आपत्काल का अर्थ एवं स्वरूप

१. आपात्काल का अर्थ ? आपदा क्या है ?

अ. आपत् + काल = आपत्काल ।

संस्कृतमें ‘आपत्’ का अर्थ है, ‘संकट’ । अतः, ‘आपातकाल’ का अर्थ हुआ, ‘संकटकाल’ ।

इसे आपदा भी कहा जाता है ।

आपदा का अंग्रेज़ी शब्द Disaster’ फ्रांसीसी शब्द है जो Desastre’ से आया है । यह दो शब्दों ‘Des’ एवं ‘Astre’ से बना है जिसका अर्थ है ‘खराब तारा’ ।

आपदा ‘संतुलन’ का बिगडना है । आपदा आंतरिक और बाहरी कारकों के प्रभाव से उत्पन्न होती है, जो संयुक्त होकर घटना को भारी विनाशकारी घटना के रूप में परिवर्तित करती है ।

आपदा प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित कारणों का परिणाम है जो जान और माल की गंभीर क्षति करके अचानक सामान्य जीवन को उस सीमा तक अस्तव्यस्त करता है, जिसका सामना करने के लिए उपलब्ध सामाजिक तथा आर्थिक संरक्षण कार्यविधियां अपर्याप्त होती हैं अर्थात आशंकित विपत्ति का वास्तव में घटित होना आपदा है । इसमे एक साथ हजारों लोगों की जीवहानि होती है । तथा आर्थिक और पर्यावरण की भी बडी मात्रा मे हानि होती है ।

 

२. आपदाओं का वर्गीकरण

उत्पत्ति के अनुसार आपदाएं प्राकृतिक और मानव निर्मित होती हैं ।

२ अ. प्राकृतिक आपदा

प्राकृतिक आपदाओं को निम्नलिखित विभिन्न प्रकारों के रूप में देखा जा सकता है –

१. वायुजनित आपदा : तूफान, चक्रवाती पवन, चक्रवात, समुद्री तूफानी लहर

२. जलजनित आपदा : बाढ, बादल का फटना, सूखा, त्सुनामी

३. धरती जनित आपदा  : भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, हिमस्खलन

४. संक्रामक रोग : प्लेग, डेंगु, चिकनगुनिया, स्वाईन फ्लू, मलेरिया आदि.

इसमे कई बार एक आपदा के कारण भी दूसरी आपदा का प्रारंभ होता है, उदा. सागरतल मे भूकंप होने से त्सुनामी आने की संभावना रहती है, तथा त्सुनामी या बाढ के उपरांत महामारी आना संभव अधिक होता है ।

प्राकृतिक आपदा मे मानवनिर्मित कारणों से संहारकता का प्रमाण अधिक होता है, उदा. उत्तराखंड में गंगानदी के जलमार्ग मे मानवनिर्मित घर तथा होटलों के कारण हानि अधिकमात्रा में हुई ।

२ आ. मानवनिर्मित आपदा

मानव निर्मित आपदाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकारों को देखा जा सकता है –

१. औद्योगिक दुर्घटना

२. पर्यावरणीय ह्रास,

३. विभिन्न युद्ध, जिहाद के नाम पर आतंकी गतिविधियां

४. जैविक युद्ध के लिए अनुकूल वातावरण में विभिन्न जीवाणु और विषाणुओं के साथ साथ घातक कीटों का संवर्धन कर उन्हें डिब्बो में बंद कर शत्रु कैम्पों पर विमान से छोड दिया जाता है जो अंततः पर्याप्त क्षेत्र में फैलकर महामारी का रूप ले लेता है ।

५. रसायन युद्ध के तहत विषैली गैसों, बम और क्लस्टर बम को शत्रु कैम्पों पर छोडा जाता है ।

६. कंपनियों के संयंत्रों में लापरवाही या दोषपूर्ण रख-रखाव के कारण होनेवाली आपदाएं । इन्हें पर्यावरणीय आपदा भी कहा जाता है, जैसे – भोपाल गैस आपदा, चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना, फुकुशिमा परमाणु आपदा आदि प्रमुख हैं ।

७. जंगली आग तथा शहरी आग

८. हवाई, सडक और रेल दुर्घटनाएं

९. बडे भवनों का ढह जाना

 

३. आपात्काल से होनेवाली बडी हानि

आपात्काल से होनेवाली हानि की कल्पना के लिए कुछ उदाहरण अभी हम देख सकते हैं ।

३ अ. २००४ मे हिंद महासागर में ९.३ परिमाण का तीव्र भूकंप आया था । यह आजतक के इतिहास का दूसरा सबसे बडा भूकंप है । इस भूकंप से आयी त्सुनामी के कारण २,२९,००० लोगों की मृत्यु हुई थी ।

३ आ. १९३१ में ‘हुआंग हे’ (पीली नदी) मे आई बाढ के कारण ४,२२,००० से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी ।

३ इ. १९०० में आए सूखे के कारण भारत मे २,५०,००० से ३,२५,००० लोगों की मृत्यु हुई थी ।  ।

३ ई. १९१८ के स्पैनिश फ्लू के विश्‍वमारी के कारण दुनिया मे ५ करोड लोग मरने की अनुमान है ।

३ उ. १९५७ के एशियन फ्लू के विश्‍वमारी के कारण दुनिया मे १० लाख लोग मरने का अनुमान है ।

४. महायुद्ध के काल में क्या स्थिति होती है ?

द्वितीय महायुद्ध के समय जर्मनी और ब्रिटन में युद्ध हुआ था । ब्रिटन में पहले ४ दिनों में ही १३ लाख लोगों को स्थलांतर करना पडा था । युद्धकाल में वे प्रकाशबंदी भी आरंभ हो गई । बाहर रास्ते पर गहरा अंधेरा होता था । खिडकी अथवा दरवाजे से धुंधला-सा प्रकाश भी बाहर आने पर दंड मिलता था ! इतनी कडक प्रकाशबंदी एक-दो दिन अथवा महीने नहीं, अपितु पांच वर्ष थी । दूसरे महायुद्ध में जर्मनी ने रूस पर आक्रमण किया था । तब रूसी जनता को पत्ते-घास, लकडी के भूसे से बने केक खाकर पेट भरने का समय आ गया था !

आज भारत तीसरे महायुद्ध की कगार पर खडा है !

गत दो दशकों से जिहादी आतंकवादियों के माध्यम से पाकिस्तान का भारत के विरोध में छिपा युद्ध गत दो दशकों से भी अधिक समय तक चल रहा है । कुछ वर्षों से पाक ने अपनी युद्धसज्जता में अनेक गुना वृद्धि की है । चीन ने तो भारत को गिळंकृत करने के लिए सीमाक्षेत्र में मार्ग के जाल ही बिछा डाले हैं । इतने खुले आम सब कुछ हो रहा है, तब भी भारत ने इन शत्रुराष्ट्रों के विषय में अब तक कोई ठोस नीति नहीं अपनाई है ।

संक्षेप में युद्ध अटल है । यह युद्ध केवल दो राष्ट्रों में नहीं होगा ? आज संसार इतना सिमट गया है कि पाकिस्तान भारत के विरोध में खडा हो जाए, तो जग भर के अन्य मुसलमान राष्ट्र भी उसके कंधे से कंधा मिलाकर खडे हो जाएंगे ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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