हेल्पलाइन क्रमांक (नंबर) : आपातकाल में निकटतम और सुरक्षित मित्र !

आपातकाल में कठिन परिस्थिति कब उत्पन्न हो जाए, यह कोई नहीं कह सकता । ऐसी परिस्थिति में सहायता के लिए सभी उपलब्ध मार्गों का उपयोग करना चाहिए । इसके साथ ही हेल्पलाइन क्रमांक का भी अवश्य उपयोग करें । भले ही हेल्पलाइन क्रमांक एक स्थायी विकल्प नहीं; परंतु आवश्यकता पडने पर इसका उपयोग कर सकते हैं । चिकित्सकीय, हिंसक, आपातकालीन, कानूनी अथवा प्रशासनिक बाधाएं आने पर काल की आहट को पहचानना और उसका सामना करना महत्त्वपूर्ण होता है ।

 

१. हेल्पलाइन क्रमांकों के उपयोग की आवश्यकता

हम वर्तमान के उच्च तकनीकी युग (‘हायटेक’ युग) में जी रहे हैं । ऐसे में पारंपरिक तरीके से काम करना उचित नहीं । इसलिए, नागरिकों को नवीनतम तकनीक का उपयोग करना चाहिए । पुलिस, एंबुलेंस (रुग्णवाहिका), महामारी, आग और विषबाधा से संबंधित, इसके साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन क्रमांक दिए जाते हैं । उनके उपयोग की प्राथमिकता को ध्यान में रखना चाहिए ।

 

२. हेल्पलाइन क्रमांकों का उपयोग करने के लाभ और कारण

२ अ. त्वरित और कुशल सहायता मिल पाना

यदि किसी व्यक्ति को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है, तो निजी अथवा सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा हेल्पलाइन की सहायता लेनी चाहिए । यदि हेल्पलाइन के माध्यम से एम्बुलेंस उपलब्ध हो जाए, तो तुरंत चिकित्सा शुरू की जा सकती है । विशेषज्ञों की सहायता भी मिल सकती है ।

२ आ. हेल्पलाइन क्रमांकों के उपयोग से सरकारी अधिकारियों का टालमटोल न कर पाना

हेल्पलाइन क्रमांकों पर किए संपर्क आमतौर पर दर्ज किए जाते हैं । इसलिए, सरकारी कर्मचारियों के लिए उन्हें पंजीकृत करना बंधनकारक होता है । उचित स्थान पर शिकायत करने पर हमारे पास ठोस प्रमाण भी रहता है ।

 

३. हेल्पलाइन क्रमांकों का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

अधिवक्ता नागेश जोशी (ताकभाते)

अ. हेल्पलाइन क्रमांक का उपयोग करते समय ध्यान रखा जाना चाहिए कि वह गलत नहीं होना चाहिए; क्योंकि उसका ध्वनिमुद्रण (रिकॉर्डिंग) होता है ।

आ. हेल्पलाइन का उपयोग करते समय, संभवत: अपने ही मोबाइल सेट का उपयोग करें; क्योंकि कानूनी बातों में इससे सहायता होगी ।

इ. जिस मोबाइल सेट से हमने शिकायत दर्ज की थी अथवा सहायता मांगी थी, वह घटनास्थल पर होना चाहिए ।

ई. फोन करनेवाले व्यक्ति को आगे आकर अपना परिचय देना आवश्यक है ।

ए. घटना के बारे में ज्ञात जानकारी के साथ-साथ जो सहायता आवश्यक है, वह पुलिस अथवा संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों को स्पष्ट की जानी चाहिए ।

ऊ. मोबाइल फोन सेट ‘रिकॉर्ड’ मोड में होना चाहिए । इससे संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी के निर्देशों को याद रखने में सहायता होगी । इससे हमारे पास फोन करने का प्रमाण रहता है ।

(टिप्पणी : नागरिकों को हेल्पलाइन नंबरों की एक अद्यतन (अपडेटेड) सूची रखनी चाहिए । समय-समय पर इसे अपडेट भी करना चाहिए । यह आपातकालीन प्रबंधन के लिए होगा । – संकलनकर्ता)

 

४. पुलिस को रिपोर्ट करने के लिए हमेशा की पद्धति के साथ ही हेल्पलाइन नंबर का उपयोग अवश्य करें !

पुलिस को कोई भी शिकायत करने से पहले, सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर ‘१००’ पर कॉल करें; फिर अगली प्रक्रिया शुरू करें । जैसे कोई मामूली वाहन दुर्घटना हो अथवा कोई नाबालिग यहां-वहां घूमते दिखाई दे और आप इसके बारे में फौजदारी शिकायत करना चाहते हैं, तो उसकी जानकारी दूरभाष द्वारा १०० क्रमांक पर दें ।

 

५. प्रशासनिक कार्य के लिए हेल्पलाइन क्रमांक का उपयोग करें !

पहले कार्यालय में जाने के बाद ही प्रशासनिक कार्य शुरू होता था; परंतु अब हेल्पलाइन क्रमांक का उपयोग कर हम अपने कार्य को गति दे सकते हैं । कार्यालय में जाने से पहले ही इस क्रमांक पर संपर्क कर भली-भांति पूरा विवरण समझ लें । ‘ऑनलाइन’ अथवा ‘इमेल’ द्वारा आवेदन भेजने के विषय में विवरण प्राप्त करें और उसके अनुसार करें । इससे हमारे प्रशासकीय कार्य को गति मिलेगी ।

 

६. पुलिस हेल्पलाइन क्रमांक की सहायता से केंद्र पर दूरभाष (कॉल) करने के लाभ

६ अ. अपनी सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर का उपयोग करें !

इससे आपकी याचिका का पंजीकरण तुरंत होता है । किसी घटना में कुछ अनुचित न हो, इसका हम ध्यान रखते ही हैं; परंतु यदि किसी जटिल समस्या का सामना करना ही पडे, तो हेल्पलाइन क्रमांक पर दूरभाष करने से अपना पक्ष सुदृढ हो जाता है ।

६ आ. हेल्पलाइन क्रमांक पर दूरभाष (कॉल) करने से प्रमाण और प्रतिबंध निर्माण हो जाता है !

किसी आपातकालीन स्थिति के बारे में आपकी शिकायत अथवा सरकारी अदालत में अपना पक्ष पहले पहुंचने से हमें आधार मिलता है । वैसे स्वरूप का प्रमाण भी निर्माण होता है ।

६ इ. प्रशासकीय अधिकारी की दायित्व टालने में असमर्थता !

कुछ प्रशासकीय अधिकारी इस दायित्व को टालने का प्रयत्न करते हैं । इसलिए अपनी याचिका अथवा शिकायत लंबित रहती है अथवा हम इस बारे में सोचना छोड देते हैं; परंतु हेल्पलाइन क्रमांक पर आवश्यक सावधानी बरतते हुए संपर्क अथवा शिकायत करने पर उससे लाभ की संभावना बढ जाती है ।

६ ई. घटना का अथवा प्रसंग का आगे संबंध आने पर उसका प्रमाण के रूप में उपयोग कर सकते हैं !

किसी प्रसंग में कभी-कभी कोई घटना बडी समस्या को जन्म देनेवाली होती है । इसलिए यदि ‘१००’ नंबर पर शिकायत करते हैं, तो अपनी सुरक्षा की दृष्टि से सही समय पर इसका उपयोग होता है ।

 

७. हेल्पलाइन क्रमांक का उपयोग किए बिना कृति करने से होनेवाली हानि

अ. अनेक बार किसी हिंसक अथवा वादविवाद का प्रसंग निर्माण होने पर हम पुलिस में शिकायत करते हैं; परंतु पुलिस शिकायत दर्ज करना तो दूर; उलटे हमें ही धमकाती है । अनेक बार पुलिस व्यक्ति को देखकर निर्णय लेती है ।

आ. यदि प्रतिद्वंद्वी हमसे अधिक सक्षम है, तो वे हमें ही झूठे मुकदमे में फंसा देते हैं ।
उदा. कुछ गौरक्षक गायों को ले जानेवाले वाहनों के विरुद्ध शिकायत दर्ज करने पुलिस थाने गए थे । तब पुलिस ने गौरक्षकों के विरुद्ध ही शांति भंग का अपराध प्रविष्ट किया । ऐसे प्रकरणों में अपना पक्ष सुरक्षित और सुदृढ बनाने के लिए हेल्पलाइन क्रमांक पर शिकायत दर्ज करना उपयुक्त होता है ।

इ. किसी घटना में विरोधी पक्ष द्वारा हेल्पलाइन क्रमांक पर शिकायत करने से पुलिस ने उनका पक्ष प्रधानता से सुना हो और फिर आप भी हेल्पलाइन क्रमांक पर शिकायत करते हैं और लगता है कि न्याय मिलना कठिन है तो आपको यह तय करने का अधिकार है कि हुए प्रकरण में आगे बढना है अथवा नहीं ।

