नवम अखिल भारतीय हिंदु राष्‍ट्र अधिवेशन का सातवां दिन 

राष्ट्रविरोधी प्रवृत्तियों का विरोध और ‘सुराज्य अभियान
राष्ट्ररक्षा’ इस विषय पर मान्‍यवर वक्ताओं के उद़्‍बोधक विचार !

‘वफ्‍क बोर्ड’ के नाम पर संपूर्ण देश में ‘लैंड जिहाद’ चल
रहा है ! – पू. (अधिवक्‍ता) हरि शंकर जैनजी, अध्‍यक्ष, हिन्‍दू फ्रंट फॉर जस्‍टिस

पू. (अधिवक्‍ता) हरि शंकर जैनजी

फोंडा : संपूर्ण देश में वफ्‍क बोर्ड के नाम पर ‘लैंड जिहाद’ चल रहा है । यह ‘लव जिहाद’ से भी बडा और घातक जिहाद है । ‘लव जिहाद’ में हिन्दुओं की नारीशक्‍ति के साथ धोखाधडी की जाती है, तो ‘लैंड जिहाद’ में हिन्‍दुओं की संपत्ति लूटी जा रही है । वर्तमान की कुछ विधियों के माध्‍यम से मुसलमानों को विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं । ‘वफ्‍क बोर्ड’ को दिए गए विशेषाधिकार के कारण संपूर्ण देश में ‘लैंड जिहाद’ चल रहा है । ‘हिन्‍दू फ्रंट फॉर जस्‍टिस’ के अध्‍यक्ष पू. (अधिवक्‍ता) हरि शंकर जैनजी ने ऐसा प्रतिपादित किया । नवम अखिल भारतीय हिन्‍दू राष्‍ट्र अधिवेशन के ‘वक्‍फ बोर्ड के माध्‍यम से चल रहा हिन्‍दूविरोधी और राष्‍ट्रविरोधी षड्‍यंत्र तथा उसके प्रतिकार की आवश्‍यकता’ विषय पर वे ऐसा बोल रहे थे ।

उन्‍होंने आगे कहा,

१. अभीतक ‘वक्‍फ बोर्ड’ ने हिन्‍दुओं की व्‍यक्‍तिगत, मंदिर के न्‍यास और सरकारी भूमि अपने नियंत्रण में ली है । इसके कारण हिन्‍दुओं की संपत्ति का विघटन चल रहा है । वर्तमान स्‍थिति में भारतीय रेल के पश्‍चात देश में सर्वाधिक भूमि ‘वक्‍फ बोर्ड’ के नाम पर है ।

२. वर्ष १९२३ में ‘वफ्‍क बोर्ड’ को सामान्‍य अधिकार थे; परंतु कांग्रेस की सत्ता आने पर क्रमशः वर्ष १९५४, १९९५ और २०१३ में ‘वफ्‍क बोर्ड’ को अधिकाधिक विशेषाधिकार दिए गए । इसके फलस्‍वरूप ‘वर्फ्‍क बोर्ड’ ने जो चाहा, वह भूमि अपने नियंत्रण में ली और दूसरी ओर हिन्‍दू अभी भी निद्राधीन हैं ।

३. हिन्‍दू अधिवक्‍ताओं को ‘वफ्‍क बोर्डा’ से संबंधित विधि का अध्‍ययन करना चाहिए । सबसे पहले संपूर्ण देश में ‘वफ्‍क बोर्ड’ द्वारा नियंत्रण में ली गई भूमि की खोज करनी चाहिए । इससे जिस भूमि के संदर्भ में संबंधित भूमि मालिकों को जानकारी नहीं दी गई हो, वे विधिजन्‍य संघर्ष कर सकेंगे ।

