परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके कार्यकी प्रेरणासे प्रारम्भ हुआ कार्य

१. संगठन

१अ. हिन्दू जनजागृति समिति

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके हिन्दू राष्ट्र स्थापनाके विचारोंकी प्रेरणासे ७.१०.२००२ को हिन्दू जनजागृति समितिकी स्थापना हुई ।

१अ १. उद्देश्य

१. हिन्दुआेंको धर्मशिक्षा देना
२. हिन्दू संस्कृतिकी रक्षाके लिए जनप्रबोधन करना
३. राष्ट्र और धर्म पर आए संकटोंके सम्बन्धमें जागृति करना तथा उनकी रक्षाके लिए प्रयास करना
४. हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए हिन्दुआेंको संगठित करना

१अ २. उपक्रम

१. धर्मशिक्षावर्ग : धर्मकी श्रेष्ठता बताकर धर्मानुसार आचरण सिखाया जाता है । साथ ही राष्ट्र व धर्म की रक्षा हेतु वैधानिक मार्गसे किए जानेवाले कृत्योंके सम्बन्धमें मार्गदर्शन भी किया जाता है । फरवरी २०१७ में हिन्दू जनजागृति समितिकी ओरसे भारतभरमें ४५० धर्मशिक्षावर्ग आयोजित किए जा रहे थे ।

२. बालसंस्कारवर्ग : ५ से १५ वर्षकी आयुवर्गके बालकोंपर सुसंस्कार करनेके लिए बालसंस्कारवर्गोंका आयोजन किया जाता है । इन वर्गोंमें हिन्दू संस्कृतिके अनुसार आचरण, धार्मिकता और नैतिकता के संस्कार, स्वभावदोष-निर्मूलन, गुणसंवर्धन आदि के सम्बन्धमें मार्गदर्शन किया जाता है ।

३. स्वरक्षा प्रशिक्षणवर्ग : इसमें गुण्डागर्दी, दंगे, बलात्कार, आतंकवादी आक्रमण आदि घटनाआेंमें स्वयं, तथा समाज, राष्ट्र और धर्म की रक्षा कैसे करें, यह सिखाया जाता है ।

४. विशाल हिन्दू धर्मजागृति सभाएं : हिन्दुआेंमें राष्ट्र और धर्म के प्रति जागृति हो तथा वे संगठित हों, इस उद्देश्यसेे हिन्दू जनजागृति समितिने अप्रैल २००७ से फरवरी २०१७ तक ११ राज्योंमें कुल ७ भाषाआेंमें १,२२६ विशाल हिन्दू धर्मजागृति सभाआेंका आयोजन किया और इसके माध्यमसे लगभग १६ लाख हिन्दुआेंको जागृत किया ।

५. राष्ट्र एवं धर्म जागृति पर प्रदर्शनियां : धर्मशिक्षा, गोरक्षा, गंगारक्षा, मन्दिररक्षा, राष्ट्ररक्षा, स्वभाषारक्षा, बांग्लादेशी एवं कश्मीरी हिन्दुआेंपर हुए अत्याचार, क्रान्तिकारियोंका स्मरण, हिन्दू राष्ट्र-स्थापना आदि विषयोंपर प्रतिवर्ष १ सहस्र (हजार)से अधिक स्थानोंपर फलक प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं ।

६. अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन और स्थानीय स्तरपर हिन्दू अधिवेशन : हिन्दू राष्ट्र-स्थापनाके लिए हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों और नेताआें को कार्यके लिए एकत्रित लाने हेतु वर्ष २०१२ से प्रतिवर्ष गोवामें अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन तथा अन्यत्र राज्यस्तरीय, प्रान्तीय और जनपद स्तरीय हिन्दू अधिवेशनोंका आयोजन किया जाता है । फरवरी २०१७ तक ५ राष्ट्रीय, ३५ प्रान्तीय, ७ राज्यस्तरीय और २५ जनपद स्तरीय, इस प्रकार कुल ७२ हिन्दू अधिवेशन आयोजित किए गए थे । इन हिन्दू अधिवेशनों द्वारा २५० से अधिक राष्ट्रप्रेमी और धर्मप्रेमी संगठन एकत्र आए हैं ।

