आनेवाले आपातकाल में ‘प्रथमोपचार पद्धति’ ही एक ‘संजीवनी’ के रूप में सिद्ध होगी ! – श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में
३ दिवसीय प्रथमोपचार प्रशिक्षण शिविर का प्रारंभ

रामनाथी (गोवा) : समय के अनुसार संपत्काल में सब कुछ व्यवस्थित होता है; परंतु आपात्काल विविध आपत्तियों से घिरा रहता है। इस में बाढ, भूकंप, चक्रवात, सुनामी आदि आपत्तियों के माध्यम से जीवन तथा संपत्ति की हानि होती है। इसकी अपेक्षा युद्धकाल में नरसंहार होकर लाखों लोग घायल होते हैं। ऐसे आपातकाल में ‘प्रथमोपचार’ ही एक ‘संजीवनी’ के रूप में सिद्ध होगी !

वास्तविक रूप में शासनकर्ताओं को नागरिकों को प्रथमोपचार निःशुल्क उपलब्ध करा देना चाहिए; परंतु आज के राज्यकर्ता अपने इस कर्तव्य से दूर हट गए हैं। अतः समय की मांग को पहचानकर हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था इन स्वयंसेवी संस्थाओं ने संयुक्तरूप से प्रथमोपचार प्रशिक्षण की, समाज सहायता के इस उपक्रम को प्रारंभ किया है। सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने ऐसा प्रतिपादित किया। यहां पर आयोजित ३ दिवसीय ‘प्रथमोपचार प्रशिक्षण शिविर’ के उद्घाटन अवसर पर वे बोल रहे थे। इस शिविर में महाराष्ट्र, गोवा एवं कर्नाटक राज्य के ६० शिविरार्थी सम्मिलित हो गए हैं।

श्री. राजहंस ने आगे कहा कि, २० वीं सदी में दोनों महायुद्धों के समय में ‘रेड क्रॉस’ इस संघटन के माध्यम से रुग्णों की सेवा के माध्यम से ईसाई धर्मगुरु एवं प्रसारकों ने बडी मात्रा में धर्मपरिवर्तन करवाए। उसके पश्‍चात मदर तेरेसा कथित स्वर्गप्राप्ति की आड में रुग्णों को उसकी मृत्यु के पूर्व बाप्तिस्मा देकर उनका धर्मपरिवर्तन करती थीं। ईसाईयों के इस दुष्कृत्य का उत्तर देने हेतु स्वामी विवेकानंदजी ने ‘रामकृष्ण मिशन’ इस संस्था की स्थापना की। उसकेद्वारा हिन्दू रुग्ण हिन्दू ही रहें; इसके लिए प्रयास किये गये।

आनेवाली आपत्तियों में प्रथमोपचारोंद्वारा समाज सहायता के माध्यम से हिन्दू समाज को हिन्दू संघटनों से आधार प्रतीत होगा तथा उससे वो हिन्दू संघटन के हितचिंतक बनेंगे। ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ इस सिद्धांत के अनुसार कृत्य करने से हमारी साधना होती है। हरएक विद्या ईश्‍वरप्राप्ति कराती है। उसके अनुसार प्रथमोपचार की सेवा को अपनी साधना के रूप में कुशलता तथा परिपूर्णता के साथ करने से हमारी यात्रा प्रथमोपचार करनेवाले साधक से प्रथमोपचार करनेवाले शिष्य और उसके पश्‍चात प्रथमोपचार करनेवाले संत, इस प्रकार से होगी !

इसके माध्यम से हमारेद्वारा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को अपेक्षित साधना होकर हम ईश्‍वरप्राप्ति कर सकेंगे। सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में हितचिंतक, आधुनिक वैद्य, परिचारक एवं परिचारिकाओं ने तात्त्विक एवं प्रायोगिक सूत्रों के माध्यम से मार्गदर्शन किया।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात
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