विश्वयुद्ध, भूकंप आदि आपदाओं का प्रत्यक्ष सामना कैसे करें ? (भाग ६)

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आपातकाल के विषय में लेखमाला हम देख रहे हैं । अब तक हमने तीसरे विश्वयुद्ध के प्रकार एवं उनका सामना करने हेतु उपाय, जैविक अस्त्रों द्वारा होनेवाले आक्रमण तथा भूकंप से संबंधित जानकारी पढी । आनेवाले आपातकाल में अपने और परिवार के बचाव हेतु क्या कर सकते हैं, इसकी थोडी-बहुत जानकारी इस लेखमाला से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है । इस लेख में सुनामी की जानकारी दी गई है । सुनामी क्या है ? सुनामी आने से पूर्व की जानेवाली तैयारी, सुनामी आने के संकेत, प्रत्यक्ष सुनामी के समय किन बातों पर ध्यान दें और सुनामी समाप्त होने के पश्चात क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी दी गई है ।

 

४. सुनामी

४ अ. सुनामी क्या है ?

‘सुनामी का अर्थ भूकंप, पानी के नीचे भूस्खलन, ज्वालामुखी का विस्फोट अथवा लघुग्रह के आघात के कारण निर्माण हुई महाकाय लहरों की शृंखला ।’ (संदर्भ : ready.gov/tsunamis)

‘कभी-कभी सुनामी पानी की दीवार तैयार कर सकती है । (उसे ‘सुनामी बोर’ के रूप में जाना जाता है) परंतु सुनामी में सामान्यत: वेगवान तथा तीव्र वेग से बाढ आने की संभावना रहती है । यह ज्वार भाटा के चक्र समान होता है । ऐसा होने की कालावधि १० मिनट, १ घंटा अथवा १२ घंटे हो सकती है । (संदर्भ : redcross.org/get-help/how-to-prepare-for-emergencies/types-of-emergencies/tsunami.html)

४ आ. सुनामी की आपत्ति से बचने हेतु तैयारी

१. ‘भारतीय मानक विभाग (‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड’) की नियमावली के अनुसार घर अथवा भवन का निर्माणकार्य करें ।

२. सुनामी के संकट कौन से हैं, स्वयं इनकी जानकारी लें और अपने परिवार को दें । उसी प्रकार घर खाली करने का प्रायोगिक स्तर पर अभ्यास करें ।

३. समुद्रतल से अपने निवासस्थान की ऊंचाई, तटीय क्षेत्र अथवा अन्य जलमार्ग से अंतर की जानकारी लें ।

४. यदि हम पर्यटक हैं, तो स्थानीय सुनामी में घर खाली करने की पद्धति की जानकारी लें ।

५. भूकंप हुआ हो एवं हम उस समय तटीय क्षेत्र में हों, तो प्रशासन द्वारा सुनामी की चेतावनी दी गई है क्या ? यह जानने हेतु रेडियो सुनें ।

६. समीप के सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंचने के सर्वाधिक सुरक्षित और निकटतम सरल मार्ग की जानकारी रखें ।’

४ इ. सुनामी आने के संकेत

१. एकाएक समुद्र का बहुत पीछे हटना (सैकडों मीटर) तथा किनारा बहुत बडा हो जाना । यह अवधि लगभग ५ – ६ मिनट टिक सकती है । तदनंतर एकाएक बडी सुनामी की लहर आती है । कभी-कभी इसके विपरीत समुद्र एकाएक बहुत आगे आ जाता है ।

२. समुद्र से एकाएक बहुत जोरों की आवाज आना

३. समुद्र के पास एकाएक भूकंप के बडे अथवा लंबे झटके अनुभव होना

४. समुद्र में एकाएक पानी की बहुत बडी दीवार दिखाई देना

५. प्राणियों और पक्षियों का एकाएक समुद्र के पास एकत्रित हो जाना, भयभीत होना अथवा दूर पलायन करना

४ ई. सुनामी के समय ली जानेवाली सावधानी

१. ‘शांत रहें । भयभीत न हों ।

२. सुनामी बहुत शीघ्रता से आती है, इसलिए अपनी संपत्ति को नहीं, अपितु स्वयं को बचाएं ।

३. बालक, वृद्ध तथा अपंग, जिन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है, उनकी सहायता करें ।

४. सरकारी अधिकारियों के निर्देश के अनुसार तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचें ।

५. पानी से दूर (न्यूनतम ३ किलोमीटर) तथा ऊंची भूमि पर (न्यूनतम ३० मीटर की ऊंचाई पर) तुरंत पहुंचें ।

