संकटकाल की तैयारी
रामनाथी (गोवा) – ‘आनेवाले संकटकाल में प्रथमोपचार सेवक, अन्यों को हमारी सहायता हो इस उद्देश्य से प्रथमोपचार की सेवा में साधना की नींव के आधार पर प्रयास करें । अन्यों का विचार करना, अपनत्व निर्माण करना, प्रेम देना व सेवाभावी वृत्ति से सेवा करना, यह श्रीगुरु को अपेक्षित है । इस माध्यम से साधकों में कुटुंब भावना उत्पन्न होकर संकटकाल का स्थिरता, संयम से सामना करना सरल होगा’, ऐसा मार्गदर्शन सनातन की ३० वीं संत, सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने किया । हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा १० से १२ नवंबर की कालावधि में रामनाथी, गोवा स्थित सनातन के आश्रम में राष्ट्रीय स्तर पर तीन दिवसीय ‘प्रथमोपचार प्रगत प्रशिक्षण शिविर’ आयोजित किया गया था ।
सद्गुरु (श्रीमती) सिंगबाळजी ने कहा, ‘‘ हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के कार्य में समाज के सात्त्विक जीवों को कैसे जोड सकते हैं, इसकी हमें लगन होनी चाहिए । हमें केवल प्रथमोपचार सेवा तक ही सीमित न रहकर अन्य सेवाएं भी पूरी क्षमता से करनी चाहिए ।’’
डॉ. पांडुरंग मराठे ने विविध स्थानों के डॉक्टर, वैद्य और प्रयोगशालाएं राष्ट्र और धर्म के कार्य में किस प्रकार सहायता करती है, इस विषय में अनुभवकथन किया । साथ ही डॉ. सामंत व डॉ. घाळी ने प्रथमोपचार सेवक के रूप में चिकित्सकीय दृष्टि से कैसे सिद्धता करनी चाहिए इसका विवेचन किया । सेवा की बाधाएं कैसे दूर करें इस विषय में प्रा. महावीर श्रीश्रीमाळ ने जानकारी दी । व्यष्टि साधना व स्वभावदोष व अहं-निर्मूलन कैसे करें, इस विषय में कु. वैष्णवी येळेगावकर और श्रीमती कीर्ति जाधव ने मार्गदर्शन किया । शिविर में भारतभर से ५५ व्यक्ति उपस्थित थे ।
स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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