भीषण आपातकाल की तीव्रता, उसका स्वरूप एवं ईश्वर से मिलनेवाली सहायत, इस विषय में प्राप्त सूक्ष्मज्ञान

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कुछ त्रिकालदर्शी (द्रष्टा) संत, परात्पर गुरु डॉक्टर आठवले एवं भविष्यवेत्ता अनेक वर्षाें से जिस भीषण आपातकाल के विषय में बता रहे थे, उसका आरंभ हो चुका है । गत ३ – ४ वर्षाें में देशभर में बाढग्रस्त स्थिति, कुछ देशों के जंगलों में आग लगना, कुछ स्थानों पर भूकंप होना, त्सुनामी आने जैसी घटनाओं से आपातकाल की आहट लग गई है । अब संपूर्ण जग को अपना ग्रास बनाए हुए कोरोना विषाणु के संकट के कारण आपातकाल का प्रत्यक्ष आरंभ हो गया है । इस आपातकाल का स्वरूप और उसके चरण आगे दिए अनुसार होंगे ।

 

 

१. आपातकाल का चरण, उसकी तीव्रता,
उसका स्तर, उसका स्वरूप एवं उससे संबंधित वर्ष

आपातकाल का चरण आपातकाल से संबंधित वर्ष आपातकाल की तीव्रता आपातकाल का स्तर आपातकाल का स्वरूप
१. २०१९ – २०२० मंद सूक्ष्म विविध प्रकार के विषाणुओं के कारण संसर्गजन्य रोग होना एवं गृहकलह होना
२. २०२० – २०२१ मध्यम स्थूल गृहकलह एवं विविध प्रकार की प्राकृतिक आपत्तियों उदा. बाढ, भूकंप, दुष्काल, ज्वालामुखी का उद्रेक
३.  २०२१ – २०२२  तीव्र स्थूल गृहकलह एवं विविध देशों में युद्ध होना
४.  २०२२ – २०२३ सबसे तीव्र स्थूल विश्वयुद्ध ३ होना

 

२. भीषण काल में पृथ्वी पर रहनेवाले
सात्त्विक जीवों को विविध स्तरों पर सहायता मिलना

स्तर सहायता करनेवाले घटक सहायता की मात्रा (प्रतिशत)
१. शारीरिक वैद्य, परिवार एवं सरकार (राज्यकर्ता)
२. मानसिक परिवार, मित्र एवं मानसोपचार तज्ञ १०
३. आर्थिक सरकार, उद्योगपति एवं विविध सामाजिक संगठन  १५
४. शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विविध देवी-देवता, ऋषि-मुनि, संत, सद्गुरु, परात्पर गुरु एवं ईश्वर (टिप्पणी)  ७०

टिप्पणी : ईश्वर सीधे सहायता नहीं करते, अपितु किसी के माध्यम से सहायता करेंगे । ‘व्यक्ति एवं निसर्ग के माध्यम से साक्षात् भगवान ही सहायता कर रहे हैं’, इसका भान केवल भाववाले साधक एवं संत को ही होगा ।

 

३. भीषण आपातकाल की व्याप्ति

यह भीषण आपातकाल केवल पृथ्वीपर ही नहीं, अपितु ब्रह्मांड के विविध ग्रहों पर एवं सप्तलोकों के कुछ लोकों पर भी होगा । इसलिए ब्रह्मांड के विविध ग्रहों एवं लोकों पर रहनेवाले विविध सात्त्विक जीवों की रक्षा भगवान विविध प्रकार से करनेवाले हैं; कारण सत्त्वप्रधान जीवों का आकर्षण माया की ओर नहीं, अपितु भगवान की ओर होता है । इसलिए भगवान उनका संपूर्ण भार उठाते हैं ।

 

४. धर्माचरण एवं साधना करनेवाले
सात्त्विक जीवों को विविध सात्त्विक घटकों की सहायता
एवं संरक्षण प्राप्त होगा । इससे घोर आपातकाल में भी उनकी रक्षा होगी

कु. मधुरा भोसले

ईश्वर अनंत कोटि के ब्रह्मांडनायक होने से उनका व्यवस्थापन सबसे उत्कृष्ट है । इसलिए उनके इस गुण की प्रचीति ईश्वर के सगुण-निर्गुण रूप के देवी-देवता, ऋषि-मुनियों, संत, सद्गुरु एवं परात्पर गुरु के माध्यम से सात्त्विक जीवों को आएगी । उसीप्रकार कठोर धर्माचरण एवं अच्छी साधना करनेवाले राष्ट्रप्रेमी एवं धर्मप्रेमी राज्यकर्ताओं में भी ईश्वर का यह दैवीय गुण अर्थात ‘उत्कृष्ट व्यवस्थापन करना’, प्रजा अनुभव कर पाएगी । इसलिए धर्माचरण एवं साधना करनेवाले सात्त्विक जीवों की भी घोर आपातकाल में भी रक्षा होगी ।

ईश्वर के विविध रूपों से विविध स्तरों पर सहायता मिलने के लिए सभी आज से ही नहीं, अपितु इसी क्षण से साधना आरंभ करें और जो पहले से ही साधना कर रहे हैं, वे अपनी साधना गुणात्मकदृष्टि से वृद्धिंगत होने के लिए प्रयत्न करें ।’

– कु. मधुरा भोसले (सूक्ष्म से मिला ज्ञान), सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२५.३.२०२०)
संदर्भ : दैनिक सनातन प्रभात

भावी भीषण आपातकाल का सामना करने के लिए विविध स्तरों पर अभी से तैयारी करें !

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