गुरुपरंपरा पूजन की पूर्वतैयारी

‘गुरुपूर्णिमा’ को किए जानेवाले गुरुपरंपरा पूजन की पूर्वतैयारी यहां दी गई है ।

१. गुरुपरंपरा पूजन की तैयारी करने के संदर्भ में कुछ सूचनाएं

अ. गुरुपरंपरा पूजन के लिए लकडी के पूजाघर अथवा चौकी पर सजावट करें । थर्माकोल की सजावट से अच्छे स्पंदन नहीं आते, इसलिए थर्माकोल का उपयोग न करें ।

आ. पूजा के पूर्व व उपरांत चौकी के आसपास की जगह व्यवस्थित व साफ-सुथरी हो, उदा. बंदनवार, फूल आदि अव्यवस्थित न पडे हों ।

इ. पूजन के लिए श्री गुरु का छायाचित्र केले के प‍तों की सजावट में ऱखें (अन्य कही भी न रखें) अथवा महर्षि व्यासजी की प्रतिमा का पूजन करें ।

ई. श्री गुरुपरंपरा के छायाचित्र फूलों से पूर्णतः ढंके हुए न हों । सभी भक्त श्री गुरु के दर्शन व्यवस्थित कर पाएं, इस प्रकार हार और फूल चढाएं ।

 

२. पूजा में बैठनेवालों के लिए सूचना

अ. पति-पत्नी स्नान कर स्वच्छ धुले हुए वस्त्र पहनकर पूजा के लिए बैठें । पति शरीर पर उपरनी (गमछा) लेकर बैठे । पत्नी, पति के दाईं ओर बैठे । पूजन करते समय गीले हाथ पोंछने के लिए एक वस्त्र रखें ।

आ. अपने समक्ष पानी से भरा हुआ लोटा (कलश), प्याला (पानी पीने के एक छोटे गिलास जैसा)-आचमनी व ताम्रपात्र रखें तथा एक थाली में हलदी, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल आदि पूजासामग्री होनी चाहिए ।

इ. प्रत्येक विधि के समय पत्नी अपना दायां हाथ पति के दाएं हाथ को लगाए ।

ई. पूजा के समय पूजा की ओर ही ध्यान दें । आवश्यकता अनुसार ही बोलें ।

उ. अपने समक्ष प्रत्यक्ष सद्गुरु बैठे हैं और हम उनकी पूजा कर रहे हैं, ऐसा भाव होना चाहिए ।

ऊ. श्री गुरु की आरती बोलने से पूर्व उस आरती का भावार्थ समझ लें । इससे भावजागृति होने में सहायता होती है ।

 

३. पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

श्री गुरु की प्रतिमा, कुमकुम, हल्दी, चंदन, सिंदूर, अक्षत, अगरबत्ती, बाती, कपूर, रंगोली, चौकी, कलश, एक प्याला व आचमनी, ताम्रपात्र (तीन), समई (दो), समई के नीचे रखने के लिए छोटी थाली (दो), नीरांजन, पंचारती, घंटी, माचिस, कपास का वस्त्र, नारियल (पांच), चावल (एक किलो), सुपारियां (पांच), बीडे के पत्ते (बीस), पांच प्रकार के फल (प्रत्येक २), सिक्के (१ अथवा २ रूपए के), गुड, खोपरा अर्थात सूखा नारियल (एक), अगरबत्तीका स्टैंड, (अगरबत्ती घर और नीचे रखनेके लिए थाली), मेहराब (मखर) सजाने का साहित्य, फूल व हार, दो पीढे, तुलसी, दूर्वा, बेल, चौकी सजाने के लिए फूल, तेल (समई में डालने के लिए), घी (निरांजन में डालने के लिए)

 

४. पूजा की रचना

चौकी अथवा पूजाघर पूर्व अथवा पश्चिम दिशा में रखें । श्री गुरुपरंपरा के चित्र अपनी ओर मुख कर रखें । प्रत्येक चित्र के आगे की चौकी पर बीडे के २ पत्ते, सुपारी एवं १ रुपए का सिक्का, १ बीडे का पत्ता रखें व साथ में नारियल रखें । नारियल रखते समय नारियल की शिखा फोटो की ओर होनी चाहिए । चौकी के नीचे एक थाली में ५ प्रकार के फल रखें । पूजाघर/चौकी के दोनों ओर समई रखें ।

 

५. गणपतिपूजन रचना

एक थाली में अथवा ताम्रपात्र में चावल डालकर उस पर नारियल रखें (नारियल की शिखा अपनी ओर होनी चाहिए) । साथ में बीडा रखें । नैवेद्य के लिए केले / गुड-खोपरा रखें । चौकी व गणपतिपूजन के लिए की गई रचना के समक्ष २ पीढे रखें । चौकी एवं पीढों को चारों ओर से रंगोली से सुशोभित करें ।

 

गुरुपूर्णिमा पूजाविधि (मंत्र एवं अर्थसहित) (भाग १) पढने हेतु यहां क्लिक करें !

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