गुरुपूर्णिमा निमित्त परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश

आगामी महाभीषण आपातकाल में अपनी तथा समाज बांधवों की सुविधा और सुरक्षा के विषय में उन्हें बताकर उनकी उस दृष्टि से तैयारी करवाना, गुरु को अपेक्षित कालानुसार आज्ञापालन ही होगा ।

पोला (बैलोंका त्यौहार – बेंदुर अथवा बेंडर)

किसान-समाजमें इस उत्सवका अत्यधिक महत्त्व है । बुआई हो जानेपर खेतीके कामोंसे बैल खाली हो जाते हैं, तब उन्हें रगडकर नहलाया जाता है, उनकी आरती उतारी जाती है एवं नैवेद्य दिखानेके पश्‍चात दोपहरमें उन्हें रंगकर एवं सजाकर गांवमें जुलूस निकाला जाता है ।

यमदीपदान करते समय १३ दीपक क्यों अर्पण करते हैं ?

दीपकों की संख्या १३ मानकर, पूजा की जाती है । इस दिन यमदेवता द्वारा प्रक्षेपित लहरें ठीक १३ पल नरक में निवास करती हैं । इसका प्रतीक मानकर यमदेवता को आवाहन करते हुए १३ दीपकों की पूजा कर, उन्हें यमदेवता को अर्पण किया जाता है ।

श्री गणेश मूर्ति का विसर्जन बहते पानी में करें !

गणेशभक्तो, गणेश चतुर्थी के काल में आपने श्री गणेश की भक्तिभाव एवं धर्मशास्त्रानुसार सेवा की । अब उनका धर्म शास्त्रानुसार विसर्जन करने के स्थान पर प्रसिद्धि के लिए पर्यावरण रक्षा का ढोंग करनेवाले नास्तिकों के हाथ में मूर्ति सौंपनेवाले हो क्या ? धर्मद्रोहियों के आवाहन की बलि चढ, विसर्जन न करने के महापाप से बचें ।

विश्वकर्मा पूजा

हिन्दू धर्मानुसार शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा शिल्पकला एवं सृजनता के देवता माने जाते हैं । भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का निर्माणकर्ता भी कहा जाता है । भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष ८ को विश्वकर्मा पूजा की जाती है ।

गणगौर तीज

गणगौर व्रत चैत्र कृष्ण प्रतिप्रदा से चैत्र शुक्ल द्वितीया तक रखा जाता है । ‘गण’ अर्थात भगवान शिव तथा ‘गौर’ अथवा ‘गौरी’ अर्थात पार्वती देवी ।

गंगा दशहरा

गंगा पूजन का पावन दिन है गंगा दशहरा।  ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन ही भगीरथ गंगा को धरती पर लाए थे।  इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। 

लोहडी

लोहडी का त्यौहार पंजाबियों तथा हरियाणवी लोगों का प्रमुख त्यौहार माना जाता है । यह लोहडी का त्यौहार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमाचल में धूम धाम तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं । यह त्यौहार पौष मास की अंतिम रात्रि और मकर संक्राति की पूर्वसंध्या को हर वर्ष मनाया जाता हैं ।

देवी की मूर्ति गिरने पर तथा भग्न होने पर क्या करें ?

मूर्ति भग्न हो जाना, यह आगामी संकट की सूचना होती है । इसलिए शास्त्र में घर तथा देवालय में विद्यमान भग्न मूर्ति का विसर्जन कर वहां नई मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा करने से पहले अघोर होम, तत्त्वोत्तारण विधि (भग्न मूर्ति में विद्यमान तत्त्व को निकालकर उसे नई मूर्ति में प्रस्थापित करना) इत्यादि विधियां करने के लिए कहा गया है ।

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