प्रीति के अथाह सागर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के विषय में साधक के मन में संग्रहित भावमोति !
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी आरंभ में अध्यात्मप्रसार हेतु गोवा आते थे । उस समय गोवा में ५ स्थानों पर सार्वजनिक सभा का नियोजन था ।
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी आरंभ में अध्यात्मप्रसार हेतु गोवा आते थे । उस समय गोवा में ५ स्थानों पर सार्वजनिक सभा का नियोजन था ।
प.पू. डॉक्टरजी ने अन्नपूर्णाकक्ष को सुव्यवस्थित करने के लिए अथक प्रयास किया । आरंभ के दिनों में छोटी-छोटी बातों से अन्नपूर्णाकक्ष की बडी योजनाआें तक उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया और रसोईघर को अन्नपूर्णा-कक्ष बनाया ।
वर्ष १९९० में शीव (मुंबई) आश्रम में मुझे प.पू. डॉक्टरजी के दर्शन हुए । उस समय सेवा के निमित्त आश्रम में मेरा आना-जाना लगा रहता था । इसके उपरांत मुझे आश्रम में पूर्णकालीन रहने का सौभाग्य मिला ।