प्रवचन ३
नामजप और साधना केवल आध्यात्मिक उन्नति और मनःशांति के लिए ही नहीं की जाती, अपितु साधना का हमारे व्यावहारिक जीवन पर भी अच्छा परिणाम होता है । साधना करने से व्यक्तित्व आदर्श बनने में सहायता होती है ।
नामजप और साधना केवल आध्यात्मिक उन्नति और मनःशांति के लिए ही नहीं की जाती, अपितु साधना का हमारे व्यावहारिक जीवन पर भी अच्छा परिणाम होता है । साधना करने से व्यक्तित्व आदर्श बनने में सहायता होती है ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक माधव गोविंद उपाख्य बाबूराव वैद्य के निधन से ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के विचारों की हानि हुई है ।
लेख के इस भाग में हम गरखा और छकुंड (चक्रमर्द) इन २ वनस्पतियों की जानकारी समझते हैं ।
भावी भीषण विश्वयुद्ध के काल में डॉक्टर, वैद्य, बाजार में औषधियां आदि उपलब्ध नहीं होंगी । ऐसे समय हमें आयुर्वेद का ही आधार रहेगा । क्रमशः प्रकाशित होनेवाले लेख के इस भाग में ‘प्राकृतिक वनस्पतियों का संग्रह कैसे करना चाहिए’, इससे संबंधित जानकारी
हममें से प्रत्येक व्यक्ति ने सुख के क्षण और दुख का भी अनुभव किया है । प्रत्येक व्यक्ति के प्रयास भले ही सुख की प्राप्ति के लिए होते हों; परंतु अधिकांश समय हमें दुख ही मिलता है, ऐसा हमारा अनुभव रहता है । सर्वसामान्यरूप से आज के काल में मनुष्य जीवन में औसतन सुख २५ प्रतिशत और दुख ७५ प्रतिशत होता है ।
धर्मशास्त्र में ईश्वरप्राप्ति अर्थात आनंदप्राप्ति के अनेक मार्ग बताए गए हैं । किंतु अनेकों को यह ज्ञात नहीं होता कि इन सहस्रों साधनामार्ग मे से कौनसी साधना आरंभ करें । इस कारण अनेक लोग उन्हें जो पसंद है अथवा उन्हें जैसे लगता है, उसके अनुसार साधना करने का प्रयत्न करता है ।
नम्रता, अल्प अहं तथा वृद्धावस्था में भी भावपूर्ण सेवा करनेवाले सनातन के साधक श्री. पट्टाभिरामन् प्रभाकरन् सनातन के १०५ वें व्यष्टि संत पद पर विराजमान हुए ।
आपातकाल में कठिन परिस्थिति कब उत्पन्न हो जाए, यह कोई नहीं कह सकता । ऐसी परिस्थिति में सहायता के लिए सभी उपलब्ध मार्गों का उपयोग करना चाहिए । इसके साथ ही हेल्पलाइन क्रमांक का भी अवश्य उपयोग करें । भले ही हेल्पलाइन क्रमांक एक स्थायी विकल्प नहीं; परंतु आवश्यकता पडने पर इसका उपयोग कर सकते हैं ।
‘सनातन पंचांग’ ऍप अति उत्तम ऍप है, ऐसा अभिप्राय कर्नाटक के प्रसिद्ध अभिनेता जग्गेश ने व्यक्त किया है । धर्मप्रेमियों ने ‘सनातन पंचांग २०२१’ ऍप का ट्विटर के माध्यम से प्रसार किया था । उसपर उन्होंने यह ट्वीट किया ।
पू. विनयानंदस्वामी ने यहां के सनातन आश्रम में सदिच्छा भेट दी और आश्रम में चल रहे राष्ट्र, धर्म और आध्यात्मिक शोधकार्य के विषय में जानकर लिया ।