डॉ. प्रमोद मोघे द्वारा किए अग्निहोत्र के परीक्षणों के परिणाम

पुणे के डॉ. प्रमोद मोघे पुणे के नैशनल केमिकल लेबॉरेटरी संस्था के निवृत्त ज्येष्ठ शास्त्रज्ञ हैं। उन्होंने अग्निहोत्र पर पुणे में प्रयोग किए ।

यज्ञ का प्रथमावतार ‘अग्निहोत्र’के विषय में वैज्ञानिक शोध !

विज्ञान के माध्यम से अग्निहोत्र का वातावरणपर क्या परिणाम होता है ?, इसके अध्ययन हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण हेतु यू.टी.एस्. (युनिवर्सल थर्मो स्कैन) उपकरण का उपयोग किया गया ।

अग्निहोत्र के विविध लाभ

अग्निहोत्र करना आकाशमंडल में निहित सूक्ष्म देवताआें के तत्त्वों को जागृत कर उनकी तरंगों को भूमिमंडलपर खींच लेने का एक प्रभावशाली माध्यम है ।

अग्निहोत्र

त्रिकालज्ञानी संतों ने बताया ही है कि भीषण आपातकाल आनेवाला है तथा उसमें संपूर्ण विश्‍व की प्रचंड जनसंख्या नष्ट होनेवाली है । वास्तव में आपातकाल आरंभ हो चुका है । आपातकाल में तीसरा महायुद्ध भडक उठेगा । अणुबम जैसे प्रभावी संहारक के किरणोत्सर्ग को रोकने के लिए सूक्ष्मदृष्टि से कुछ करना आवश्यक है । इसलिए ऋषि-मुनियों ने यज्ञ के प्रथमावतार रूपी अग्निहोत्र’ का उपाय बताया है ।