पुलिस हेल्पलाइन क्रमांक २४ घंटे खुला रहता है । (सभी हेल्पलाइन क्रमांक २४ घंटे कार्यरत होंगे ही, ऐसा नहीं है ।) इसलिए बिना पुलिस थाने गए भी कुछ घटनाएं सुलझ सकती हैं; क्योंकि कभी-कभी पहरा लगानेवाला पुलिसकर्मियों का वाहन घटनास्थल पर पहुंचता है और पुलिस आने के उपरांत आमतौर पर हिंसा जैसी घटनाएं रुक जाती हैं ।

 

८. ध्वनिप्रदूषण की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन क्रमांक का उपयोग करें !

ध्वनिप्रदूषण की रिपोर्ट करने के लिए हेल्पलाइन क्रमांक भी उपलब्ध हैं । इस क्रमांक की उस अमुक प्रांत में पुष्टि करनी होगी । यदि आपके घर का व्यक्ति बीमार है या किसी कारण से ध्वनि (शोरगुल) से परेशान है, तो आप इस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सकते हैं । अधिकांशत: रात १० बजे के बाद चलनेवाले कार्यक्रमों के विरुद्ध शिकायतें इस क्रमांक पर दर्ज की जाती हैं ।

 

९. महिलाएं स्वतंत्र हेल्पलाइन क्रमांक पर संपर्क करें !

केवल भारत में महिलाओं के लिए विभिन्न हेल्पलाइन क्रमांक कार्यरत हैं । वे इन हेल्पलाइन क्रमांकों का उपयोग घरेलू हिंसा, कार्यालय में होनेवाले शोषण, हिंसक घटनाओं आदि प्रसंगों में कर सकती हैं । यदि कोई महिला इस तरह की घटना में सम्मिलित है, तो उसे महिला सहायता केंद्र के हेल्पलाइन क्रमांक का उपयोग करना चाहिए । यदि वह क्रमांक नहीं लग रहा, तो ‘१००’ पर कॉल करें ।

 

१०. हेल्पलाइन से जुडी समस्याएं

हेल्पलाइन क्रमांक कभी-कभी व्यस्त होता है अथवा कभी-कभी संपर्क नहीं हो पाता है । ऐसे समय में पुन: पुन: टेलीफोन द्वारा प्रयास करें, इसके साथ ही अन्य प्रतिष्ठानों के भ्रमणभाष का उपयोग कर संपर्क करने का प्रयास करें ।

टिप्पणी : सभी नागरिकों, शुभचिंतकों और हिन्दुत्ववादियों को अपने निकटतम बीआईटी (छोटी पुलिस चौकी) / आउट पोस्ट / पुलिस थाना / पुलिस मुख्यालय / पुलिस अधीक्षक / पुलिस आयुक्त के संपर्क क्रमांक रखने चाहिए । यदि आपने पुलिस से संपर्क किया है या किसी अन्य माध्यम से सहायता प्राप्त की है, तो भी आपको हेल्पलाइन को रिपोर्ट करना होगा; क्योंकि उसकी कार्यालय में प्रविष्टि हो जाती है । इससे हमें अगली न्यायिक कार्रवाई करने अथवा उसके बारे में पूछताछ करने (अनुवर्ती कार्रवाई करने) में सहायता होती है ।

– अधिवक्ता नागेश जोशी (ताकभाते), सदस्य, हिन्दू विधिज्ञ परिषद (२५.५.२०२०)

 

११. कुछ हेल्पलाइन क्रमांक

इनमें से कुछ क्रमांक केंद्र सरकार के हैं और कुछ राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित किए गए हैं । हालांकि, स्थानीय क्रमांक को अद्यतन (अपडेट) और संरक्षित किया जाना चाहिए ।

विषबाधा विरोधी – 1066

अग्निशमन दल (फायर ब्रिगेड) – 101

इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी – (011) 23711551

दूरभाष क्रमांक पूछताछ – 197

केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) हेल्पलाइन, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय – 155224

आपदा प्रबंधन (Govt of NCT) -1077

पुलिस उपायुक्त (लापता महिला और बच्चे) – 1094

ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन – 1095

दिल्ली पुलिस हेल्पलाइन – 1090

NDMC नियंत्रण कक्ष – 1267

एम्बुलेंस सेवा – 1066

महिलाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर – 1092

ORBO centre, AIIMS (अंग दान) – 1060

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