अपप्रचार : ‘आप रासायनिक खेती करते हों, तो एकाएक प्राकृतिक खेती की ओर न मुडें । वैसा करने से आपकी उत्पन्न घटेगी ।
खंडन : गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत पहले कुरुक्षेत्र, हरियाणा में उनके गुरुकुल के ९० एकड भूमि पर रासायनिक खेती करते थे । खेती में हानिकारक रासायनों की फव्वारनी करते समय रसायनों के दुष्प्रभाव से एक बार एक मजदूर बेसुध हो गया । उसे रुग्णालय में दाखिल करना पडा । तब आचार्य देवव्रत ने विषैली खेती के पर्याय के रूप में प्राकृतिक खेती कर देखना निश्चित किया । प्रयोग के तौर पर प्रथम वर्ष ९० में से १० एकड क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की । पहले ही वर्ष में उन्हें रासायनिक खेती समान ही उत्पन्न मिली । उत्पन्न में घटौती नहीं हुई । तदुपरांत उन्होंने पूरे ९० एकड क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की । उस समय उन्हें रासायनिक खेती की अपेक्षा भी अधिक उत्पन्न मिली । प्राकृतिक खेती समझकर योग्य प्रकार से करने पर उत्पन्न में रत्तीभर भी घट नहीं होती ।’ – श्रीमती राघवी मयूरेश कोनेकर, ढवळी, फोंडा, गोवा. (३०.७.२०२२)
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