प्रशासनिक, पुलिस प्रशासन तथा शिक्षा क्षेत्र के, साथ ही अश्‍लीलता फैलानेवाले दुष्प्रवृत्तियों का सामना कैसे करें ?

लोगों, दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध संघर्ष करने से ही हिन्दू राष्ट्र की नींव रखी जाएगी !

जनता का हो रहा शोषण रोकेंगे । स्वराज्य का सुराज्य बनाएंगे ॥

भारत को ‘रामराज्य’, सम्राट युधिष्ठिर का धर्मराज्य तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज्य जैसे आदर्श राजनीतिक व्यवस्थाओं की परंपरा प्राप्त है । ऐसा होते हुए भी उनकी तुलना में आज की राजनीतिक व्यवस्था भारतीय लोकतंत्र को असफल कहने की स्थिति आ गई है । इसका प्रमुख कारण है कि अब यह लोकतंत्र केवल मतांध लोगों का सत्ताकारण बन चुका है । डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था, ‘‘किसी देश का संविधान चाहे कितना भी अच्छा हो; परंतु उसका क्रियान्वयन करनेवाले लोग ही यदि सक्षम न हों, तो लोकतंत्र असफल सिद्ध होता है ।’’ अतः केवल संविधान तथा लोकतंत्र अच्छा होने का कोई उपयोग नहीं है, अपितु वह किसके हाथ में होता है, वे राजनेता निस्वार्थ, प्रजाहितदक्ष तथा कर्तव्यपरायण होने चाहिएं ।

आज राज्यव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायतंत्र, पुलिस बल, प्रशासन, कृषि, रक्षा तथा अर्थव्यवस्था, इन सभी व्यवस्थाओं में भ्रष्टाचार, अकार्यक्षमता तथा अधिकारशाही का वर्चस्व बढा हुआ दिखाई दे रहा है । हम सभी को प्रतिदिन ही इसका अनुभव होता है । सभी के मन में इसके प्रति क्षोभ होता है; परंतु हमारे पास अन्य कोई विकल्प नहीं है, हमारा काम तुरंत हो जाना चाहिए अथवा मैं अकेला इस व्यवस्था से संघर्ष कैसे कर सकता हूं ?, ऐसे विचारों से हम भी इसी भ्रष्ट व्यवस्था का भाग बन जाते हैं । यदि यह ऐसा ही चलता रहा, तो रामराज्य तथा शिवशाही केवल कथा के विषय बनकर रहेंगे । इसी दृष्टि से केवल राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना कर न रुकते हुए ‘यह राष्ट्र मेरा है, यह मेरी मातृभूमि है तथा मैं इस समाज का घटक हूं, इस दृष्टि से एक सामाजिक कर्तव्य के रूप में हमें इस भ्रष्ट व्यवस्था के विरुद्ध खडा रहना चाहिए । चाहे क्रांतिवीरों ने हमारे हाथ में इस स्वराज्य को सौंपा हो; परंतु उसका रूपांतरण सुराज्य में करने का दायित्व हमपर है, इसे हमें भूलना नहीं चाहिए । अतः हमें अन्याय को सहन न करते हुए उसके विरुद्ध संघर्ष कर, हमें उसे रोकने का निश्‍चय करना चाहिए । इसीलिए आज के इस विशेषांक में वर्तमान समय में सामाजिक तथा प्रशासनिक तंत्र के द्वारा जनता के हो रहे शोषण को रोकने के लिए करनी आवश्यक कानूनी कार्य के विषय में मार्गदर्शन किया गया है । हम सभी ने यदि ध्येयनिष्ठ तथा संगठित होकर अन्याय करनेवाली दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध संघर्ष किया, तो निश्‍चितरूप से अगली पीढी के लिए एक आदर्श राज्यव्यवस्था की अर्थात रामराज्य की अनुभूति देनेवाली हिन्दू राष्ट्र की नींव रखी जाएगी । आज के इस विशेषांक से हमें आदर्श राष्ट्रनिर्माण के लिए लोकतंत्र में प्रबल बने सामाजिक तथा प्रशासनिक दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध वैधानिक पद्धति से संघर्ष की प्रेरणा मिले, यह प्रभु श्रीराम जी के चरणों में प्रार्थना !’

