वास्तविक आरोपी नहीं मिलते, इसलिए समीर गायकवाड और डॉ. तावडे की बलि न चढाएं ! – श्री. अभय वर्तक, सनातन संस्था

कानून व मानवाधिकार का उल्लंघन
करनेवाले पुलिस के ‘एसआइटी’ द्वारा सनातन का शोषण !

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बार्इ आेर से सनातन संस्था के डॉ. मानसिंग शिंदे, सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक, श्री. समीर गायकवाड के अधिवक्ता श्री. समीर पटवर्धन आैर हिंदु विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर

कॉ. पानसरे हत्या प्रकरण में महाराष्ट्र पुलिस का विशेष जांच दल (एसआइटी) झूठे प्रमाणों के आधार पर तथा कपोलकल्पित कहानियां रचकर सनातन संस्था की बदनामी कर रहा है । डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे एक ‘एम.डी.’डॉक्टर हैं, उन्हें एक व्यापक षड्यंत्र के अंतर्गत इस हत्या में फंसाया जा रहा है । विशेष जांच दल की पुलिस कानून की सीमा लांघकर, तथा मानवाधिकार का उल्लंघन कर सनातन संस्था के साधकों का शोषण कर रही है । कॉ. पानसरे हत्या प्रकरण में पुलिस ने सनातन के साधक श्री. समीर गायकवाड को संदेह के आधार पर बंदी बनाए १६ सितंबर २०१६ को एक वर्ष हो गया । दिसंबर २०१५ में आरोपपत्र प्रविष्ट करने के उपरांत भी पुलिस मई २०१६ तक अभियोग चलाने को ही तैयार नहीं थी । समीर गायकवाड की ही भांति डॉ. तावडे को भी अनेक दिन कारावास में रखने का प्रयास चल रहा है । वास्तविक आरोपी नहीं मिलते; इसलिए समीर गायकवाड और डॉ. तावडे की बलि न चढाई जाए, ऐसा प्रतिपादन सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने कोल्हापूर में (महाराष्ट्र) आयोजित पत्रकार परिषद में किया । इस समय पर हिंदु विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता श्री. वीरेंद्र इचलकरंजीकर, श्री. समीर गायकवाड के अधिवक्ता श्री. समीर पटवर्धन और सनातन संस्था के डॉ. मानसिंग शिंदे उपस्थित थे ।

विशेष जांच दल की पुलिस का कानून की सीमा के परे आचरण

१. २ सितंबर २०१६ को डॉ. तावडे को चिकित्सालय ले जाते समय तथा चिकित्सालय में भी उनकी सुरक्षा की कोई सावधानी लिए बिना पुलिस ने पत्रकारों को जानबूझकर उनके छायाचित्र लेने दिए । शासन और उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर यह नियमबाह्य आचरण क्यों किया गया ?

२. पुलिस अधिकारी रवी पाटील और पुलिस निरीक्षक अमृत देशमुख ने मिलकर व्याधिग्रस्त डॉ. तावडे को अवैध रूप से पुलिस कोठरी में पीटा । इस पर मा. न्यायालय द्वारा आदेश देने पर चिकित्सा जांच की गई, तदुपरांत डॉ. तावडे के अनेक रोग उजागर हुए । विशेष जांच दल ने न केवल डॉ. तावडे के मानवाधिकार का हनन किया, अपितु मुंबई उच्च न्यायालय के आदेशों का भी उल्लंघन किया है ।

३. पुलिस कोठरी में डॉ. तावडे जपमाला लेकर नामजप कर रहे थे । यह माला पुलिस ने छीन ली । डॉ.तावडे के बार-बार विनती करने पर पुलिस ने यह माला लौटाई । वास्तव में भगवान का नामजप करना, प्रत्येक व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है । नामजप का विरोध कर जांच कार्य करनेवालों ने अपना हिन्दूद्वेष ही प्रकट किया है ।

