विविध माध्यमों से राष्ट्र और धर्म संबंधी कार्य करनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

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परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की हिन्दू राष्ट्र-स्थापना की विचारधारा से प्रेरित होकर गोवा में आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के लिए गोवा आए संतों से वार्तालाप करते प.पू. डॉ. आठवलेजी ! (रामनाथी आश्रम, १०.६.२०१३)

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी हिन्दू राष्ट्र के प्रखर समर्थक हैं । उनके द्वारा संकलित ईश्‍वरीय राज्य की स्थापना नामक मराठी ग्रंथ १८ मार्च १९९९ को प्रकाशित हुआ । इसमें उन्होंने ऐसा विचार प्रस्तुत किया कि भारत में ईश्‍वरीय राज्य की (हिन्दू राष्ट्र की) स्थापना करना, यही हिन्दुआें की सामाजिक, राष्ट्रीय और धार्मिक समस्याआें का एकमात्र उपाय है । आगामी काल में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य कैसे होगा, इसकी समय-सारणी प्रस्तुत करते समय उन्होंने त्रिकालदर्शी विचार प्रस्तुत किया कि वर्ष २०२३ में भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी । अनेक संत और नाडीभविष्य के माध्यम से महर्षि भी यही बता रहे हैं ।

वर्ष १९९८ से परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ग्रंथसंकलन; सनातन प्रभात के लिए राष्ट्र और धर्म संबंधी लेखन करना; विविध संत, संप्रदाय, हिन्दुत्वनिष्ठ, देशभक्त और सामाजिक कार्यकर्ताआें का दिशादर्शन करना; ब्राह्मतेज से युक्त संत बनाना आदि माध्यमों से अथक रूप से हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य कर रहे हैं ।

 

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के
राष्ट्र-धर्म कार्य से प्रेरणा लेकर आरंभ हुआ कार्य

अ. हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए हिन्दू जनजागृति समिति

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के विचारों से प्रेरित होकर ७ अक्टूबर २००२ को हिन्दू जनजागृति समिति की स्थापना हुई । धर्मशिक्षा, धर्मजागृति, धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा, हिन्दू-संगठन आदि द्वारा हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य करना, समिति का ध्येय है । समिति के कार्य से निम्नांकित परिणाम साध्य हुए हैं ।

१. सर्वधर्म सभा, सर्वसंप्रदाय सभा व नामफेरी द्वारा सांप्रदायिक एकता साध्य ! हिन्दू धर्मजागृति सभा और हिन्दू संगठन मेलों द्वारा लाखों हिन्दुआें में धर्मजागरण !

२. स्वरक्षा व प्रथमोपचार प्रशिक्षणवर्ग तथा आपातकालीन सहायता अभियान आदि द्वारा समाजसहायता !

३. Hindujagruti.org से प्रतिमाह ८ लाख से अधिक पाठकों में राष्ट्र-धर्म जागृति !

४. प्रांतीय, राज्यस्तरीय और अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनों द्वारा २५० से अधिक राष्ट्रप्रेमी एवं धर्मप्रेमी संगठनों का संगठन !

५. धर्मप्रेमी महिलाआें के संगठन हेतु हिन्दू जनजागृति समिति की रणरागिनी शाखा कार्यान्वित !
(स्थापना : सितंबर २००९)

आ. सनातन साधक-पुरोहित पाठशाला

सात्त्विक और धर्मशिक्षा देनेवाले साधक-पुरोहित निर्माण करनेवाली सनातन साधक-पुरोहित पाठशाला (स्थापना : ३० अप्रैल २००८)

इ. Balsanskar.com (स्थापना : १६.३.२०१०)

यह परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा संकलित बालसंस्कार ग्रंथमाला के ज्ञान पर आधारित है ।

ई. हिन्दू विधिज्ञ परिषद

राष्ट्र और धर्म के हित के लिए लडनेवाले धर्मप्रेमी अधिवक्ताआें का संगठन हिन्दू विधिज्ञ परिषद (स्थापना : १४ जून २०१२)

उ. सनातन हिन्दू धर्मदीक्षा केंद्र

अहिन्दुआें का स्वेच्छापूर्वक हिन्दूकरण और धर्मांतरितों का स्वेच्छापूर्वक शुद्धिकरण करने के लिए कार्यरत सनातन हिन्दू धर्मदीक्षा केंद्र (स्थापना : ५ मार्च २०१४)