 

स्वार्थी तथा भ्रष्टता सिद्ध करनेवाला प्रशासनिक क्षेत्र !

सरकारी काम और ६ मास की प्रतीक्षा, इसकी प्रचीती प्रत्येक नागरिक को कभी ना कभी होती ही है । पैसे खाने की वृत्ति के कारण आज प्रशासनिक पद्धति आज सुचारू तथा सहज नहीं रही है । इसमें पीसा जाता है, केवल सामान्य नागरिक ! इसी सामान्य नागरिक को अब इन दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध आवाज उठानी होगी !

 

प्रशासनिक कार्यालय में अयोग्य व्यवहार के संदर्भ में किसके पास परिवाद करें ?

नागरिकों के काम करने में जानबूझकर विलंब करना, नागरिकों को प्रशासनिक कार्यालय के चक्कर काटने के लिए बाध्य करना, जनता से दूरी बनाए रखना, कार्यालयीन समय को अन्यत्र व्यर्थ गंवाना, समय से पहले ही कार्यालय बंद होने का बताना इत्यादि प्रशासनिक कार्यालयों में आनेवाली समस्याओं के संदर्भ में निम्न कृत्य करें ।

१. प्रशासनिक विभाग के जिले के मुख्य अधिकारी, मुख्य सचिव, साथ ही जिले के प्रभारी मंत्री तथा प्रभारी सचिव के पास संबंधित कर्मचारी का नाम, पद, साथ ही उसका स्वयं को प्राप्त अनुभव आदि लिखकर वैधानिक पद्धति से परिवाद प्रविष्ट करें । उसके १ मास पश्‍चात सूचना अधिकार के अंतर्गत इस परिवाद के संबंध में क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी हम मांग सकते हैं ।

२. मंत्रालय जैसे स्थानपर, साथ ही किसी विभाग में हमारे काम की धारिका अनावश्यक रूप से रोककर रखी गई हो, तो संबंधित विभाग के पास परिवाद करें ।

३. घूस लेनेवाले प्रशासनिक अधिकारी अथवा कर्मचारियों को वैधानिक पद्धति से कैसे पाठ पढाएं ?

अ. उनके साथ की गई बातचीत को भ्रमणभाषपर ध्वनिमुद्रण (ऑडियो रेकॉर्डिंग) करें ।

आ. भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करनेवाले समाजसेवी अथवा संगठन की सलाह के अनुसार पुलिस उपअधीक्षक अथवा भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के पास परिवाद प्रविष्ट करें । घूसखोरों को रंगेहाथ पकडवाने के लिए पुलिस प्रशासन से सहयोग करें ।

इ. केंद्र शासन के कर्मचारी द्वारा घूस मांगी गई हो, तो http://cbi.nic.in/contact.php इस लिंकपर परिवाद प्रविष्ट करें ।

ई. भ्रष्ट कार्यपद्धति को समझ लेने के लिए सूचना अधिकार का उपयोग करें ।

४. आय की अपेक्षा उच्च जीवनशैलीवाले सरकारी अधिकारी/कर्मचारियों की जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को सूचित करें !

 

विद्यार्जन के क्षेत्र को कलंकित करनेवाला शिक्षा विभाग !

ज्ञानदान जैसा पवित्र क्षेत्र भी आज दुष्प्रवृत्तियों से अछूता नहीं है । कोमल आयुवाले बच्चों से लेकर महाविद्यालयीन छात्रोंतक सभी के जीवन में इन दुष्प्रवृत्तियों की बलि चढने की स्थिति आती है । समय रहते ही ऐसी दुष्प्रवृत्तियों को रोके न जाने का ही यह परिणाम है । अतः छात्र तथा अभिभावक अपना मुंह बंद न रखते हुए शिक्षाक्षेत्र की दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध समय-समयपर संगठित होकर कार्य करना चाहिए ।

१. भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसके पास परिवाद प्रविष्ट करें ?

