स्मृतिदिवस : फाल्गुन शु.प. ८ (१६ मार्च)
वंदे मातरम व स्वतंत्रतालक्ष्मी की जय कहने मात्र से अंग्रेज सरकार ने उन्हें दंडित किया था । ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी अपना कार्य आरंभ रखनेवाले बाबाराव सावरकरजी अर्थात,स्वतंत्रतावीर विनायक दामोदर सावरकर के अग्रज थे । बचपन से ही दोनों भाई आसपास के युवाआें को एकत्र कर, उन्हें राष्ट्र संबंधी विषय बताकर उन्हें प्रेरित करते थे । उनके कार्यक्रमों में छत्रपति शिवाजी महाराज की कथाएं सुनाना, किलों पर जाना,व्यायाम आदि रहता था ।
वीर सावरकर ने लंदन से बाबाराव को इटालियन क्रांतिकारी जोसेफ मैजिनी का आत्मचरित्र भेजा । बाबाराव ने परिश्रम से पैसे इकट्ठे कर इसकी प्रतियां क्रांतिकारियों में वितरित कर, उन्हें नई दिशा दी । वीर सावरकर द्वारा भेजे बमों व पिस्तौल भी क्रांतिकारियों में वितरण किए । पुस्तकों के पन्ने फाडकर उसमें यह पिस्तौल छिपाकर लाए जाते थे ! भगत सिंह इ. क्रांतिकारियों का फांसी का दंड निरस्त होने हेतु वे स्वयं अनेक कांग्रेस के पदाधिकारियों से मिले थे ।
एम्पायर थिएटर के बम विस्फोट-प्रकरण में, कारागृह में बिताए ४ वर्ष में, उन्होंने राष्ट्रमीमांसा नामक ग्रंथ लिखा । उसमे भारत हिन्दू राष्ट्र कैसे है, यह सिद्ध किया । अपना जीवन संकट में डालकर राष्ट्र कार्य करनेवाले ऐसे महान क्रांतिकारियों को प्रणाम !
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