ऐसी है अस्थाई भव्य कुंभनगरी !
भव्यता के कारण संयुक्त राष्ट्रों के ‘युनेस्को’ की आंखें भी चमक गई हैं । युनेस्को ने ‘विश्व का सबसे बडा शांतिपूर्ण एवं धार्मिक सम्मेलन’ कहकर ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’, के रूप में कुंभ को स्वीकृती दी है ।
भव्यता के कारण संयुक्त राष्ट्रों के ‘युनेस्को’ की आंखें भी चमक गई हैं । युनेस्को ने ‘विश्व का सबसे बडा शांतिपूर्ण एवं धार्मिक सम्मेलन’ कहकर ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’, के रूप में कुंभ को स्वीकृती दी है ।
कुम्भ मेले के पावन अवसर पर सनातन संस्था ने सेक्टर 15 में मोरी मार्ग-मुक्ति मार्ग चौराहे पर ‘धर्मशिक्षा एवं राष्ट्र-धर्म रक्षा संबंधी फलक प्रदर्शनी’ का आयोजन किया है ।
अखाडे तो विविध स्थानों के साधु-संत, संन्यासी और आचार्यों का वर्गीकरण तथा सुसूत्रीकरण की एक व्यवस्था है ।
१५ जनवरी को यहां का राजयोगी स्नान मार्ग तथा संगमस्थलपर सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अयोध्या में राममंदिर के निर्माण की मांग को लेकर ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ नामजप अभियान चलाया गया ।
कुंभपर्व के प्रारंभ में महानिर्वाणी अखाडे के राजयोगी स्नान के पश्चात क्रमशः निरंजनी अखाडा, आनंद अखाडा, जूना अखाडा, आवाहन अखाडा, श्री शंभू पंच अग्नि अखाडा स्नान के लिए आ गए ।
सनातन संस्था के सर्वत्र के साधक और आश्रमों की रक्षा हो; इसके लिए भृगु महर्षिजी की आज्ञा से १५ जनवरी की सुबह यहां के सनातन आश्रम के मुख्य प्रवेशद्वारपर ऐरावत गजमूर्तियों की विधिवत स्थापना की गई ।
विविध साधु-संतों द्वारा निरंतर एवं निस्वार्थभाव से चलाए जा रहे अन्नछत्र ! यहां लगभग १० सहस्र से भी अधिक छोटे-बडे अन्नछत्र चल रहे हैं ।
श्री राजमातंगीदेवी विशुद्धचक्र की अधिष्ठात्री देवता है । विशुद्धचक्र वाणी से संबंधित होता है । श्री विष्णुजी की आकर्षणशक्ति को राजमातंगी कहा गया है ।
ओडिशा के क्रिया योग आश्रम की नामजप फेरी का सनातन संस्था की प्रदर्शनीस्थल के सामने आगमन हुआ ।
कुंभ मेल के समय में साधना हेतु अधिकाधिक समय देने पर देवता एवं संतों के आशीर्वाद प्राप्त हो कर इच्छित कार्य अल्पावधि में पूर्णता को पहुंचता है।