‘फास्ट फूड’ और जंक फूड

बर्गर, पिज्जा, वेफर्स, चिप्स और अन्य ‘फास्ट फूड’ लोकप्रिय हैं । ‘फास्ट फूड’ बाह्यतः स्वाद में चटपटे लगते हैं, परंतु वे तमोगुणी होते हैं । उनके शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक दुष्परिणाम होते हैं ।

 

शारीरिक दुष्परिणाम

पिज्जा, बर्गर, चिप्स इत्यादि ‘फास्ट फूड’ अर्थात कृत्रिम और प्रोसेस्ड (प्रक्रिया किया हुआ) बासी अन्न, पचने में कठिन होते हैं और इनसे पाचनतंत्र बिगड जाता है । इन सर्व पदार्थों में सोडियम, नमक, शर्करा और वसा (चरबी) अधिक मात्रा में होती है । इस कारण उनमें ऊष्मांक अधिक होता है; किंतु इस अधिक ऊष्मांक से हमें कोई लाभ नहीं होता । इससे रक्तचाप बढना, वृक्क को (गुरदे को) हानि पहुंच सकती है ।

जिन बच्चों को ऐसे खाद्यपदार्थों की लत (आदत) लग जाती है और जिनके अभिभावक भी ये पदार्थ अपने बच्चे को खाने देते हैं, ऐस बच्चों को उनकी आयु के ३० वें वर्ष में ही हृदयविकार होने की आशंका अधिक रहती है ।’ – श्री. श्रीराम शिधये

‘‘जंक फूड’ के सेवन के कारण शरीर में हार्मोन्स का (अंतःस्राव का) संतुलन बिगड जाता है । इससे विद्यालय-महाविद्यालयों में पढनेवाली अधिकांश लडकियां यौवनावस्था में पदार्पण करते-करते ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’से ग्रस्त हो जाती हैं । (इस विकार में अंडाशय में अंडे नहीं बन पाते; क्योंकि अंडाशय में अनेक पुटक अर्थात सिस्ट होते हैं ।) इसलिए २५ वें वर्ष में वैवाहिक जीवन में प्रवेश करनेवाली २५ प्रतिशत से अधिक युवतियां किसी-न-किसी रूप में वंध्यत्व से ग्रस्त होती हैं ।’।

ब्रिटेन के सर डेविड किंग के मार्गदर्शन में एक शोधकर्ता दलने कहा है कि इस मोटापे के कारण मनुष्य की आयु १३ वर्ष घट सकती है ।’ – दैनिक गोमंतक, २०.१०.२००७

 

बौद्धिक दुष्परिणाम

‘चायनिज फूड’ में प्रयुक्त ‘अजिनोमोटो’ पदार्थ बुद्धि के लिए हानिकारक है ।

आध्यात्मिक दुष्परिणाम

‘फास्ट फूड’ बहुत समयतक अप्रयुक्त (संग्रहित) रहता है । इस कारण उसमें तमोगुण अर्थात अनिष्टकारी गुण बढता है । ऐसे तमोगुणी पदार्थों की ओर अनिष्ट शक्तियां आकृष्ट होती हैं । इसलिए ‘फास्ट फूड’ खानेवाले व्यक्ति की वृत्ति तामसी बनती है । व्यक्ति की वृत्ति तामसी बनने से उसमें क्रोध, चिडचिडापन, हठ आदि दुर्गुण बढते हैं । इस कारण उस व्यक्ति को अनिष्ट शक्तियों की पीडा होने की आशंका बढ जाती है ।

अन्य सूत्र

‘मांसाहारी बर्गर’में काली (कष्टदायक) शक्ति कार्यरत होना

‘प्राणि की हत्या कर उसके मांस से ‘बर्गर’ बनाने की प्रक्रिया में उसमें अधिक मात्रा में काली शक्ति प्रविष्ट होती है । प्राणि के मांस की काली शक्ति बर्गर में भी कार्यरत होती है ।  बर्गर में काली शक्ति कार्यरत होने के कारण, उसके बाह्य स्वरूप में दिखाई देनेवाला आकर्षण मायावी एवं भ्रामक होता है, उसका चैतन्य मिथ्या होता है ।  अनिष्ट शक्ति बर्गर में विद्यमान २-३ सहायक घटकों के माध्यम से काली (कष्टदायक) शक्ति फैलाने, उसे बढाने, उसका किण्वन करने (फर्मेन्टेशन करने) तथा बन (पावरोटी समान अन्नपदार्थ) एवं बर्गर खानेवाले के शरीर में काली (कष्टदायक) शक्ति चिपकाने का कार्य करती है ।

अनिष्ट शक्तियोंद्वारा प्रयुक्त सहायक माध्यम

चीज (पनीर) : यह बर्गर और बंद पावरोटी को परस्पर बांधने में सहायक है । खानेवालों के शरीर में चीज चिपककर रहता है तथा वहां किण्व (खमीर) उत्पन्न करता है । इससे बर्गर पेट में अधिक समयतक रहता है । जब वह बर्गर पेट में अथवा आंतों में अधिक समयतक रहता है, तब अनिष्ट शक्तियों को रक्तप्रवाह में कष्टदायक शक्ति छोडने हेतु अधिक समय मिलता है । चीज के कारणबर्गर पेट में गोला (लम्प) बनकर रहता है । चीज के कारण आंतों में और पेट में इस पदार्थ की परत चिपकी रहती है ।

मायोनीज : मायोनीज के गुणधर्म चीज (पनीर) के समान ही हैं; परंतु मायोनीज में किण्व उत्पन्न करने का गुणधर्म अधिक होता है । मायोनीज और बन के (पावरोटी के) मैदे का पेट में किण्वन होता है । इस खमीर उठने की प्रक्रिया के कारण काली शक्ति के कण अति हलके और वायुवत बन जाते हैं । इसलिए वे वायु (हवा) एवं रक्त के माध्यम से रक्तप्रवाहद्वारा संपूर्ण शरीर में अत्यंत सहजता से प्रवाहित होते हैं ।

मैदे का बन अथवा पावरोटी : मैदे के बन और पावरोटी ‘स्पंज’के समान सोखने का गुण है । इसलिए चिकन की कष्टदायक शक्ति बन सोख लेता है । बन में कष्टदायक शक्ति का प्रवेश होते ही वह बन में रिस जाती है और अनिष्ट शक्तियों का स्थान निर्मित करती है । जब मैदा, चिकन, चीज और मायोनीज शरीर में प्रवेश करते हैं, तब उनसे चिपचिपा गोला बनता है, जिसका आगे किण्वन होता है । तत्पश्चात वह पेट में और आंतों में ३६ घंटों से अधिक समयतक रहता है, जिससे उसे वहां कष्टदायक शक्ति की वृद्धि करने में और शरीर में रहकर रक्तप्रवाह के द्वारा इस कष्टदायक शक्ति को शरीर के विविध भागों में पहुंचाने के लिए बहुत समय मिल जाता है ।’

– श्रीमती भक्ती, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय (१३.९.२००९)

संदर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ “आधुनिक आहारसे हानि”