
सनातन संस्था के साधक समीर गायकवाड का आज दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करें, ऐसी हम प्रार्थना करते हैं। समीर को वर्ष 2015 में कॉ. गोविंद पानसरे हत्या प्रकरण में बेवजह गिरफ्तार किया गया था। एक वाहन पर आए दो हत्यारों ने हत्या की थी। जांच एजेंसियों ने बताया था कि उनमें से एक समीर गायकवाड थे। एक स्कूली लड़के को प्रत्यक्षदर्शी गवाह के रूप में पेश किया गया; लेकिन सालभर में ही जांच एजेंसियों ने घोषित किया कि वे दो हत्यारे कोई और ही थे। इसका अर्थ यह है कि समीर गायकवाड निर्दोष थे। उन्हें जेल में भी कष्ट सहना पड़ा। उन्हें 19 महीने जेल में रखा गया था।
🚨 Innocent Sanatan Sanstha seeker Sameer Gaikwad passes away
A death caused by the ‘System’ – @SanatanSanstha
Sameer Gaikwad, falsely implicated in the murder case of Govind Pansare, passed away today.
🙏 While praying for his soul to attain Sadgati, Sanatan Sanstha states… pic.twitter.com/HWi0xJXnNo
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) January 20, 2026
इसके बाद वे जमानत पर थे; किंतु न किए गए अपराध में फंसाए जाने के कारण उन पर और उनके परिवार पर इस बात का प्रचंड मानसिक तनाव था। पानसरे हत्या मामले के आरोपी के रूप में मीडिया द्वारा की गई बदनामी इतनी बड़ी थी कि व्यवसाय, नौकरी जैसे सभी स्थानों पर उन्हें परेशानी हुई। एक सामान्य किसान परिवार के इस निर्दोष साधक का जांच एजेंसियों द्वारा किया गया उत्पीड़न और तथाकथित आधुनिकतावादी द्वारा की गई बदनामी ने उनका जीवन उद्ध्वस्त कर दिया था। लोकतंत्र और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ताक पर रखते हुए समीर गायकवाड को कोल्हापुर से वकील भी नहीं मिलने दिया गया था। व्यवस्था के ऐसे अनेक अत्याचारों का उन्हें सामना करना पड़ा; दुर्भाग्य से आज उनका निधन हो गया। ‘‘यह निधन नहीं, अपितु व्यवस्था ने उनकी बलि ली है’’, *ऐसी प्रतिक्रिया सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने व्यक्त की है।
जब समीर गायकवाड को गिरफ्तार किया गया, उस समय जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि पानसरे की हत्या के दिन समीर गायकवाड पालघर में थे; लेकिन दबाव के कारण उन्होंने यह तथ्य न्यायालय के सामने नहीं रखा। बचाव करते समय समीर गायकवाड इसे न्यायालय के सामने ला सकते थे; लेकिन शायद अब वह अवसर चला गया। इस प्रकरण में आज भी ‘आरोपी क्र. 1’ के रूप में उनका नाम दर्ज है; परंतु समीर को जमानत मिलने पर पुलिस ने नई ‘थिअरी’ मांडते हुए घोषित किया कि पानसरे की हत्या सारंग अकोलकर और विनय पवार ने की। कुछ महीनों बाद फिर दो नए नाम सामने लाए गए। समीर इस दोषपूर्ण जांच के बेवजह बलि बने। क्या पुरोगामियों के दबाव में पुलिस ने सनातन के साधकों को फंसाने का पाप किया ?
गायकवाड परिवार के दुःख में सनातन परिवार सहभागी है। गायकवाड परिवार से समय-समय पर हुई बातचीत से पता चला कि इस प्रकरण में बेवजह फंसाए जाने का तनाव समीर के मन पर हमेशा रहता था। उनका सार्वजनिक जीवन नष्ट हो गया था। हत्या के आरोपी होने के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिल रही थी। इन सभी चीजों की भरपाई कौन करेगा ? अजमल कसाब जैसे नराधम आतंकवादी को सरकारी खर्च पर वकील मिलता है, फांसी की सजा पाए लोगों के लिए रात के 1 बजे सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे खुलते हैं; लेकिन केवल एक हिंदू, सनातन संस्था का साधक और गरीब किसान का बेटा है, इसलिए समीर को वकील नहीं मिलने दिया जाता। शासन उनकी जमानत रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में जाता है। पुलिस किसके दबाव में न्यायालय में उलट-सुलट सबूत पेश करती है ?

आधुनिकतावादीयों के वैचारिक आतंकवाद से शासन पर दबाव आया और अंततः आज एक व्यक्ति की बलि चढ़ गई, इसका हमें दुःख है। भीमा कोरेगांव प्रकरण के आरोपी स्टेन स्वामी की मृत्यु के बाद मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायमूर्तियों ने शोक व्यक्त किया था। संयुक्त राष्ट्र संघ ने शोक व्यक्त करने वाला प्रेस नोट जारी किया था। ‘‘समीर गायकवाड के लिए कोई खड़ा रहेगा क्या, यह प्रश्न भी यहाँ उल्लेखनीय है’’, ऐसा भी श्री. राजहंस ने कहा।
– श्री चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था.
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