सनातन संस्था विरोधियों की अनदेखी कर अपना कार्य करती रहे ! – केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक

सनातन संस्थापर संभावित प्रतिबंध के विरुद्ध आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक को निवेदन

केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक (बाईं ओर) को निवेदन सौंपते हुए सनातन संस्था के साधक श्री. प्रमोद नाणोस्कर तथा श्री. राज बोरकर

पणजी : सनातन संस्था विरोधियों की अनदेखी कर अपना कार्य करती रहे; क्योंकि सनातन के विरोधी सनातन का कुछ बिगाड नहीं सकते । स्वयं भी कुछ अच्छा न करना और जो अच्छा कर रहे हैं, उनको अच्छा करने न देना, ही विरोधियों की प्रवृत्ति है । केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपाद नाईक ने यह मत व्यक्त किया । हाल ही में सनातन के साधकों ने सनातनपर प्रतिबंध की मांग के विरुद्ध अपना पक्ष रखने के लिए केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक से उनके निवासपर भेंट कर उन्हें निवेदन सौंपा । सनातन संस्था के सर्वश्री प्रमोद नाणोस्कार तथा राज बोरकर ने उन्हें यह निवेदन सौंपा ।

इस निवेदन में कहा गया है कि,

सनातन संस्था और उसके साधक विगत २ दशकों से निरपेक्षभाव से हिन्दू धर्म और संस्कृति का प्रचार कर समाज में अध्यात्म, साधना, संस्कृति तथा राष्ट्र के विषय में जागृति ला रहे हैं । साथ ही भ्रष्टाचार, जनता की लूट तथा अन्याय के विरुद्ध वैधानिक पद्धति से संघर्ष कर रहे हैं । उसके कारण समाज नैतिकता और धर्माचरण की ओर झूककर सुखशांति तथा समृद्ध जीवनपथपर अग्रसर है । नालासोपारा के गोरक्षक श्री. वैभव राऊत को ९ अगस्त की रात में आतंकवादविरोधी दल के अधिकारियों ने उन्हें घर में विस्फोटक रखने के आरोप में ने बंदी बनाया । इस प्रकरण में बंदी बनाए गए कोई भी संदिग्ध सनातन संस्था के साधक न होते हुए भी कुछ राजनीतिक दल, संगठन तथा मुसलमान नेता आदि लोग सनातन संस्थापर प्रतिबंध लगाने की आधारहीन मांग कर रहे हैं । कुछ प्रसारमाध्यम सनसनी फैलानेवाली तथा दिशाभ्रम करनेवाले समाचार प्रसारित कर हिन्दू आतंकवाद का ढोल पीट रहे हैं । वास्तविकता यह है कि चाहे ठाणे हो अथवा मडगाव (गोवा) इनमें से किसी भी बमविस्फोट के प्रकरणों के आरोपपत्र में सनातन संस्था का नाम नहीं है । संस्था कानून तथा संविधान की कक्षा में ही कार्य करती है; इसलिए उसने समय-समयपर अवैध कृत्यों की निंदा की है । केंद्रीय गृहराज्यमंत्री श्री. केरण रिजीजू ने भी संसद में सनातन संस्थापर प्रतिबंध लगाने के विषय में स्पष्टीकरण देते हु, कहा था कि केंद्र सरकार की ओर से सनातन संस्था को किसी भी प्रकार से कानूनद्रोही संगठन घोषित नहीं किया गया है, साथ ही आज की स्थिति में सनातन संस्थापर प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव और विचार नहीं है । ऐसा होते हुए भी सनातन संस्थापर प्रतिबंध की मांग करना अयोग्य है ।

स्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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