१अ ३. महिला शाखा – रणरागिनी (स्थापना ३.६.२००९)

हिन्दू स्त्रियोंको धर्मशिक्षित करने हेतु और राष्ट्र-धर्म रक्षाके लिए सक्रिय बनाने हेतु हिन्दू जनजागृति समितिने रणरागिनी नामक महिला संगठन प्रारम्भ किया । रणरागिनी शाखाद्वारा युवतियोंके लिए स्वरक्षा प्रशिक्षणवर्ग आयोजित किए जाते हैं । इसके साथ ही अश्‍लीलताके विरुद्ध तथा धर्मपरम्पराआेंका विरोध करनेवाली आधुनिकतावादी महिलाआेंके विरुद्ध सक्रिय आन्दोलन भी किए जाते हैं ।

१अ ४. जालस्थल (Websites)

१. हिन्दू जनजागृति समितिका जालस्थल – Hindujagruti.Org राष्ट्र एवं धर्म पर आए संकटोंके विरुद्ध जागृति करने और हिन्दू राष्ट्र-स्थापनाके सम्बन्धमें मार्गदर्शन करने हेतु यह जालस्थल कार्यरत है । हिन्दी और अंग्रेजी भाषाका यह जालस्थल १८० से अधिक देशोंमें देखा जा रहा है । भारतके पश्‍चात अमेरिका और इंग्लैंड में इस जालस्थलके सर्वाधिक पाठक हैं।

२. बालसंस्कार जालस्थल – Balsanskar.Com : आजके बालक देशके भावी आधारस्तम्भ हैं । इसलिए वे गुणी और आदर्श होने चाहिए । इस हेतु उन्हें अपने दोष नष्ट कर गुण बढाना कैसे सम्भव होगा, अर्थात अपने व्यक्तित्वका विकास करना कैसे साध्य होगा ? इसका विवेचन हिन्दू जनजागृति समितिके मराठी, हिन्दी, कन्नड और अंग्रेजी भाषाके बालसंस्कार जालस्थल पर दिया है ।

१ आ. स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउण्डेशन (एसएसआरएफ)

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीकी साधनासे सम्बन्धित सीख अच्छी लगने तथा उनके आध्यात्मिक शोधकार्यसे प्रेरणा मिलनेके कारण विदेशके जिज्ञासुआेंने ऑस्ट्रेलियामें १४.१.२००६ को स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउण्डेशन नामक संस्थाकी स्थापना की । तत्पश्‍चात यूरोप और अमेरिका में भी स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउण्डेशनकी स्थापना हुई ।

  १ आ १. उद्देश्य

१. वैज्ञानिक भाषामें अध्यात्मका संसारभरमें प्रसार करना
२. विविध पन्थों और योगमार्गों के अनुसार साधना करनेवालोंको आध्यात्मिक उन्नतिके लिए मार्गदर्शन करना
३. आध्यात्मिक शोध करना
४. मानवीय जीवनकी आध्यात्मिक बाधाआेंके निवारणके लिए आध्यात्मिक उपचारोंका प्रसार करना

१ आ २. एसएसआरएफके उपक्रम

१. साप्ताहिक सत्संग : वर्तमानमें (फरवरी २०१७ में )एसएसआरएफ द्वारा संसारभरके जिज्ञासुआेंके लिए अंग्रेजी, इंडोनेशियन, फ्रेंच, सर्बोक्रोएट, जर्मन, स्पैनिश, फारसी और रशियन, इन ८ भाषाआेंमें ५० साप्ताहिक सत्संग आयोजित किए जाते हैं ।

२. व्याख्यान : दैनिक जीवनमें साधनाका महत्त्व इस विषयपर संसारभरमें व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं ।

१ आ ३. एसएसआरएफके साधकोंद्वारा की गई आध्यात्मिक उन्नति

फरवरी २०१७ तक एसएसआरएफके २० साधकोंने ६० प्रतिशतसे अधिक आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया है तथा ४ साधक सन्त बन गए हैं ।

१ आ ४. एसएसआरएफका जालस्थल – SSRF.org

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीद्वारा किए गए आध्यात्मिक शोध हिन्दी, फारसी, अंग्रेजी, चीनी, फ्रेंच, जर्मन, डच, स्पैनिश, क्रोएशियन, सर्बियन, रशियन, स्लोवेनियन, मलेशियन, हंगेरियन, पुर्तगाली, इंडोनेशियन, मैकोडेनियन, बल्गेरियन, रोमेनियन, नेपाली, अरबी, तमिल, इन २२ भाषाआेंमें SSRF.org जालस्थलपर उपलब्ध हैं । इस संस्थाके माध्यमसे सैकडों विदेशी नागरिक हिन्दू धर्मानुसार साधना करने लगे हैं

१ इ. हिन्दू विधिज्ञ परिषद

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके राष्ट्र एवं धर्म रक्षाके कार्यकी प्रेरणासे राष्ट्रप्रेमी और धर्मप्रेमी अधिवक्ताआेंने (वकीलोंने) १४.६.२०१२ को हिन्दू विधिज्ञ परिषदकी स्थापना की ।

१ इ १. कार्य

१. हिन्दू समाज, राष्ट्र और धर्म के हितके लिए न्यायालयीन संघर्ष करनेवाले अधिवक्ताआेंके संगठन तथा कार्यकी दिशा निश्‍चित करने हेतु बैठकें, शिविर आदि आयोजित करना
२. शासकीय भ्रष्टाचार और अकार्यक्षमता तथा शासन द्वारा किए जानेवाले अन्यायके विरुद्ध सूचनाका अधिकार, जनहित याचिका आदि द्वारा न्यायालयीन संघर्ष करना
३. राष्ट्रप्रेमियों और धर्मप्रेमियोंको वैधानिक (कानूनी) सहायता करना

 

२. उपक्रम

२ अ. सनातन साधक-पुरोहित पाठशाला

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके मार्गदर्शनमें ३०.४.२००८ को वेद-धर्मशास्त्रादि विद्याआेंका अध्ययन करनेकी क्षमता रखनेवाले साधकोंके लिए सनातन साधक-पुरोहित पाठशाला स्थापित की गई ।

  २ अ १. उद्देश्य

१. साधना स्वरूप पौरोहित्य करनेवाले पुरोहित तैयार करना : धार्मिक विधियां करनेवाले पुरोहित सात्त्विक हों, तो उसका अधिक अच्छा फल मिलता है । वर्तमानमें साधनास्वरूप पौरोहित्य करनेवाले पुरोहित मिलना कठिन है । इसलिए सात्त्विक पुरोहित तैयार करने तथा समाज समझ पाए कि आदर्श पुरोहित कैसे होते हैं, इस उद्देश्यसे सनातन साधक-पुरोहित पाठशाला स्थापित की गई ।

२. पुरोहितोंको सन्त-पुरोहित बननेका दिया हुआ ध्येय : इस पाठशालामें पढनेवाले पुरोहितोंको साधनामें उन्नतिकी दृष्टिसे विद्यार्थी-पुरोहित, साधक-पुरोहित से सन्त-पुरोहित ऐसा ध्येय दिया है ।

२ अ २. कार्य

१. पौरोहित्यकी शिक्षा देने हेतु प्रतिवर्ष वासन्तिकवर्गोंका आयोजन होता है ।
२. जब पाठशाला स्थापित की थी, तब ध्यानमें नहीं आया था कि हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए साधक-पुरोहितोंकी आवश्यकता पडेगी । अब प्रति सप्ताह सप्तर्षि जीवनाडी और भृगु संहिता के वाचक विविध धार्मिक विधियां और यज्ञ आदि करनेके लिए बता रहे हैं तथा सनातन साधक-पुरोहित पाठशालाके साधक-पुरोहित वह कर रहे हैं ।

– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले (३.३.२०१७)

२ आ. सनातन अध्ययन केन्द्र

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीकी प्रेरणासे १.१२.२०१५ को सनातन अध्ययन केन्द्रकी स्थापना हुई । विविध परिसंवाद, कार्यक्रम और दूरदर्शन-वाहिनियों पर होनेवाले चर्चासत्रोंमें हिन्दू धर्मका पक्ष प्रस्तुत करनेके लिए हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनोंके वक्ताआेंको वैचारिक सहायता करनेका कार्य सनातन अध्ययन केन्द्रद्वारा किया जाता है ।

सन्दर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके सर्वांगीण कार्यका संक्षिप्त परिचय’

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