सनातन संस्था की स्थापना, उद्देश्य एवं विशेषताएं

वैज्ञानिक परिभाषा में अध्यात्मप्रसार कर आदर्श समाज के निर्माण हेतु कार्यरत सनातन संस्था !

१. स्थापना

अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त संमोहन चिकित्सा विशेषज्ञ परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी ने वर्ष १९९९ (२४.३.१९९९) को सनातन संस्था की स्थापना की ।

२. आस्था के केंद्र

परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी
संत प.पू. भक्तराज महाराज

 

अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मानसोपचार एवं संमोहन विशेषज्ञ परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत हैं । परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी के सद्गुरु इंदौरनिवासी संत प.पू. भक्तराज महाराज संस्था के प्रेरणास्रोत हैं । सनातन संस्था हिन्दू धर्म की सभी देवताएं, धर्मग्रंथ, तीर्थस्थान, संप्रदाय एवं संत-महंतों के प्रति पूज्यभाव रखती है ।

३. उद्देश्य

अ. जिज्ञासुओं को अध्यात्म का शास्त्रीय परिभाषा में परिचय कराना तथा धर्मशिक्षा देना ।

आ. साधकें को व्यक्तिगत साधना के विषय में मार्गदर्शन कर ईश्‍वरप्राप्ति का मार्ग दिखाना ।

इ. आध्यात्मिक शोधकार्य करना तथा उनसे प्राप्त निष्कर्षों द्वारा अध्यात्म का महत्त्व प्रमाणित करना ।

ई. अध्यात्म में विद्यमान तात्त्विक (थेयरी) एवं प्रायोगिक भाग (प्रैक्टिकल) सिखाना ।

उ. समाजसहायता, राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति के द्वारा सभी दृष्टि से आदर्श धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु कार्य करना ।

४. विशेषताएं

१. विविध पंथियों को उनके पंथ के अनुसार मार्गदर्शन !

२. संकीर्ण सांप्रदायिकता नहीं, अपितु हिन्दू धर्म के व्यापक दृष्टिकोण के अनुसार शिक्षा !

३. जितने व्यक्ति उतनी प्रकृतियां और उतने ही साधनामार्ग तत्त्व के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के उसकी आवश्यकता एवं क्षमता के अनुसार साधना का दिशादर्शन !

४. शीघ्र ईश्‍वरप्राप्ति हेतु सभी योगमार्गों को समा लेनेवाले गुरुकृपायोग योगमार्ग के अनुसार साधना !

५. व्यक्तिगत साधना के साथ-साथ समाज की उन्नति हेतु करनी आवश्यक साधना की शिक्षा !

भक्तियोग, ज्ञानयोग, ध्यानयोग आदि विविध योगमार्ग के अनुसार साधना करनेवाले साधकों को उनकी व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति हेतु मार्गदर्शन करना सनातन के कार्य का केंद्रबिंदु है । हिन्दू धर्म के अध्यात्मशास्त्र का वैज्ञानिक परिभाषा में प्रसार करना सनातन संस्था के स्थापना का प्रमुख उद्देश्य है । साप्ताहिक सत्संग, दूरचित्रवाहिनियोंपर प्रसारित किए जानेवाले धर्मसत्संग, ग्रंथसंपदा, धर्मसत्संग, प्रदर्शनी, पत्रकें आदि के माध्यम से धर्मशिक्षा दी जाती है । हिन्दू आचार, धार्मिक कृतियां, देवताओं की उपासना, ईश्‍वरप्राप्ति हेतु साधना, बालसंस्कार, राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति आदि विविध विषयोंपर संस्था की ओर से अगस्त २०२० तक १७ देशी-विदेशी भाषाओं में ३२५ ग्रंथों की ८० लाख १८ सहस्र प्रतियां प्रकाशित की गई हैं । और ३ सहस्र ७१० ग्रंथ प्रकाशित हो सकेंगे, इतने ज्ञान का संग्रह है । इसके अतिरिक्त सुसंस्कार देनेवाले बालसंस्कार वर्ग एवं विद्यालयों में आध्यात्मिक प्रश्‍नोत्तरी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । गुरु-शिष्य परंपरा के संवर्धन हेतु प्रतिवर्ष २०० से भी अधिक गुरुपूर्णिमा महोत्सवों का आयोजन किया जाता है । धर्मशिक्षा देनेवाले सात्त्विक पुरोहित सिद्ध करनेवाली साधक-पुरोहित पाठशाला जैसे उपक्रम भी सनातन संस्था चलाती है ।