४. किसी भूमि पर ‘वफ्‍क बोर्ड’ का फलक लगाया गया हो, तो इसके प्रति हिन्‍दू सतर्क रहें । बंगाल, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु और केरल राज्‍यों में ‘वफ्‍क बोर्ड’ ने बडी मात्रा में हिन्‍दुओं की भूमि हडप ली है । हम विधि का उपयोग कर इस भूमि को पुनः प्राप्‍त कर सकते हैं ।

५. ऐसे प्रकरणों में हम सर्वोच्‍च न्‍यायालय में न्‍याय मांग सकते हैं । इससे ‘वफ्‍क बोर्ड’ के नाम पर हिन्‍दुओं की संपत्ति हडपने का खेल रोका जा सकेगा । इस संदर्भ में कार्यशालाओं का आयोजन कर हिन्‍दुओं को जानकारी देनी चाहिए ।

इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे जी ने कहा, ‘हमारी प्राचीन भारतीय शिक्षा, न्यायव्यवस्था, राज्यव्यवस्था, चिकित्साशास्त्र, वास्तुशास्त्र आदि प्रगत एवं विश्‍व में सर्वोत्कृष्ट है । परंतु लॉर्ड मेकॉलेे के कम्युनिस्ट विचारों से ग्रस्त पंडित नेहरू ने शैक्षिक नीतियां निर्धारित करने के अधिकार कम्युनिस्टों को दिया; परिणामस्वरूप पिछले एक हजार वर्षों में मुगल और अंग्रेजों ने भारत की जितनी हानि नहीं की, उससे अधिक हानि वामपंथी विचारधारा के लोगों ने ७० वर्षों में की है । अब वामपंथी विचारों की टोली भारत के टुकडे करने के लिए आगे बढ रही हैं । इसके विरुद्ध हिन्दुओं को सत्य इतिहास एवं संस्कृति समझकर लडने के लिए तैयार रहना चाहिए ।’

 

‘सुराज्य अभियान राष्ट्ररक्षा’ इस विषय पर मान्‍यवर वक्ताओं के उद़्‍बोधक विचार !

१. पशुहत्‍या के संदर्भ में कठोर दंड प्रावधानों से युक्‍त विधियों की आवश्‍यकता ! – अधिवक्‍ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, अध्‍यक्ष, हिन्‍दू विधिज्ञ परिषद

२. सर्वत्र फैली भ्रष्‍ट व्‍यवस्‍था बदलने हेतु ‘सुराज्‍य अभियान’ में सम्‍मिलित हों ! – श्रीमती अश्‍विनी कुलकर्णी, समन्‍वयक, ‘आरोग्‍य साहाय्‍य समिती’, गोवा

३. नई शिक्षाप्रणाली में भारत का उत्‍थान करनेवाली शिक्षाप्रणाली अंतर्भूत की जाए ! – सद़्‍गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी, राष्‍ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्‍दू जनजागृति समिति

४. कोरोना महामारी के काल में हिन्‍दू विधिज्ञ परिषद ने जनहित याचिका प्रविष्‍ट कर पुलिस के अत्‍याचारों के विरुद्ध आवाज उठाई ! – अधिवक्‍ता अमृतेश एनपी, कर्नाटक उच्‍च न्‍यायालय, बेंगलुरू

परात्‍पर गुरु डॉ. आठवलेजी का द्रष्‍टापन !

‘संकटकाल आनेवाला है’, सनातन संस्‍था के संस्‍थापक परात्‍पर गुरु डॉ. आठवलेजी विगत ४-५ वर्षों से निरंतर ऐसा कहते आए हैं । आजकल कोरोना महामारी के कारण केवल भारत में ही नहीं, अपितु संपूर्ण विश्‍व में जो स्‍थिति उत्‍पन्‍न हुई है, उसे देखते हुए ‘परात्‍पर गुरदेवजी ने इस संकटकाल के संदर्भ में हमें पहले ही सूचित कर दिया था’, यह बात हमारे ध्‍यान में आती है ।

– अधिवक्‍ता अमृतेश एनपी