उसके लिए सीताफल खाएं; परंतु उसे सुबह के समय न खाएं । छोटे बच्चों को नियंत्रितरूप से ही सीताफल खाने दें ।

३ आ. बार-बार प्यास लगना

बार-बार प्यास लगनेपर सीताफल खाएं ।

– वैद्य विलास जगन्नाथ शिंदे, जिजाई आयुर्वेदिक चिकित्सालय, खालापुर, रायगढ (१५.१०.२०१९)