अधिक मास में सनातन संस्‍था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्‍यों को देकर सर्वश्रेष्‍ठ ज्ञानदान का फल प्राप्‍त करें !

सभी पाठकों, हितचिंतकों और धर्मप्रेमियों से विनम्र अनुरोध !

 

१. अधिक मास में ज्ञानदान का विशेष महत्त्व !

१८.९.२०२० से १६.१०.२०२० की अवधि में ‘अधिक मास’ है । शास्‍त्रकारों ने ‘अधिक मास में मंगलकार्य न कर विशेष व्रत और पुण्‍यकारी कृत्‍य करने चाहिए’, ऐसा बताया है । इस मास में दान देने से उसका कई गुना फल मिलता है । इसलिए इस काल में वस्‍त्रदान, अन्‍नदान एवं ज्ञानदान करने का विशेष महत्त्व है । भारतीय संस्‍कृति में ‘ज्ञानदान देना’, सर्वश्रेष्‍ठ माना गया है; इसलिए अनेक लोग इसके लिए प्रयासरत रहते हैं ।

 

२. सनातन संस्‍था की सर्वांगस्‍पर्शी ग्रंथसंपदा ज्ञानदान देने का सर्वोत्तम माध्‍यम !

सनातन संस्‍था की बहुविध और सर्वांगस्‍पर्शी ग्रंथसंपदा चिरंतन ज्ञान की अमूल्‍य धरोहर है ! सनातन संस्‍था ने अध्‍यात्‍म, साधना, देवताओं की उपासना, आचारधर्म, धर्माचरण, बालसंस्‍कार, राष्‍ट्ररक्षा, धर्मजागृति, ईश्‍वरप्राप्‍ति हेतु कला, आपातकाल में जीवित रहने हेतु उपाय आदि विषयों पर आधारित ३२४ ग्रंथ और लघुग्रंथ प्रकाशित किए हैं । ये ग्रंथ पाठकों को सरल भाषा में अमूल्‍य ज्ञान देते हैं, साथ ही उनमें धर्म के प्रति श्रद्धा भी बढाते हैं । इसके कारण अधिक मास में इस प्रकार के ग्रंथदान के द्वारा पुण्‍यसंचय सहित आध्‍यात्मिक लाभ भी उठाएं ।

अन्‍यों को देने हेतु सनातन संस्‍था के ग्रंथों और लघुग्रंथों की आवश्‍यकता हो, तो स्‍थानीय वितरक से शीघ्रातिशीघ्र उनकी मांग करें या sanatanshop.com/shop लिंक पर जाएं ।

साधक ‘वॉट्‍स एप’ के माध्‍यम से पाठक, हितचिंतक और धर्मप्रेमियों को विविध विषयों पर आधारित ग्रंथों की जानकारी भेजें और उनकी रुचि के अनुरूप ग्रंथों का चयन करने के लिए कहें ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात