नमस्कार की योग्य पद्धति तथा उसका शास्त्र

दोनों हाथों के तलुवे एक-दूसरे के साथ जोडकर दोनों हाथों के अंगूठों का स्पर्श भ्रूमध्य के स्थान पर अर्थात दोनों भौवों के मध्य में करें ।

नमस्कार के लाभ

तनिक भी अहंभाव न रख नमस्कार करने से दोषों के पहाड भस्म हो जाते हैं, पतितजन पावन हो जाते हैं । लीनतापूर्वक नमस्कार कर शरणागत होने से भवसागर पार हो जाते हैं ।

साष्टांग नमस्कार ऐसे करें !

विद्यार्थियो, जीवन की समस्याओं या दुःखभरे प्रसंगों में हम डगमगा जाते हैं । उनका धैर्यपूर्वक सामना करने हेतु बल कहां से प्राप्त होगा ? जीवन में उत्पन्न परिस्थिति को स्वीकारकर नित्य आनंदमय जीवन कैसे जी पाएंगे ? उत्तर है नामजप से !

हिंदु संस्कृतिका प्रतीक `नमस्कार’

हिंदु मनपर अंकित एक सात्त्विक संस्कार है `नमस्कार’ । भक्तिभाव, प्रेम, आदर, लीनता जैसे दैवीगुणोंको व्यक्त करनेवाली और ईश्वरीय शक्ति प्रदान करनेवाली यह एक सहज धार्मिक कृति है ।