परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का विजयादशमी निमित्त संदेश

 

हिन्दुओ, आतंकवाद का प्रतिकार करने की तैयारी करें !

‘हिन्दुओं के देवता और राष्ट्रपुरुषों की विजय का इतिहास बतानेवाला दिन है ‘विजयादशमी ।’ अनेक शतकों से पराभूत हिन्दू समाज द्वारा वर्तमान में विजयादशमी के दिन घरों में शस्त्रपूजन, अपराजितापूजन और सीमोल्लंघन की कृति केवल औपचारिकता के रूप में की जाती है । आज शस्त्रपूजा केवल खेती और घरेलू उपकरणों के पूजन तक मर्यादित हो गई है । धर्मशिक्षा के अभाव में अपराजिता देवी का पूजन लुप्त हो गया है और पहले युद्ध के लिए किया जानेवाला सीमोल्लंघन अब केवल नगर सीमा से बाहर स्थित मंदिर में जाकर दर्शन करने तक सीमित हो गया है ।

हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों द्वारा राज्य स्थापित किया गया । इस अफगानिस्तान से अब देहली दूर नहीं । इसलिए कश्मीर से केरल तक ‘स्लीपर सेल्स’ (गुप्त पद्धति से आतंकवादियों की सहायता करनेवाले धर्मांधों का स्थानीय गुट) में सक्रिय आतंकवादी भारत में ‘तालिबानी राज्य’ लाने के लिए उत्सुक है । कश्मीर के जिहादी संगठनों द्वारा तालिबान से सहायता मांगना, कश्मीरी नेताओं द्वारा तालिबान को समर्थन देना, पंजाब-उत्तर प्रदेश में आतंकवादी पकडे जाना आदि इसके दृश्य उदाहरण हैं । वे कभी भी भारत के साथ युद्ध घोषित कर सकते हैं । ऐसी स्थिति में स्वयं के परिवार और समाज की रक्षा करने के लिए सशस्त्र आतंकवादियों का प्रतिकार करने की तैयारी करें !

ध्यान रखें, शस्त्रपूजन द्वारा उपकरणों में शक्ति की प्रतिष्ठापना होती है । अपराजिता देवी का पूजन अर्थात पराजय टालना और विजयप्राप्ति हेतु की गई शक्ति की आराधना । सीमोल्लंघन अर्थात प्रत्यक्ष विजय हेतु शत्रु की सीमा में प्रवेश करना । विजयादशमी के कर्मकांड का यह अर्थ समझकर कालानुसार प्रत्येक कृति करें ! वैधानिक अनुमति प्राप्त शस्त्रों का पूजन करें ! हिन्दुओं की विजय होने हेतु अपराजिता देवी का भावपूर्ण पूजन करें ! इस वर्ष विजयादशमी को खरा सीमोल्लंघन करने का आरंभ अर्थात अपने क्षेत्र की संदेहजनक आतंकवादी गतिविधियों की जानकारी पुलिस-प्रशासन को दें ! हिन्दुओं, यह कृतियां भी यदि निश्चयपूर्वक की, तो विजयादशमी मनाने का खरा आनंद प्राप्त होगा !’

– (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था.

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