कुदृष्टि उतारने के लिए नमक और लाल मिर्च एक साथ प्रयोग करने की पद्धति

मिर्च की रज-तमात्मक तरंगें आकर्षित करने की गति राई की तुलना में अधिक होने के कारण स्थूलदेह और मनोदेह की कुदृष्टि उतारने में प्रायः मिर्च का उपयोग किया जाता है ।

कुदृष्टि उतारने के लिए नींबू प्रयोग करने की पद्धति

नींबू से कुदृष्टि उतारते समय उसके सूक्ष्म रजोगुणी वायु सदृश स्पंदनों को गति प्राप्त होने से, ये स्पंदन व्यक्ति पर आए रज-तमात्मक आवरण को अपनी ओर आकर्षित कर उन्हें घनीभूत करके रखते हैं ।

कुदृष्टि उतारने की पद्धति

कुदृष्टि यथासंभव सायं समय उतारें । कष्ट दूर करने के लिए वह समय अधिक अच्छा रहता है; क्योंकि उस समय अनिष्ट शक्ति का सहजता से प्रकटीकरण होता है तथा वह पीडा कुदृष्टि उतारने हेतु उपयोग किए जानेवाले घटक में खींची जा सकती है ।

कुदृष्टि उतारने के लाभ

कुदृष्टि उतारने से जीव की देह पर आया रज-तमात्मक आवरण समय पर दूर होता है । इससे उसकी मनःशक्ति सबल होकर कार्यकरने लगती है ।

कुदृष्टि लगने के परिणाम अथवा परखने हेतु लक्षण

कुदृष्टि लगना, इस प्रकार में जिस जीव को कुदृष्टि लगी हो, उसके सर्व ओर रज-तमात्मक इच्छाधारी स्पंदनों का वातावरण बनाया जाता है ।

पितृदोष के कारण एवं उनका उपाय

हमारी हिन्दू संस्कति में मातृ-पितृ पूजन का बडा महत्त्व है । पिछली दो पीढियों का भी स्मरण रखें । पितृवर्ग जिस लोक में रहते हैं, उसे पितरों का विश्व अथवा पितृलोक कहते हैं ।

वास्तु का कष्ट बढ गया है, यह ध्यान में आने पर वास्तु के चारों ओर तत्काल गेरू से मंडल बनाएं ! – महर्षि

अनेक बार हमें लगने लगता है कि अकस्मात वातावरण में दबाव बढ गया है । अनेक बार हमारे चारों ओर नकारात्मक स्पंदन घूम रहे हैं, इसका बोध होने लगता है, साथ ही ‘श्‍वास लेने में कुछ रुकावट आ रही है’, ऐसा भी लगता है ।

आध्यात्मिक उपाय आपातकाल की संजीवनी है, अत: गंभीरता से करें !

साधकों की साधना खंडित हो, इसलिए अनिष्ट शक्तियां हर प्रकारसे प्रयत्न कर रही हैं । इसलिए साधकों की रक्षा होने हेतु प.पू. गुरुदेव समय-समय पर सनातन प्रभात नियतकालिकों के माध्यम से विविध आध्यात्मिक उपचार बताते हैं ।