रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में श्री भवानीदेवी का भावपूर्ण वातावरण में हुआ शुभागमन !

सनातन संस्था के इतिहास में लिखा जानेवाला एक स्वर्णिम भावक्षण

शरणागतदीनार्त परित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणी नमोस्तुते ॥

‘हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना हेतु छत्रपति शिवाजी महाराज को आध्यात्मिक बल प्रदान करनेवाली श्री भवानीदेवी की कृपा से अब हिन्दू राष्ट्र की शीघ्रातिशीघ्र स्थापना हो, यही उनके चरणों में आर्तभाव से प्रार्थना !

सनातन के आश्रम में विराजमान हो रहीं श्री भवानीमाता की मूर्ति की भावमय वातावरण में निकली शोभायात्रा

रामनाथी (गोवा) : ब्रह्माजी द्वारा निर्मित इस सृष्टि का परिचालन होता है शक्ति के ही आधार से ! जहां श्रीविष्णु विराजमान होते हैं, उस वैकुंठ में जिसका अखंड निवास रहता है, वह भी शक्ति ही होती है ! जिसने अनेक दैत्यासुरों का नाश करते हुए भक्तों की रक्षा की और जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज को स्वयं की तलवार प्रदान कर उन्हें हिन्दवी स्वराज्य स्थापना करने हेतु आश्‍वस्त किया, वह हैं श्री भवानीदेवी ! छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना हेतु जिस भवानीदेवी का पूजन किया, जीवनभर उनकी भक्ति की और ‘जय जगदंब’ और ‘जय भवानी’का जयघोष करते हुए शत्रु को ध्वस्त किया और उन्हीं के आशीर्वाद से हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना की । १९ जनवरी २०२० को उसी श्री भवानीदेवी का यहां के सनातन के आश्रम में भावपूर्ण एवं चैतन्यमय वातावरण में शुभागमन हुआ । हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में उत्पन्न सभी आध्यात्मिक बाधाएं दूर हों; इसके लिए  श्री भवानीदेवी यहां के सनातन आश्रम में विराजमान होनेवाली हैं । सनातन के आश्रम में श्री भवानीदेवी का स्थानापन्न होना, इतिहास में लिखा जानेवाला एक स्वर्णिम भावक्षण ही है । अतः प्रत्यक्ष देवी के ही विराजमान होने के कारण साधक आनंदित तो थे ही; परंतु उसके साथ अनेक साधकों का भाव भी वृद्धिंगत हुआ ।

पारपतिवाडा (बांदोडा) से सायंकाल ५.२५ बजे ‘श्री भवानीदेवी की जय हो’, ‘जय भवानी, जय अंबे’ का जयघोष करते हुए फूलों से सजाए गए वाहन से रामनाथी आश्रमतक शोभायात्रा निकाली गई ।

सनातन संस्था की सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने शोभायात्रा के आरंभ में देवी को माल्यार्पण कर औक्षण किया । इस अवसरपर पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित साधकों ने हाथ में भगवे ध्वज पकडे थे । इसके साथ ही शोभायात्रा में ध्वनियंत्रपर देवी के भक्तिगीत चलाए जा रहे थे ।

श्री भवानीदेवी की भावपूर्ण आरती उतारती हुईं सदगुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी

सायंकाल ६.१० बजे शोभायात्रा के द्वारा आश्रम के प्रवेशद्वारपर देवी का शुभागमन हुआ । अत्यंत शारीरिक कष्ट होते हुए भी परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने देवी के दर्शन किए । देवी के स्वागत हेतु आश्रम में सनातन संस्था के संत एवं साधकोंसहित एस्.एस्.आर्.एफ्. (स्पिरिच्युयल साईन्स रिसर्च फाऊंडेशन के साधक भी पारंपरिक वेशभूषा में नमस्कार की मुद्रा में खडे थे । इस अवसरपर उन्होंने देवी की मूर्तिपर फूल समर्पित किए । उसके पश्‍चात वेदमंत्रों के घोष में सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने श्री भवानीदेवी का पंचोपचार पूजन किया ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात