श्री दुर्गासप्तशती पाठ एवं हवन

नवरात्रिकी कालावधिमें देवीपूजनके साथ उपासनास्वरूप देवीके स्तोत्र, सहस्रनाम, देवीमाहात्म्य इत्यादिके यथाशक्ति पाठ एवं पाठसमाप्तिके दिन हवन विशेष रूपसे करते हैं ।सुख, लाभ, जय इत्यादि कामनाओंकी पूर्तिके लिए सप्तशतीपाठ करनेका महत्त्व बताया गया है । श्री दुर्गासप्तशती पाठमें देवीमांके विविध रूपोंको वंदन किया गया है ।

नवरात्रीके विविध तिथियोंका महत्त्व तथा जागरण करनेका शास्त्रीय आधार

नवरात्रिके नौ दिनोंमें घटस्थापनाके उपरांत पंचमी, षष्ठी, अष्टमी एवं नवमीका विशेष महत्त्व है । नवरात्रिकी कालावधिमें पंचमीकी तिथिपर ब्रह्मांडमें शक्तितत्त्वकी गंधतरंगें अधिक मात्रामें कार्यरत रहती हैं । और जागरण करना, यह देवीकी कार्यस्वरूप ऊर्जाके प्रकटीकरणसे संबंधित है ।

नवरात्रिकी कालावधिमें उपवास करनेका महत्त्व

नवरात्रिके नौ दिनोंमें अधिकांश उपासक उपवास करते हैं । किसी कारण नौ दिन उपवास करना संभव न हो, तो प्रथम दिन एवं अष्टमीके दिन उपवास अवश्य करते हैं ।