बच्चों के विद्यालय-महाविद्यालय प्रवेश के लिए चंदे के रूप में बडी धनराशि की मांग की जाती है । शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए अथवा रोकने के लिए पैसे मांगे जाते हैहं । इसके लिए जिलास्तरीय अथवा राज्यस्तरीय भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के पास परिवाद प्रविष्ट करें । विद्यालयों के संदर्भ में शिक्षण उपनिदेशक तथा महाविद्यालयों के लिए सहनिदेशक तथा उच्च शिक्षा मंडल कार्यालय के पास परिवाद प्रविष्ट करें ।

२. विद्यालय-महाविद्यालयों की विधिबाह्य कार्यपद्धति के विरुद्ध किसके पास परिवाद करें ?

अ. आवश्यक छात्रसंख्या न होते हुए भी झूठी संख्या दिखाकर सरकारी अनुदान लिया जाता है ।

आ. कुछ विद्यालय तथा महाविद्यालय पुस्तकें, बहियां, गणवेश, वस्तुआें को कुछ विशिष्ट दुकानों से अथवा विशिष्ट प्रकाशकों से ही खरीदने का आग्रह करते हैं । इसके लिए विद्यालयों के संदर्भ में शिक्षा उपनिदेशक तथा महाविद्यालयों के संदर्भ में सहनिदेशक, उच्च शिक्षा मंडल कार्यालय में परिवाद करें तथा उसकी एक प्रति शिक्षामंत्री को भेजें ।

इ. १०वीं कक्षा में चलनेवाली नकल के संदर्भ में माध्यमिक विद्यालयीन परीक्षा विभाग तथा १२वीं कक्षा में चलनेवाली नकल के संदर्भ में उच्च माध्यमिक विद्यालयीन परीक्षा मंडल से परिवाद करें ।

३. धर्मस्वतंत्रता का हनन किए जानेपर क्या करें ?

कुछ कॉन्वेंट तथा उर्दू विद्यालय तिलक लगाना, राखी बांधना, कंगन पहनना, मेंदी लगाना, देवता का पदक पहनना इत्यादि कृत्यों के लिए प्रतिबंध लगाते हैं, साथ ही ऐसा कुछ करनेपर छात्रों को दंडित भी करते हैं । ऐसी घटनाआें के विरुद्ध संविधान का अनुच्छेद २५ के अनुसार प्रदान किए गए धर्मस्वतंत्रता का हनन हुआ, इस आधारपर परिवाद प्रविष्ट करें ।

 

संवेदनाहीन पुलिस प्रशासन !

पुलिसकर्मियों की दादागिरी से घबराकर उनके विरुद्ध किए जानेवाले अन्याय के विरुद्ध परिवाद करना टाल दिय जाता है; परंतु पुलिस प्रशासन की अपेक्षा न्यायालय तथा प्रसारमाध्यम, ये लोकतंत्र के २ स्तंभ अधिक प्रभावशाली हैं । अतः पुलिसकर्मियों ने यदि बिना किसी कारण कष्ट पहुंचाया, तो उनके विरुद्ध न्यायाल तथा प्रसारमाध्यमों का उपयोग किया जा सकता है ।
अतः पुलिसकर्मियों से न घबराकर उनके द्वारा किए जानेवाले अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की सिद्धता रखनी चाहिए ।

