साधकों के लिए सूचना

१. वर्ष १९९९ से साधक मुख्य रूप से प्रतिदिन निम्नलिखित व्यष्टि साधना कर रहे हैं
१ अ. कुलदेवता का जप : यह जप अधिक से अधिक समय तक करना । यह जप प्रारब्ध के कष्टों को कम करने में सहायता करता है ।
१ आ. दत्त का जप – ‘श्री गुरुदेव दत्त ।’: कष्ट की तीव्रता के अनुसार यह जप ३ से ९ माला करना । यह जप पूर्वजों के कारण होनेवाले कष्टों को कम करने में सहायता करता है ।
२. वर्ष २०१० से व्यष्टि साधना करनेवालों के लिए समष्टि हेतु जप
वर्ष २०१० में बताया गया था कि ‘कालानुसार समष्टि साधना करने वाले साधक ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।’ यह जप अधिक से अधिक समय तक करें’ ।
३. वर्ष २०२१ में ‘निर्विचार’ नामजप करने के लिए कहा गया था ।
४. वर्ष २०२६ की महाशिवरात्रि से व्यष्टि और समष्टि साधना करनेवालों के लिए नामजप
“अब तीसरे विश्वयुद्ध का समय निकट आ रहा है, इसलिए उसमें अपनी रक्षा हो और आगे ‘रामराज्य की स्थापना हो’, इसके लिए ‘श्रीराम जय राम जय जय राम ।’ यह जप कम से कम १० माला और अधिक से अधिक जितना संभव हो, उतना करें ।
इसी के साथ दिन में एक बार रामरक्षा और हनुमान चालीसा (जिन्हें हिंदी आती है) अथवा मारुति स्तोत्र (जिन्हें मराठी आती है) का अर्थ समझकर भावपूर्ण पाठ करें ।
यह नामजप अब तीसरा विश्वयुद्ध समाप्त होकर रामराज्य की स्थापना होने तक करना है ।” – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले (३१.१.२०२६)
५. महाशिवरात्रि से यह नामजप शुरू करने का कारण
“स्वयं भगवान शिव भी सदैव रामनाम का जप करते हैं । इसलिए उनके आशीर्वाद से कालानुसार साधना के रूप में हम यह नामजप शुरू करेंगे ।” – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले (३१.१.२०२६)
कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं
१. व्यष्टि साधना के दृष्टिकोण से नामजप
१ अ. नए साधकों के लिए नामजप : नए साधक कुलदेवता का नामजप कम से कम १ घंटा और दत्त का नामजप पूर्वजों के कष्ट के अनुसार ३, ६ या ९ माला करें और फिर शेष समय में श्रीराम का नामजप करें ।
१ आ. बुरी शक्तियों के कष्ट निवारण हेतु: ‘प्राणशक्ति वहन पद्धति’ के अनुसार खोजा गया नामजप अथवा बीमारी के लिए कोई विशिष्ट नामजप बताया गया हो, तो वह पूर्ण होने के बाद शेष समय में श्रीराम का नामजप करें ।
१ इ. जिन साधकों के लिए बैठकर नामजप करना संभव नहीं है, वे चलते-फिरते अथवा शारीरिक सेवा करते समय यह नामजप कर सकते हैं । ऐसे समय में वह भावपूर्ण हो रहा है न, इस ओर भी ध्यान दें; परंतु जब संभव हो, तब १० माला नामजप बैठकर करने का प्रयास करें ।
२. समष्टि साधना के दृष्टिकोण से नामजप
जो साधक श्रीकृष्ण अथवा ‘निर्विचार’ नामजप कर रहे थे, वे उसे रोककर अब केवल श्रीराम का जप करें।
३. महर्षियों के बताए अनुसार जप
इससे पहले महर्षि ने जैसा बताया है, उसके अनुसार ‘हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।’ यह जप १०८ बार करें ।
४. पूजाघर में श्रीराम के साथ हनुमानजी की भी पूजा करें !
‘श्रीराम और हनुमानजी एक ही सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं । इसलिए श्रीराम की उपासना में हनुमानजी का भी स्थान है । श्रीरामरक्षा में भी हनुमानजी का उल्लेख आया है । इस हेतु पूजाघर में श्रीराम का चित्र या प्रतिमा हो, तो साथ में हनुमानजी का भी चित्र या प्रतिमा रखकर उसकी भी नियमित पूजा करें ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले (२३.१.२०२६)
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