सुख का मूल धर्माचरण में है ! – श्री. प्रदीप खेमका, सनातन संस्था

झारखंड के कतरासगढ में हिन्दू धर्मजागृति सभा संपन्न !

कतरासगढ (झारखंड) : यहां के रानीबाजार के डी.ए.वी. महिला विश्‍वविद्यालय में धर्मजागृति सभा का आयोजन किया था । सभा में समिति के श्री. सुरालजी ने उपस्थितों को कहा कि हिन्दू स्वाभिमान से जीवनयापन कर सकें इसके लिए शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना की । आज कहां है वह स्वाभिमान ? और कहां है वह हिन्दू राष्ट्र ? इसलिए हिन्दुओ उठो ! जागृत होकर अपना हिन्दू राष्ट्र स्थापित करो !

सहकार भारती के श्री. केशव हडोदियाजी ने कहा कि वर्तमान समाज की आवश्यकता है संघे शक्तिः कलौयुगे । संविधान द्वारा हमें दिए गए अधिकारों का उपयोग हमें करना है । समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव कई वर्षों से सरकार के पास है, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा रहा है । जब तक समाज का दबाव सरकार पर नहीं पडेगा; तब तक वह सुधार नहीं हो सकता, जो सुधार हम चाहते हैं । इसलिए संगठित होकर हमें आगे आना है ।

विश्‍व हिन्दू परिषद के धनबाद विभाग सह-मंत्री श्री. कमलेश सिंहजी ने कहा कि विश्‍व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों पर अत्याचार करते हैं । कश्मीर व कैराना के उपरांत असम और अब बंगाल की स्थिति हम सभी के सामने है । हम संगठित नहीं हुए तो कश्मीर व कतरास में कोई अंतर नहीं रहेगा ! सभा के माध्यम से श्री. सिंहजी ने गोवंश की रक्षा के लिए, सीमा की सुरक्षा के लिए, हिन्दू राष्ट्र के लिए हिन्दुआें को संगठित होने का आवाहन किया ।

इस समय सनातन संस्था के श्री. प्रदीप खेमका ने उपस्थितों को बताया कि सुखस्य मूलं धर्मः । अर्थात सुख का मूल धर्माचरण में है । दिन में न्यूनतम ५ बार तो ” हे भगवान श्रीकृष्ण, राष्ट्र और धर्म की रक्षा कीजिए ! ” यह प्रार्थना करने का आवाहन किया ।

सभा में ४५० हिन्दू उपस्थित रहे । कार्यक्रम में बजरंग दल के श्री. विक्की सिंह, संघ परिवार से श्री. नकुल चंद्र दास, डॉ. सुनील कुमार, सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य श्री. सच्चिदानंद सिंह, काको वेद पाठशाला के प्राचार्य श्री. सत्यनारायण शास्त्री, डॉ. शिवानी झा समेत कई मान्यवर उपस्थित थे ।

धर्मसभा के प्रसार निमित्त १२.१.२०१७ को कतरास स्थित राजस्थानी सेवा भवन में पत्रकार परिषद आयोजित की गई । १४.१.२०१७ को प्रसारफेरी निकाली गई, जिसमें धनबाद, कतरास, जमशेदपुर, कोलकाता एवं मलकेरा के साधक एवं धर्ममाभिमानी सम्मिलित हुए ।

क्षणिका

आचारधर्म पालन करने के लिए जब आवाहन किया गया, तब सभी ने हाथ उठाकर योग्य कृति करने के लिए समर्थन जताया ।

स्रोत : पाक्षिक सनातन प्रभात