ऊ. सनातन अध्ययन केंद्र

हिन्दू संगठनों के वक्ता एवं प्रवक्ताआें की वैचारिक सहायता के लिए सनातन अध्ययन केंद्र (स्थापना : १ दिसंबर २०१५) । विविध परिचर्चाएं, कार्यक्रम एवं टीवी चैनलों के चर्चासत्र आदि में हिन्दू धर्म का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के वक्ता और प्रवक्ताआें को वैचारिक सहायता देने का कार्य सनातन अध्ययन केंद्र द्वारा किया जाता है ।

ए. स्पिरिच्युअल सायन्स रिसर्च फाउंडेशन

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक शोधकार्य से प्रेरित होकर ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में इस संस्था की स्थापना हुई । आध्यात्मिक शोधकार्य १८ विदेशी भाषाआें में SSRF.org पर उपलब्ध है । प्रतिमास ९ लाख से अधिक पाठक साधना करने लगे हैं ।

एे. फोरम फॉर हिन्दू अवेकनिंग

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के धर्मजागृति के कार्य से प्रेरित होकर अमेरिका के हिन्दुआें में धर्मजागृति हो, इसलिए फोरम फॉर हिन्दू अवेकनिंग संस्था स्थापित हुई । forumforhinduawakening.org से इसका कार्य हो रहा है ।

 

संत, संप्रदाय, हिन्दुत्वनिष्ठ, देशभक्त एवं सामाजिक कार्यकर्ताआें का संगठन एवं उनका दिशादर्शन करनेका कार्य संगठनकार्य

संत

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने वर्ष २००१ से वर्ष २००५ की कालावधि में अनेक संतों से मिलकर उन्हें राष्ट्र-धर्म रक्षा के लिए उद्युक्त किया । वर्तमान में राष्ट्र-धर्म रक्षा के लिए कार्य करनेवाले संतों का संगठन सनातन के संत पूज्य डॉ. चारुदत्त जी पिंगळे और राष्ट्र-धर्म रक्षा के लिए आध्यात्मिक स्तर पर कार्य करनेवाले संतों का संगठन पूज्य श्रीमती अंजली गाडगीळ दोनों अथकरूप से कर रहे हैं ।

संप्रदाय

राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए विविध संप्रदाय संगठित हो जाएं, इसलिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के नेतृत्व में महाराष्ट्र एवं गोवा राज्यों में सार्वजनिक सर्वसंप्रदाय सत्संग आयोजित किए गए । प्रसारमाध्यमों द्वारा विविध संप्रदायों के प्रमुख संतों की अपकीर्ति की गई, तब उन्होंने उनके भक्तों को आधार दिया ।

देशभक्त और हिन्दुत्वनिष्ठ

देशभक्त और हिन्दुत्वनिष्ठों के संगठन से ही हिन्दू राष्ट्र-स्थापना का कार्य संभव है, इसलिए पूरे भारत के राष्ट्रप्रेमी और हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को एकत्रित लानेवाला व्यासपीठ होना चाहिए, ऐसा विचार वर्ष २०११ में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने सर्वप्रथम प्रस्तुत किया । इन विचारों से प्रेरित होकर सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति संयुक्त रूप से वर्ष २०१२ से प्रतिवर्ष गोवा में अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन और अन्यत्र राज्यस्तरीय एवं जिलास्तरीय हिन्दू अधिवेशन आयोजित कर रही हैं ।

सामाजिक कार्यकर्ता

हिन्दू राष्ट्र-स्थापना में समाज का प्रत्यक्ष सहभाग बढे, इसलिए परात्पर गुुरु डॉ. आठवलेजी के विचारों से प्रेरित होकर सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति ने सूचना अधिकार के लिए कार्यरत संगठन, भ्रष्टाचारविरोधी संस्थाएं, अश्‍लीलताविरोधी संगठन, निवृत्त पुलिस एवं सेना अधिकारियों के संगठन, ज्येष्ठ नागरिक संघ, महिला मंडल आदि के संगठन का कार्य आरंभ किया है ।

दिशादर्शन

जिज्ञासु ही ज्ञान का अधिकारी इस न्याय से परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी संत, संप्रदाय, हिन्दुत्वनिष्ठ, देशभक्त और सामाजिक कार्यकर्ताआें को साधना, हिन्दू राष्ट्र-स्थापना, हिन्दुत्व का कार्य करने का योग्य दृष्टिकोण, काल की दृष्टि से कार्य की सफलता आदि सूत्रों संबंधी दिशादर्शन करते हैं ।

(इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी सनातन के ईश्‍वरीय राज्य की स्थापना, हिन्दू राष्ट्र क्यों आवश्यक है ? और हिन्दू राष्ट्र की स्थापना की दिशा ! ग्रंथों में दी है ।)

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