कला के माध्यम से साधकों को ईश्‍वर की ओर ले जानेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की अनुभव की आनंददायी सिख !

‘कला की शिक्षा लेते समय मुझे जो सिखने को नहीं मिली, ऐसी सूक्ष्मताएं (बारीकीयां) परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने मुझे साधना में आने पर सिखायी । ‘कला से संबंधित सेवा साधना ही है’, यह भी उन्होंने हमारे मन पर प्रतिबिंबित किया ।

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“Satpatre daanam”