ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए क्या करें ?
‘तन, मन, धन एवं अहं का त्याग होने पर तथा ईश्वर के प्रति भाव एवं भक्ति बढने पर ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
‘तन, मन, धन एवं अहं का त्याग होने पर तथा ईश्वर के प्रति भाव एवं भक्ति बढने पर ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
‘ईश्वरप्राप्ति आधे समय का काम (पार्ट टाइम जॉब) नहीं है; अपितु पूर्णकालीन साधना है । इसलिए हमारी प्रत्येक कृति हमें भक्तिभाव से करनी चाहिए ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
‘आजकल पश्चिमी देशों में अधिकांशतः लडने के लिए कोई अपना चाहिए; इसलिए विवाह करते हैं । आगे लडाई-झगडे से ऊब जाने पर संबंध विच्छेद करते हैं । पुनः विवाह करते हैं और पुनः संबंध विच्छेद करते हैं । यह चक्र जारी रहता है । हमारे यहां ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए साधना करें !’ … Read more
आज के समय में ‘काल के अनुसार ‘उत्तम कर्म’ करना ‘उत्तम ध्यान’ है । केवल ध्यान से प्रगति नहीं होती; क्योंकि हममें ध्यान लगने योग्य सात्त्विकता नहीं होती । उसे उत्तम कर्म कर प्राप्त करना पडता है । उत्तम आचरण, उत्तम विचार तथा भगवान के उत्तम सान्निध्य के कारण देह सात्त्विक होने लगती है । … Read more
स्वयं को अज्ञानी माननेवाले ज्ञानवंत को ही भगवान की कृपा से ज्ञान का कृपा प्रसाद मिलता है ! – श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२८.४.२०२०)
‘ईश्वरप्राप्ति हेतु साधना करनी हो, तो भारत को छोडकर संसार के किसी भी देश में मत रहो; क्योंकि भारतीयों की स्थिति भले ही बुरी हो, तब भी भारत जैसा सात्त्विक देश संसार में कहीं नहीं है । अन्य सभी देशों में रज-तम की मात्रा अत्यधिक है; तथापि ५० प्रतिशत से अधिक आध्यात्मिक स्तर प्राप्त व्यक्ति … Read more
‘बुढापे में बच्चे ध्यान नहीं देते’, ऐसा कहनेवाले वृद्धजनों, आपने बच्चों पर साधना के संस्कार नहीं किए, इसका यह फल है । इसके लिए बच्चों के साथ आप भी उत्तरदायी हैं ! – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘कठिन समय में कौन काम आता है ?’, इस प्रश्न का उत्तर है, ‘कठिन समय में ईश्वर ही काम आते हैं !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘शांतिकाल में, अर्थात पूर्व के युगों में ‘गोदान करना’, साधना थी । अभी आपातकाल में गायों के अस्तित्व का प्रश्न निर्माण हो गया है । ऐसे में ‘गोदान करना’ नहीं; अपितु ‘गोरक्षा करना’ महत्त्वपूर्ण है ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘कोई भी राजनीतिक दल तृतीय विश्वयुद्ध के समय हिन्दुओं की रक्षा नहीं कर पाएगा; क्योंकि उनके पास आध्यात्मिक बल नहीं है । उस काल में स्वयं को बचाने के लिए अभी से साधना करें !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले