कठिन परिस्थितिका अथवा समस्याका
अथवा अपरिचित व्यक्तियोंका सामना करते समय अथवा
प्रवचन करते समय भगवान श्रीकृष्णके उपरनेके पीछे छिपकर आश्रय लेना
भक्तिभावकी तरंगें बालभावयुक्त शरणागति एवं समर्पण भावयुक्त वंदनभक्ति
चित्रकी विशेषता
इस चित्रमें भगवान श्रीकृष्णद्वारा धारण किए
उपरनेका एक छोर बालभावयुक्त साधिकाद्वारा हठपूर्वक नीचे
भूमितक खींचना और इसीसे श्रीकृष्णसे उसकी निकटता स्पष्ट होना
‘इस चित्रमें (साधिकाद्वारा आश्रय लेते समय हाथमें पकडे) उपरनेका एक छोर, दूसरे छोरकी अपेक्षा अधिक लंबा अर्थात भूमितक फैला हुआ है । उसने श्रीकृष्णके कंधेसे उसे हठपूर्वक खींचकर नीचेतक लाया है । इसीसे श्रीकृष्णके साथ उसकी अति निकटता स्पष्ट होती है ।’
– पू. (श्रीमती) अंजली गाडगीळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१२.९.२०१२)

संत भक्तराज महाराज और परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के चित्र बनाते समय भावस्थिति का अनुभव...
श्री गणेशकी पूजा पूरे भावसे करें, यह भगवान श्रीकृष्णद्वारा सिखाना
चित्रके विषयमें मनमें किसी भी प्रकारकी मूर्त (स्पष्ट) कल्पना न होते हुए भी श्रीकृष्णने ऊपर...
भगवान श्रीकृष्णद्वारा पितासमान, दिनचर्यासे संंबंधित आचार सिखाना
कोई भी सेवा भगवान श्रीकृष्णकी कृपासे होनेकी अनुभूति