६. समुद्र किनारे तथा नदी क्षेत्र से दूर रहें ।

७. यदि दूर जाना असंभव ही हो, तो समीप की मजबूत नींव के ऊंचे भवन की छत पर चले जाएं ।

८. यदि हम पानी में हों, तो तैरनेवाली कोई वस्तु, उदा. बेडा, पेड का तना, लकडी आदि को कसकर पकडें ।

९. दो सुनामी लहरों में बहुधा कुछ मिनटों अथवा घंटों का अंतर हो सकता है । इसलिए पहली सुनामी की लहर आने के पश्चात भी आगे आनेवाली संभावित बडी लहरों का सामना करने की तैयारी रखें ।

१०. सुनामी के समय पानी के साथ तीव्र गति से बहकर आई वस्तुओं से घाव होने की बहुत अधिक संभावना रहती है । सुनामी समाप्त हो जाने पर टूटी विद्युत वाहिनी, भवन ढहना आदि बातों से भी संकट रहता है ।

११. यदि हम समुद्र में नौका में हों, तो सुनामी के समय गहरे समुद्र में (न्यूनतम ४५ मीटर नीचे) जाना उचित होता है; क्योंकि गहरे समुद्र में सुनामी की लहरें अत्यंत अल्प ऊंची होने के कारण उथले समुद्र जितनी विध्वंसक नहीं रहतीं ।

१२. यदि हम बंदरगाह पर हैं, तो ऊंची भूमि पर जाएं ।’

४ उ. सुनामी समाप्त हो जाने के उपरांत की जानेवाली कृति

१. ‘आपत्ति निवारण अधिकारियों द्वारा सुरक्षित घोषित करने पर ही घर वापस आएं ।

२. आपत्ति के कारण बाधित क्षेत्र में जाना टालें । अपनी उपस्थिति बचाव एवं अन्य आपातकालीन कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकती है । उसी प्रकार सुनामी के पश्चात दूषित पानी, ध्वस्त रास्ते, किनारा टूटना, कीचड इत्यादि से भी संकट उत्पन्न हो सकता है ।

३. सुनामी आने से पूर्व बहुत बडा भूकंप (रिक्टर स्केल पर ८ – ९ अथवा उससे अधिक तीव्रता का) आया हो और उसका केंद्र पास में हो, तो पुनः भूकंप (आफ्टर शॉक) हो सकता है । कुछ आफ्टर शॉक परिमाण ७ से अधिक रिक्टर स्केल तक हो सकते हैं और अन्य सुनामी निर्माण करने में सक्षम हैं । आफ्टर शॉक अल्प होने में दिन, सप्ताह अथवा माह लग सकते हैं ।

४. पानी के साथ बहकर आई वस्तुओं से दूर रहें ।

५. घायल अथवा फंसे हुए लोगों की सहायता करने से पूर्व अपने घावों की जांच करें और आवश्यकता के अनुसार प्राथमिक उपचार लें ।

६. किसी को मुक्त करने की आवश्यकता हो और हमारे लिए वह संभव न हो, तो सहायता के लिए व्यावसायियों को बुलाएं जिनके पास योग्य उपकरण हों ।

७. बालक, वृद्ध तथा अपंग लोगों को विशेष सहायता की आवश्यकता होगी, उनकी सहायता करें ।

८. नई से नई जानकारी (लेटेस्ट इन्फॉर्मेशन) प्राप्त करने हेतु रेडियो अथवा दूरदर्शन वाहिनी का उपयोग करें ।

९. सुनामी के पानी से भवन की हानि हो सकती है अथवा दीवारें गिर सकती हैं । इसलिए आसपास पानी एकत्र हो गया हो, तो ऐसे किसी भी भवन से दूर रहें । भवन अथवा घर में पुनः प्रवेश करते समय सावधानी बरतें । स्वच्छता करते समय चोट न लगे इस हेतु संरक्षक वस्त्र पहनें और ध्यान रखें ।

१०. यदि सुनामी से अपने घर में भारी मात्रा में पानी आया हो, तो पानी के साथ आया कीचड जमने से पहले ही स्वच्छ करें ।

११. हवा से घर सूख जाए, इसलिए खिडकियां और दरवाजे खुले रखें ।

१२. खुले स्थान की कोई भी वस्तु न खाएं-पिएं ।

१३. अपना घर खाली करना आवश्यक हो, तो हम कहां जा रहे हैं, ऐसा संदेश वहां छोडें ।

१४. दुष्प्रचार न फैलाएं और न ही उन पर विश्वास करें ।’

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