१. कोई पुलिसकर्मी विधिबाह्य कृत्य करता हुआ दिखाई देनेपर उसका नाम, बिल्ला क्रमांक, पुलिस थाना तथा घटना की जानकारी लेकर वरिष्ठ अधिकारी तथा गृहमंत्रालय के पास परिवाद प्रविष्ट करें । वरिष्ठ अधिकारियों ने यदि परिवाद प्रविष्ट नहीं करवा लिया, तो पुलिस शिकायत प्राधिकरण के पास परिवाद प्रविष्ट करें ।

२. महिलांओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया, तो महिला आयोग तथा मानवाधिकार आयोग के पास परिवाद प्रविष्ट करें ।

३. रिश्‍वतखोर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के पास परिवाद प्रविष्ट करें ।

४. पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट गंभीर हो अथवा शरीरपर मारपीट के चिन्ह हों, तो स्थानीय सरकारी चिकित्सालय में संपूर्ण जांच करवा लें और उनके द्वारा दिया जानेवाला का ब्यौरा तथा औषधीय चिकित्सा की जानकारी के साथ स्थानीय पुलिस थाने में परिवाद प्रविष्ट करें । वहांपर यदि परिवाद प्रविष्ट करना अस्वीकार किया गया, तो पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के पास परिवाद प्रविष्ट करें और वहां भी न्याय नहीं किया गया, तो स्थानीय न्यायालय में अभियोग प्रविष्ट करें । मारपीट का चित्रीकरण कर उसका उपयोग प्रमाण के रूप में करें । किसी समाचारवाहिनीपर उसका समाचार दिखाया गया, तो उसका भी उपयोग प्रमाण के रूप में किया जा सकता है ।

 

अश्‍लीलता फैलानेवाली दुष्प्रवृत्तियां

ऐसा कहा जाता है कि कलियुग में अर्थ तथा काम यही धर्म के केवल २ पाद शेष बचे हैं । वास्तव में भी स्वयं को आधुनिकतावादी कहलानेवाले युवक-युवतियों को देखनेपर, साथ ही आज के चलचित्र, नाटक तथा विज्ञापनों को देखने से उसकी सच्चाई ध्यान में आती है । आज के दिन कपडे, सुंदरतावर्धक उत्पाद, बॉडी स्प्रे आदि के विज्ञापनों में अश्‍लीलता प्रमुख घटक होता है । इसके फलस्वरूप समाज नीतिहीन बन रहा है । इसको रोकना अत्यावश्यक है ।

अश्‍लीलता के संदर्भ में जनजागृति करें !

१. युवक-युवतियों को शरीरप्रदर्शन करनेवाले कपडे न पहनने के विषय में तथा उन्हें भारतीय वेशभूषा का महत्त्व विशद कर उनसे वह करवा लें ।

२. विद्यालय-महाविद्यालयों के व्यवस्थापकों से मिलकर शरीर प्रदर्शन न करनेवाले कपडे न पहनने के नियम बनाने का अनुरोध करें ।

३. गुरुद्वारा में प्रवेश करते समय सीख्ख पंथ के अनुसार, मस्जिदों में प्रवेश करते समय इस्लाम के अनरूप वेशभूषा अनिवार्य होती है; इसलिए मंदिर प्रवेश के समय भी भारतीय वेशभूषा अनिवार्य करने के लिए न्यासियों का उद्बोधन करें ।

अश्‍लीलता के विरुद्ध कैसे संघर्ष करें ?

महिला का अश्‍लील प्रस्तुतीकरण प्रतिबंधक कानून १९८६ के अनुसार किसी महिला का अश्‍लील पद्धति से प्रस्तुत करनेवाले विज्ञापन प्रकाशित करना, अश्‍लील लेखन तथा छायाचित्रवाली पुस्तकें प्रकाशित करना, अश्‍लील चलचित्र बनाना तथा उनका वितरण करना अपराध है । इसके विरुद्ध किसी भी माध्यम से अश्‍लीलता फैलाई जा रही हो, तो पुलिस थाने में परिवाद प्रविष्ट करें ।

अश्‍लीलता रोकने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति प्रणीत रणरागिनी शाखा आपकी सहायता करेगी !