वैराग्य किसे कहते हैं ?

सेवा करते समय व्यक्ति की अपेक्षा तत्त्व की ओर ध्यान देना, ही वैराग्य है । व्यक्तिनिष्ठता का त्याग कर तत्त्वनिष्ठता का पालन करना, अर्थात् वैराग्य अपने में अंकित करना । प्रत्येक बात में ईश्वर को देखना, ही वास्तव में वैराग्य है ! -सदगुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

सत्संग का महत्त्व

तुम कितने भी दैवी हो, किंतु माया के कारण तुम पर आवरण आकर तुम को तुम्हारे मूल वंश का विस्मरण होता है । अतः निरंतर सत्संग में रहना महत्त्वपूर्ण है । अधिकांश छोटे बालक दैवी बालक होते हैं; किंतु सत्संग के अभाव के कारण उनका जीवन सफल नहीं हो सकता । जब शेर का बछडा … Read more