राष्ट्रीय स्तरपर राष्ट्रध्वज का सम्मान करें अभियान, देश का अयोग्य मानचित्र दिखानेवालों के विरुद्ध अखंड भारत आंदोलन, सीमापर जाकर भारतीय सेनादल के लिए तनावमुक्ति नियंत्रण कार्यक्रम जैसे राष्ट्रप्रेम को बढानेवाले अभियान संस्था की ओर से चलाए जाते हैं । धार्मिक स्तरपर गणेशोत्सव, होली, रंगपंचमी, नवरात्रोत्सव आदि सार्वजनिक उत्सवों में बलपूर्वक चंदा इकट्ठा करना, मदिरापान कर झगडे करना, महिलाओं के साथ छेडखानी, बलपूर्वक गुलाल लगाना, डर दिखाकर पैसों की लूट आदि धर्मविसंगत एवं समाजघातक अप्रिय घटनाओं को रोकने हेतु सनातन संस्था अभियान चलाकर जनजागरण करती है । पुलिस प्रशासन के सहयोग से ऐसी अप्रिय घटनाओं को रोक रही है । लोगों को विविध उत्सवों के विधियों का शास्त्र समझ में आए; इसके लिए लोगों को धर्मशिक्षा दे रही है । देशभर के ८० लाख से भी अधिक लोग इस उपक्रम का दूरचित्रवाहिनियों के माध्यम से लाभ उठा रहे हैं ।

इसके साथ ही सामाजिक स्तरपर सामाजिक वनीकरण, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर, आदिवासी एवं निर्धन लोगों को निःशुल्क कपडों का वितरण, निःशुल्क उपनेत्रों का वितरण, वृद्धाश्रमों में फलों का वितरण, नशीले पदार्थों के विरुद्ध जनजागरण, मेला सुनियोजन अभियान, खडकवासला (पुणे) जलाशय रक्षा अभियान एवं मंदिर और ग्रामस्वच्छता उपक्रमों का जनता से विशेष प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ और शासन को विशेष सहयोग मिला । वर्ष २००२-२००३ में नासिक में आयोजित मची भगदड में सनातन के प्राथमिक चिकित्सा दल के कारण पीडित श्रद्धालुओं को समय रहते सहायता मिली । अनेक संत, जनप्रतिनिधि, पुलिस प्रशासन, सामान्य प्रशासन, सेनादल, विविध संस्थाएं और मान्यवरों ने प्रमाणपत्र देकर सनातन संस्था की प्रशंसा की है । वर्ष २०१५ एवं वर्ष २०१६ में क्रमशः नासिक एवं उज्जैन में संपन्न महाकुंभपर्व में भी सनातन संस्था ने धर्मप्रसार का व्यापक कार्य किया, साथ ही भीड नियंत्रण और अन्य संदर्भ में पुलिस प्रशासन की सहायता की । सनातन के इस निरपेक्ष कार्य के कारण अनेक साधु-संतों ने इस वर्ष के कुंभपर्व में सनातन के कार्य का गौरव किया है ।

सनातन संस्था जिज्ञासुओं को साधना का मार्गदर्शन एवं शंकाओं का निराकरण करन ईश्‍वरप्राप्ति का मार्ग दिखाती है । सनातन के मार्गदर्शन के कारण अभीतक १०४ साधक (२०२० तक) संत बन गए हैं और अन्य अनेक साधक संत बनने की दिशा में अग्रसर हैं, तो सैकडों साधकों ने अच्छे प्रकार से आध्यात्मिक उन्नति करवाकर ली है । आजकल देश की जनता भ्रष्टाचार, महंगाई, सूखा, आतंकी आक्रमण और असुरक्षितता के कारण त्रस्त हैं । ऐसी संकट की स्थिति में सनातन जैसे धार्मिक संगठन हिन्दू धर्म और संस्कृति का प्रसार कर समाज को अध्यात्म, साधना, संस्कृति एवं राष्ट्र के प्रति जागृत कर रही है । उसके कारण समाज नैतिकता और धर्माचरण की ओर झुककर सुखशांति एवं समृद्ध जीवन के मार्ग की ओर अग्रसर है । सनातन संस्था का धर्म, राष्ट्र एवं समाज के प्रति निस्पृह कार्य को देखकर अनेक संत, डॉक्टर, मानसोपचार विशेषज्ञ, अभियंता, अधिवक्ता, इ., समाज में कार्यरत विचारक और मान्यवर व्यक्ति सनातन संस्था के कार्य में सहभागी होकर राष्ट्र एवं धर्म के लिए कार्य कर रहे हैं । संस्था के प्रेरक एवं स्फूर्तिदायक कार्य से प्रेरणा लेकर आदर्श समाज के निर्माण हेतु देश-विदेशों में सहस्रों साधक निष्कामरूप से तन, मन एवं धन का त्याग कर पूर्णकालीन कार्य कर रहे हैं ।

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