सनातन के बाल संतरत्न

१. पू. भार्गवराम भरतप्रभु (आयु १ वर्ष ५ मास)

४ नवंबर २०१८ को, सनातन संस्था के धर्मप्रसारक पू. रामानंद गौडा ने मंगलूरु (कर्नाटक) के बालक चि. भार्गवराम भरतप्रभु (आयु १ वर्ष ५ मास) ‘जनलोक से पृथ्वी पर जन्में हैं और वे जन्म से ही संत पद पर विराजमान हैं,’ यह ऐतिहासिक घोषणा की । मंगलूरु (कर्नाटक) में ५.५.२०१७ को श्रीमती भवानी प्रभु (माता) व श्री. भरतप्रभु (पिता) के घर उनका जन्म हुआ। आपातकाल में साधकों को मार्गदर्शन और उनकी रक्षा, केवल इतना ही इस बालक का कार्य नहीं है, अपितु जगत में सर्वत्र हिन्दू (सात्त्विक) राष्ट्र की नींव सर्वत्र स्थापित करने का कार्य भी यही बालक करेगा । पू. भार्गवराम का बोलना, चलना, व्यवहार और सब कुछ ही असामान्य दिखाई दे रहा था । कार्यक्रम के समय पू. भार्गवराम के मुख पर आरंभ से अंत तक हास्य भाव था । उनके मुख पर कभी रोने का अथवा नकारात्मक भाव नहीं था । यह बुद्धिअगम्य (बुद्धि की समझ से परे लीला है ।

२. पू. वामन अनिरुद्ध राजंदेकर (आयु १ वर्ष)

१० सितंबर २०१९ को रामनाथी, गोवा में ‘जन्म से ही अनेक दैवी गुणों का समुच्चय (समूह) होनेवाले चि. वामन अनिरुद्ध राजंदेकर (आयु १ वर्ष) जनलोक से पृथ्वी पर जन्में दूसरे बालसंत हैं’, यह परात्पर गुरु डॉ. आठवले ने बताने पर सनातन संस्था की सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने घोषित किया । उनका रेंगना, मोहक हंसी, सद्गुरु और संत के बोलने पर सूचक प्रतिसाद देना आदि सभी बातें उनके अलौकिकत्व की प्रतीति दे रही थीं ! पुणे (महाराष्ट्र) में १० सितंबर २०१८ को श्रीमती मानसी अनिरुद्ध राजंदेकर (माता) व श्री. अनिरुद्ध राजंदेकर (पिता) के घर उनका जन्म हुआ। पू. वामन परात्पर गुरु डॉ. आठवले की आसनदी (कुर्सी) पकडकर खडे होकर उनसे संवाद साधने का प्रयास कर रहे थे । इससे वहां उपस्थितों को लगा मानो वे दर्शा रहे हैं कि ‘हमारा पूर्वजन्म का नाता है । पू. वामन ने कुछ न बताए जाने पर भी, विविध प्रसंगों से, मानो उन्होंने परात्पर गुरु डॉ. आठवले के अद्वितीयत्व को भीतर से पहचान लिया । पू. वामन जनलोक के जीव हैं और जन्म से ही संत हैं तथा वे परात्पर गुरु डॉ. आठवले के लोक-कल्याणकारी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के सर्वव्यापी कार्य से जुडे हैं, इसकी प्रतीति उपस्थित साधकों ने इस दैवी बाललीला के माध्यम से अनुभव की।

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