४. ‘डॉ. तावडे की जांच के कालावधि में उन्हें उनके अधिवक्ता से मिलने दिया जाए’, ऐसा आदेश ३ सितंबर की सायं न्यायालय ने दिया था; परंतु ४ सितंबर को पुलिस कार्यालय में अधिवक्ता श्री.वीरेंद्र इचलकरंजीकर को लंबे समय तक प्रतीक्षारत रखा गया, उन्हें डॉ. तावडे से मिलने नहीं दिया गया । अगले दिन रविवार होने का कारण बताकर उनका पत्र स्वीकारा नहीं गया । इस पर अधिवक्ता इचलकरंजीकर ने इस विषय में इमेल और फैक्स भेजा, तब भी उन्हें इस संदर्भ में सूचित नहीं किया गया ।

५. सीबीआई के छापे में कुछ आक्षेपजनक न मिलने पर भी डॉ. तावडे के घर तथा सनातन के देवद आश्रम पर गणेश चतुर्थी के दिन ही विशेष जांच दल ने छापा मारा । इस छापे में कुछ भी आक्षेपजनक न मिलने के कारण पुलिस अधिकारियों ने आश्रम के क्लिनीक में अधिकृत रूप से रखी जानेवाली कुछ औषधियां जब्त की । ये औषधियां ‘सायकेट्रिक’ औषधियां है, पर पुलिस ने जानबूझकर पत्रकारों को ‘नार्कोटिक’ औषधियां जब्त करने की झूठी जानकारी दी । इतना ही नहीं, आश्रम में साधकों को सम्मोहित करनेवाली औषधियां तीर्थ में मिलाकर दी जाती है, ऐसी झूठी जानकारी न्यायालय, तथा प्रसारमाध्यमों को दी । इससे जांच की अपेक्षा सनातन की अपकीर्ति करने में ही पुलिस की अधिक रुचि है, यह दिखाई देता है ।

६. देवद आश्रम में महिला साधकों से प्रातः ४.३० बजेतक पूछताछ की गई । कानूनन शाम ६ के उपरांत महिलाआें से पूछताछ नहीं की जा सकती, ऐसा होते हुए भी विशेष जांच दल ने कानून का पालन नहीं किया ।

७. औषधियां जब्त करने के उपरांत उस विषय में मानसोपचार विशेषज्ञ की जांच करते समय ‘‘इतनी सारी औषधियां आश्रम में क्यों लगती है ? यह संग्रह ३-४ चिकित्सालयों के संग्रह के बराबर है । संपूर्ण देहली शहर को इतनी औषधियां लगती हैं ।’’, इस प्रकार की बातें दूसरों को तुच्छ समझते हुए की और उनपर दबाव डालने का प्रयत्न किया ।

८. जांच के लिए गए एक साधक को पुलिस ने धमकी दी ‘बर्फ की सिल्ली पर सुलाएंगे ।’

९. ‘जांच का विवरण प्रसारमाध्यमों को न दिया जाए’, ऐसा न्यायालय का आदेश है, पर जांच का झूठा और कपोलकल्पित विवरण देकर विशेष जांच दल ने न्यायालय की भी अवमानना की ।

सनातन संस्था की मांग

१. डॉ. तावडे को पकडने से लेकर हुई प्रत्येक नियमबाह्य कृति के लिए मुख्य जांच अधिकारी अपर पुलिस अधीक्षक सुहेल शर्मा ही कारणीभूत हैं; उनपर तत्काल उचित कार्यवाही की जाए ।

२. डॉ. तावडे को पीटनेवाले पुलिस अधिकारी रवी पाटील और पुलिस निरीक्षक अमृत देशमुख इन दोनों पर तत्काल उचित कानूनी कार्यवाही की जाए ।

३. न्यायालय और शासन के आदेशों का पालन न कर डॉ. तावडे को पुलिस प्रसारमाध्यमों के समक्ष ले गई । उनकी सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई । इस विषय में अमृत देशमुख, सुहेल शर्मा, विशेष जांच दल के मुख्याधिकारी श्री.संजयकुमार पर कठोर कार्यवाही की जाए ।

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